पेरिस ओलंपिक में जिम्नास्ट स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाली अमेरिकी जिम्नास्ट को निराशा हाथ लगी है। उन्हें अपना पदक रोमानिया को लौटाना होगा। इस फैसले ने भारतीय प्रशंसकों में एक नई उम्मीद जगाई है।

नई दिल्ली: भारत की स्टार महिला पहलवान विनेश फोगाट का अयोग्यता मामला अभी भी खेल न्यायालय में लंबित है। इसी बीच अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय की एक पीठ ने जिम्नास्ट स्पर्धा में हुई एक बड़ी चूक को सुधारते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अमेरिका की टीम से कांस्य पदक वापस लेकर रोमानिया की टीम को देने का आदेश दिया गया है। इस फैसले के बाद भारतीय फैंस 13 अगस्त को आने वाले फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

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दरअसल, अमेरिका की जिम्नास्ट जॉर्डन चिलीज़ ने पहले कांस्य पदक जीता था। इस पदक को रोमानिया को वापस देने का आदेश अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय की पीठ ने दिया है। इस मामले में ओलंपिक में जिम्नास्ट स्पर्धा के नतीजे घोषित होने के बाद रोमानिया ने फैसले के खिलाफ अपील की थी। इस पर संज्ञान लेते हुए अंतरराष्ट्रीय जिम्नास्टिक महासंघ ने चिलीज़ के स्कोर में संशोधन किया। जिसके बाद कांस्य पदक अमेरिका से रोमानिया के पास चला गया।

अमेरिकी टीम के पास नतीजों पर एक मिनट के भीतर अपनी आपत्ति दर्ज कराने का मौका था। लेकिन अमेरिका ने एक मिनट और 4 सेकंड की देरी से आपत्ति दर्ज कराई थी। इसी बात को आधार बनाकर रोमानियाई टीम के कोच ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और कहा था कि अमेरिका को दिया गया कांस्य पदक उन्हें मिलना चाहिए।

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मामले की सुनवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय ने इस तकनीकी पहलू के आधार पर रोमानियाई टीम का पक्ष लिया। साथ ही रोमानियाई टीम को तीसरा स्थान देते हुए चिलीज़ को कांस्य पदक वापस करने का आदेश दिया। इस फैसले ने भारतीयों के मन में एक उम्मीद जगाई है।

गौरतलब है कि विनेश फोगाट ने महिलाओं की 50 किग्रा वर्ग में फाइनल में जगह बनाई थी। लेकिन फाइनल मुकाबले से पहले 100 ग्राम वजन ज्यादा होने के कारण उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इस मामले में खुद को अयोग्य ठहराए जाने को चुनौती देते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी है और फैसला 13 अगस्त को आना है। ऐसे में देखना होगा कि क्या जिम्नास्टिक की तरह कुश्ती में भी विनेश फोगाट के पक्ष में फैसला आता है या नहीं।