Ram Bhakt Hanuman katha: हनुमान जी और राम जी के वैसे तो बहुत सारे किस्से ऐसे हैं, जिनके बारे में हम जानते हैं। इन्हीं में से एक किस्सा ऐसा भी है, जब राम जी ने हनुमान जी से कुछ मांगने के लिए कहा। फिर हनुमान जी ने जो किया वो हैरान करने वाला था। 

Hanuman ji Ram Darbar Kahani: हनुमान जी, राम जी के बहुत बड़े और सबसे प्रिय भक्त हैं। माता सीता को रावण की कैद से बाहर लाने में हनुमान जी ने ही भगवान राम की मदद की थी। कहते हैं कि जहां-जहां राम का नाम होगा, वहां-वहां भगवान हनुमान मौजूद रहेंगे। एक बार राम जी ने हनुमान जी से कुछ मांगने के लिए कहा। उस वक्त हनुमान जी ने जो चीज भगवान श्री राम से हक से मांगी, उसे सुनकर सीता मइया समेत अयोध्या का हर एक निवासी हैरान रह गया। इसका किस्सा खुद बाबा बागेश्वर, जिनका असली नाम धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री हैं, उन्होंने अपनी कथा में सुनाया।

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जब हनुमान जी ने किया अयोध्यावासियों की नाक में दम

भगवान राम और हनुमान जी के भक्त को अद्भुत किस्सा सुनाते हुए बाबा बागेश्वर ने कहा,' राम जी से जो कोई भी जुड़ा, उसे कुछ न कुछ मिला। अंगद को युवराज बनाया, विभीषण को लंका का राजा बनाया और सुग्रीव को भी राजा का पद दिलवाया। राम जी ने हनुमान जी से कहा तुम भी कुछ मांगो। ये बात राम जी ने अपने मन से नहीं कही, बल्कि अयोध्यावासी उनके पीछे पड़ गए थे, इसीलिए कही।' राम जी ने कहा, 'आप लोग आखिर इस चीज के लिए क्यों पीछे पड़े हो? इस पर अयोध्यावासियों ने कहा,' ये (यहां हनुमान जी का जिक्र हो रहा है) जब से आए हैं, तब से आपके चरण नहीं छोड़ रहे हैं। अब हमारे लिए ये नो एंट्री जोन हो गया है। हमें आपके पास आने का अवसर नहीं मिल रहा है। हम सभी ने इनकी लंका वाली कहानी सुन ली है, लेकिन हिम्मत ही नहीं होती की कुछ कह दें।'

जब हनुमान जी ने वक्त रहते ही मांग ली राम जी से ये अनोखी चीज

बाबा बागेश्वर ने आगे किस्सा सुनाते हुए कहा,' इस विषय में किसी से कहें कि राम जी इनको भी कुछ दे दे। किसी गांव का राजा बना दें, लेकिन इन्हें यहां से जाने दें। इस सिलसिले में माता सीता, लक्ष्मण, भरत सबसे बात की गई, लेकिन किसी भी इस कार्य को स्वीकार नहीं किया। आखिर में आकर सभी अयोध्या वासियों ने मिलकर राम जी से कहा कि आप एक काम करिए इनको (हनुमान जी) भी कुछ दे दीजिए औऱ इन्हें जाने दें। राम जी ने हनुमान जी से कहा कि तुम कुछ मांगो। इसके जवाब में हनुमान जी ने कहा कि आपने सबको एक-एक पद दिया है और हम आपके सबसे प्रिया हैं तो हमें दो पद दो। इस पर अयोध्या वाले बोले तीन दे दो। अगर ये विदा हो रहे हैं तो और अधिक दे दो। हनुमान जी ने इसके बाद राम जी के दोनों चरण पकड़ कर कहा कि हम इन दोनों को छोड़कर नहीं जाएंगे। हनुमान जी की ये बात सुनते ही सभी अयोध्यावासी दंग रहे गए। उन्हें ये समझ आ गया कि हनुमान जी और राम जी को एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता है।

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