Vaibhav Suryavanshi Safari: बिहार के क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी वर्धा के बोर टाइगर रिज़र्व में सफारी के बाद अब दलीप ट्रॉफी की तैयारी में जुट गए हैं. उन्हें ईस्ट ज़ोन का उप-कप्तान बनाया गया है और वो विक्रम राठौड़ की देखरेख में अभ्यास कर रहे हैं.
Vaibhav Suryavanshi Duleep Trophy: क्रिकेट के मैदान पर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से सुर्खियां बटोरने वाले युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी इन दिनों अपने खेल के एक नए पहलू पर काम कर रहे हैं। क्रिकेट के व्यस्त शेड्यूल से थोड़ा वक्त निकालकर उन्होंने महाराष्ट्र के वर्धा स्थित बोर टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी का आनंद लिया। करीब चार घंटे जंगल में बिताने के बाद वैभव अब फिर मैदान पर लौट चुके हैं और आगामी दलीप ट्रॉफी के लिए रेड-बॉल क्रिकेट की खास तैयारी कर रहे हैं।
बोर टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी का लिया मजा
क्रिकेट की चकाचौंध से दूर वैभव सूर्यवंशी को हाल ही में महाराष्ट्र के बोर टाइगर रिजर्व में देखा गया, जहां उन्होंने करीब चार घंटे जंगल सफारी की। इस दौरान उन्होंने जंगल के खूबसूरत नजारों और वन्यजीवों को करीब से देखा। हालांकि, उन्हें इस सफारी के दौरान बाघ देखने का मौका मिला या नहीं, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। यह ब्रेक उनके लिए मानसिक तौर पर तरोताजा होने का एक अच्छा मौका रहा।
सफारी के बाद सीधे क्रिकेट की तैयारी
जंगल सफारी खत्म होते ही वैभव फिर अपने असली मिशन में जुट गए। वह महाराष्ट्र के तालेगांव स्थित राजस्थान रॉयल्स की अकादमी पहुंचे, जहां इन दिनों खास रेड-बॉल ट्रेनिंग कैंप चल रहा है। करीब 10 दिन के इस प्री-सीजन कैंप में वैभव लंबे समय तक क्रीज पर टिकने और लाल गेंद के खिलाफ अपनी तकनीक मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं।
विक्रम राठौड़ की निगरानी में हो रही खास ट्रेनिंग
वैभव सूर्यवंशी की ट्रेनिंग पर राजस्थान रॉयल्स के सीनियर बैटिंग कोच विक्रम राठौड़ भी खास नजर रख रहे हैं। T20 और लिमिटेड ओवर्स क्रिकेट में अपने आक्रामक अंदाज के लिए पहचान बनाने वाले वैभव अब अपने खेल में धैर्य और तकनीकी मजबूती जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। रेड-बॉल क्रिकेट में लंबी पारियां खेलने के लिए उनकी बल्लेबाजी की बारीकियों पर खास काम किया जा रहा है।
पहली बार दलीप ट्रॉफी में बड़ी जिम्मेदारी
वैभव के लिए आगामी 2026 दलीप ट्रॉफी बेहद खास होने वाली है। उन्हें ईस्ट जोन टीम में शामिल करने के साथ-साथ उप-कप्तान की जिम्मेदारी भी दी गई है। इतनी कम उम्र में यह जिम्मेदारी मिलना उनके करियर के लिए बड़ा पड़ाव माना जा रहा है। अब उनके सामने न सिर्फ शानदार बल्लेबाजी करने की चुनौती होगी, बल्कि टीम की जिम्मेदारी निभाने का भी दबाव रहेगा।
फर्स्ट-क्लास आंकड़ों में सुधार पर नजर
रेड-बॉल क्रिकेट में वैभव के मौजूदा आंकड़े अभी उनकी क्षमता के मुताबिक प्रभावशाली नहीं हैं। उन्होंने अब तक 10 फर्स्ट-क्लास मैचों में करीब 17 के औसत से 207 रन बनाए हैं और उनके नाम सिर्फ एक अर्धशतक है। ऐसे में दलीप ट्रॉफी उनके लिए खुद को साबित करने का बड़ा मंच बन सकती है। तालेगांव की कड़ी ट्रेनिंग और विक्रम राठौड़ के मार्गदर्शन में वैभव अब लंबी और बड़ी पारियां खेलने के इरादे से मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
