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Washington Sundar: साउथ अफ्रीका के खिलाफ सुंदर को क्यों मिलना चाहिए मौका? 3 बड़ी वजह
T20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर 8 मैच में साउथ अफ्रीका के खिलाफ वॉशिंगटन सुंदर भारत के लिए तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं। सुंदर के स्किल्स बाएं हाथ के बल्लेबाजों और अहमदाबाद की कंडीशंस के लिए एकदम फिट बैठते हैं।

बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ शानदार रिकॉर्ड
साउथ अफ्रीका की टॉप-6 बैटिंग लाइन-अप में तीन बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं: क्विंटन डी कॉक, रयान रिकेल्टन और डेविड मिलर। एक ऑफ-स्पिनर होने के नाते सुंदर गेंद को इन बल्लेबाजों से दूर ले जाते हैं, जिससे विकेट लेने के मौके बनते हैं। डी कॉक और रिकेल्टन विस्फोटक शुरुआत के लिए जाने जाते हैं, जबकि मिलर फिनिशर की भूमिका निभाते हैं। इनमें से किसी को भी जल्दी आउट करने से साउथ अफ्रीका पर दबाव बनेगा।
cricmetric.com के अनुसार, सुंदर ने बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ 50 T20I पारियों में 26 विकेट लिए हैं। इस दौरान उनका इकोनॉमी रेट 6.84 का रहा है। बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ उनकी 49.7% गेंदें डॉट बॉल होती हैं, जो रन रोकने की उनकी काबिलियत को दिखाता है।
पावरप्ले में साबित हुए असरदार
सुंदर की एक और बड़ी खासियत पहले छह ओवरों यानी पावरप्ले में उनकी असरदार गेंदबाजी है। उन्होंने पावरप्ले में 37 पारियों में 21 विकेट चटकाए हैं और उनका इकोनॉमी रेट सिर्फ 6.79 का रहा है। इस दौरान उनकी 52.2% गेंदें डॉट रही हैं। उन्होंने 68 ओवरों में सिर्फ 41 चौके और 18 छक्के दिए हैं, यानी वह हर 7.83 गेंदों के बाद एक बाउंड्री देते हैं।
शुरुआत में रन रोकने की यह क्षमता साउथ अफ्रीका के आक्रामक टॉप ऑर्डर के खिलाफ बहुत अहम हो सकती है। नई गेंद से उनका अनुशासन उन्हें शुरुआत में दबाव बनाने के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बनाता है।
बैटिंग में गहराई और लोकल नॉलेज का फायदा
सुंदर भारत की बैटिंग लाइन-अप को भी मजबूती देते हैं। वह नंबर 8 पर आराम से बैटिंग कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर तेजी से रन बना सकते हैं। नंबर 6 पर उनका स्ट्राइक रेट 159.09 और नंबर 8 पर 151.28 का है, जो उनकी फिनिशिंग स्किल्स को दिखाता है। उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ 28 गेंदों में 50 और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 35 गेंदों में नाबाद 49 रन बनाए हैं।
IPL में गुजरात टाइटंस के लिए खेलने के कारण सुंदर अहमदाबाद की परिस्थितियों से अच्छी तरह वाकिफ हैं। वह यहां की लंबी बाउंड्री का फायदा गेंद और बल्ले, दोनों से उठा सकते हैं। यह खूबी उन्हें भारत के लिए एक डबल-थ्रेट ऑप्शन बनाती है।

