Anant Singh Result: बिहार चुनाव 2025 के शुरुआती रुझानों में मोकामा सीट पर जेल में बंद जेडीयू विधायक अनंत सिंह 700 वोटों से आगे हैं, जबकि आरजेडी की वीणा देवी कड़ी टक्कर दे रही हैं। जनसुराज उम्मीदवार प्रियदर्शी पीयूष पीछे चल रहे हैं।

पटना के राजनीतिक गलियारों में आज सुबह से ही हलचल तेज है।मोकामा विधानसभा सीट, जिसे बिहार की सबसे चर्चित और विवादित सीटों में गिना जाता है, एक बार फिर सुर्खियों में है। वोटों की गिनती के तीसरे चरण में प्रवेश करते ही यहां का मुकाबला रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है। मोकामा की राजनीतिक पहचान हमेशा से बहुबली नेताओं के इर्द-गिर्द घूमती रही है और आज के रुझान भी उसी विरासत की गूंज दिखा रहे हैं।

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अनंत सिंह मामूली बढ़त के साथ आगे

मोकामा सीट पर शुरुआती रुझानों में जेल में बंद जेडीयू विधायक अनंत कुमार सिंह 700 वोटों की हल्की बढ़त बनाए हुए हैं। उनके खिलाफ आरजेडी ने वीणा देवी को उतारा है, जो कड़े मुकाबले में बनी हुई हैं। वहीं जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार प्रियदर्शी पीयूष 10,536 वोटों से पीछे चल रहे हैं। अनंत सिंह फिलहाल हत्या के एक मामले में न्यायिक हिरासत में हैं, लेकिन चुनावी मैदान में उनका प्रभाव अभी भी कायम दिखाई दे रहा है।

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राज्यभर में NDA और महागठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला

चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार बिहार में कुल मिलाकर बेहद करीबी मुकाबला है।

  • जेडीयू: 63 सीटों पर आगे
  • बीजेपी: 61 सीटों पर बढ़त
  • आरजेडी: 34 सीटों पर आगे
  • कांग्रेस: 11 सीटों पर आगे

मतगणना की शुरुआत के साथ ही एनडीए ने बहुमत के आंकड़े 122 को पार कर लिया है, जिससे सत्ता वापसी का संकेत मिलता दिख रहा है।

बीजेपी का दावा, फिर से नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री

बिहार बीजेपी अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने आज कहा कि जनता का जनमत साफ दिख रहा है और एनडीए सरकार दोबारा बनने जा रही है। उन्होंने कहा कि एनडीए ने इस चुनाव में नीतीश कुमार के चेहरे पर चुनाव लड़ा और जनता ने इस निर्णय को स्वीकार किया है। उनके अनुसार पीएम मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह से लेकर चिराग पासवान तक, सभी नेताओं ने मिलकर इस चुनाव को एकजुटता से लड़ा।

मोकामा का इतिहास, बहुबल और राजनीति की मिलीजुली कहानी

मोकामा विधानसभा क्षेत्र अपनी जटिल राजनीतिक पृष्ठभूमि के लिए जाना जाता है। अनंत सिंह, उनके भाई दिलीप सिंह और सूरजभान सिंह जैसे नाम यहां की राजनीति का हिस्सा रहे हैं। इलाके में वर्षों से बहुबलियों का प्रभाव रहा है, और इस बार भी वही कहानी दोहराई जाती दिख रही है। हाल ही में जन सुराज समर्थक दुलर्चंद यादव की हत्या के बाद इस सीट में तनाव और बढ़ गया था। इसी मामले में चुनाव से पहले अनंत सिंह की गिरफ्तारी भी हुई, जिसके बाद मुकाबला और दिलचस्प हो गया।

बिहार की राजनीति में मोकामा हमेशा से एक अहम केंद्र रहा है, और इस बार के चुनाव में भी यह सीट चुनावी विश्लेषकों के लिए सबसे आकर्षक मुकाबलों में से एक बन चुकी है। जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ेगी, मोकामा के रुझान बिहार की व्यापक राजनीतिक तस्वीर पर असर डाल सकते हैं।

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