आयरलैंड के गेंदबाज जय मूंदड़ा भारत के लिए घातक साबित हो रहे हैं। पहले मैच में 2 विकेट लेने के बाद दूसरे मैच में उन्होंने टीम इंडिया को फिर मुसीबत में डाला है।
Who is Jai Moondra: आयरलैंड के खिलाफ दूसरे मैच में टीम इंडिया एक बार फिर मुसीबत में दिख रही है। भारतीय टीम को मुसीबत में डालने वाला शख्स कोई और नहीं बल्कि भारत के ही राजस्थान से ताल्लुक रखने वाला जय मूंदड़ा है। आयरलैंड के तेज गेंदबाज जय मूंदड़ा ने भारत के खिलाफ पहले टी20 मैच में शानदार प्रदर्शन के बाद दूसरे मैच में भी दमदार बॉलिंग से सभी को चौंका दिया है। मूंदड़ा ने अपने पहले ओवर में ही टीम इंडिया के दोनों ओपनर्स संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा को 0 पर आउट कर हलचल मचा दी।

अभिषेक-सैमसन के बाद कप्तान अय्यर को भी पैवेलियन भेजा
जय मूंदडा की घातक गेंदबाजी यहीं नहीं रुकी। उन्होंने तीसरे ही ओवर में कप्तान श्रेयस अय्यर को भी सिर्फ 10 रन के स्कोर पर बोल्ड कर दिया। फिलहाल भारत 54 रन पर 4 विकेट गंवाकर संघर्ष कर रहा है। अगर यह मैच टीम इंडिया हारती है, तो सीरिज भी गंवा देगी।
कौन हैं जय मूंदड़ा?
राजस्थान के जयपुर के पास स्थित छोटे शहर टोंक में जन्मे 29 वर्षीय जय मूंदड़ा की क्रिकेट यात्रा काफी प्रेरणादायक रही है। उन्होंने अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन कभी हार नहीं मानी। क्रिकेट के साथ-साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई को भी बराबर महत्व दिया और इसी संतुलन ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचाया।
मास्टर डिग्री के लिए आयरलैंड पहुंचे, वहीं से बदली किस्मत
साल 2021 में जय मूंदड़ा ने कुछ समय के लिए क्रिकेट से दूरी बना ली। वह इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री करने के लिए आयरलैंड चले गए। आयरलैंड पहुंचने के बाद उन्होंने वहां के मशहूर लेनस्टर क्रिकेट क्लब (Leinster Cricket Club) से खेलना शुरू किया। उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन का नतीजा यह रहा कि वह 2023 में आयरिश सीनियर कप जीतने वाली लेनस्टर टीम का हिस्सा बने। इसके अलावा वह लेनस्टर लाइटनिंग (Leinster Lightning) के लिए भी नियमित रूप से खेलते रहे।
कैसे आयरलैंड के लिए खेलने लगे मूंदड़ा?
जय मूंदड़ा को पहली बार आयरलैंड की राष्ट्रीय टीम में जगह तेज गेंदबाज जोश लिटिल के चोटिल होने के बाद मिली। यह उनके करियर का सबसे बड़ा मौका था, जिसे उन्होंने दोनों हाथों से स्वीकार किया।
भारत के खिलाफ डेब्यू में पहली ही गेंद पर लिया विकेट
भारत के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले में जय मूंदड़ा को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू का मौका मिला। उन्होंने अपने डेब्यू मैच को यादगार बना दिया। मूंदड़ा ने अपनी पहली ही गेंद पर भारतीय बल्लेबाज संजू सैमसन को बोल्ड कर दिया। इसके बाद उन्होंने शिवम दुबे का भी विकेट लिया। उन्होंने चार ओवर में 26 रन देकर 2 अहम विकेट हासिल किए। आयरलैंड की ऐतिहासिक जीत में उनका प्रदर्शन बेहद अहम साबित हुआ।
डेब्यू के बाद क्या बोले जय मूंदड़ा?
मैच के बाद जय मूंदड़ा ने कहा कि यह उनके, उनके परिवार और पूरी टीम के लिए बेहद खास पल था। उन्होंने बताया कि उनके परिवार और टीम के साथियों ने लगातार उनका हौसला बढ़ाया, इसलिए उन्होंने पूरे मैच के दौरान शांत रहकर अपना स्वाभाविक खेल खेलने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अब तक जिस तरीके से वह क्रिकेट खेलते आए हैं, उसी पर भरोसा रखते हुए उन्होंने इस बड़े मंच पर भी खुद को संभाला।
'भारत के खिलाफ खेलना सपना सच होने जैसा'
जय मूंदड़ा का कहना है कि वो भारत के खिलाफ अपने अंतरराष्ट्रीय डेब्यू को पूरी जिंदगी याद रखेंगे। उन्होंने स्वीकार किया कि मैच शुरू होने से पहले वह उत्साहित थे, लेकिन भारत जैसी मजबूत टीम के खिलाफ पहली ही गेंद पर विकेट मिलने के बाद भी उन्होंने खुद को ज्यादा भावुक नहीं होने दिया। उनका पूरा ध्यान मैच पर था। उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहुंचना और भारत जैसी टीम के खिलाफ खेलना उनके लिए किसी सपने के सच होने से कम नहीं है।
मां विद्या मूंदड़ा ने जताया गर्व, भारत की हार का भी रहा दुख
जय मूंदड़ा की मां विद्या मूंदड़ा ने बेटे के प्रदर्शन पर गर्व जताते हुए कहा कि उन्हें भारत की हार का दुख जरूर है, लेकिन इससे भी ज्यादा खुशी इस बात की है कि उनके बेटे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने परिवार, राजस्थान और देश का नाम रोशन किया। उन्होंने बताया कि जय ने मैच में दो विकेट लिए और बचपन से ही जो भी उन्हें खेलते देखता था, वह कहता था कि उन्हें क्रिकेट में आगे बढ़ना चाहिए।
पिता चाहते थे पहले पढ़ाई पूरी करें
विद्या मूंदड़ा के मुताबिक, 10वीं कक्षा के बाद जय ने अपनी पढ़ाई पर अधिक ध्यान दिया क्योंकि उनके पिता की इच्छा थी कि वह पहले अपनी डिग्री पूरी करें और उसके बाद क्रिकेट पर पूरा फोकस करें। जय ने अपने परिवार की सलाह मानी, पढ़ाई पूरी की और फिर क्रिकेट में पूरी मेहनत से वापसी की। उन्होंने एक क्रिकेट अकादमी भी ज्वाइन की, जहां अपनी प्रतिभा को और निखारा। पढ़ाई और क्रिकेट के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ने का उनका यही सफर आज उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक लेकर आया।


