सोनीपत की एक हॉकी एकेडमी से 5 खिलाड़ी वर्ल्ड कप खेल रहे हैं। इनमें प्रीतम रानी व उनके बेटे यशदीप भी हैं, जो वर्ल्ड कप खेलने वाली पहली माँ-बेटे की जोड़ी है। भारतीय महिला टीम ने इंग्लैंड से ड्रॉ कर क्वार्टर फाइनल में जगह पक्की की।

नई दिल्ली: जब किसी एक जिले या गांव से कोई एक खिलाड़ी भी इंडिया टीम के लिए खेलता है, तो यह बड़ी बात होती है। लेकिन भारतीय हॉकी में सोनीपत की एक ही एकेडमी से निकले पांच खिलाड़ी वर्ल्ड कप में देश का नाम रोशन कर रहे हैं। ये कहानी एक ऐसे हॉकी परिवार की है जिसने इतिहास रच दिया है।

सोनीपत के हॉकी परिवार का कमाल

साल 1998 में नीदरलैंड्स में हुए महिला हॉकी वर्ल्ड कप में प्रीतम रानी सिवाच भारत के लिए खेली थीं। अब ठीक 28 साल बाद, उनके बेटे यशदीप सिवाच पुरुषों के हॉकी वर्ल्ड कप में भारत की तरफ से खेल रहे हैं। इसके साथ ही, प्रीतम और यशदीप भारत के लिए वर्ल्ड कप खेलने वाली पहली मां-बेटे की जोड़ी बन गए हैं।

दिलचस्प बात यह है कि प्रीतम रानी अपने पति कुलदीप सिवाच के साथ सोनीपत में एक हॉकी एकेडमी चलाती हैं। कुलदीप खुद भी एक हॉकी कोच हैं। इस एकेडमी में ट्रेनिंग लेने वाली चार और लड़कियां इस बार महिला वर्ल्ड कप में खेल रही हैं। इनमें डिफेंडर ज्योति, मिडफील्डर नेहा गोयल, शिल्पी डाबस और फॉरवर्ड साक्षी राणा शामिल हैं, जो भारतीय टीम का हिस्सा हैं।

हॉकी वर्ल्ड कप: क्वार्टर फाइनल में पहुंची भारतीय महिला टीम

एम्सटेलवीन: हॉकी वर्ल्ड कप में पुरुषों के बाद अब भारतीय महिला टीम ने भी क्वार्टर फाइनल यानी आखिरी-8 में अपनी जगह पक्की कर ली है। गुरुवार को इंग्लैंड के खिलाफ हुआ अहम मुकाबला गोल रहित ड्रॉ पर खत्म हुआ। इस ड्रॉ के साथ भारतीय टीम 'ग्रुप डी' में दूसरे स्थान पर रहते हुए अगले राउंड में पहुंच गई।

टीम ने 3 मैचों में 1 जीत और 2 ड्रॉ के साथ 5 अंक हासिल किए। वहीं, इंग्लैंड 4 अंकों के साथ टूर्नामेंट से बाहर हो गया। भारत ने इससे पहले चीन के साथ ड्रॉ खेला था और दक्षिण अफ्रीका को 6-1 से हराया था। अगले राउंड में जाने के लिए इंग्लैंड के खिलाफ कम से कम एक ड्रॉ जरूरी था। हालांकि, इस मैच में पासिंग, बॉल कंट्रोल और पेनल्टी कॉर्नर के मौकों पर टीम का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा, लेकिन टीम हार बचाने में कामयाब रही। भारत को शुरुआती 15 मिनट में ही 3 पेनल्टी कॉर्नर मिले थे, लेकिन टीम उन्हें गोल में नहीं बदल सकी।