बिहार चुनाव 2025 के लिए NDA में सीट बंटवारे पर गतिरोध है। भाजपा और जदयू में बड़ी हिस्सेदारी को लेकर खींचतान है। NDA ने रणनीतिक रूप से घोषणा आचार संहिता लागू होने तक टाल दी है।

पटनाः बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नज़दीक है, लेकिन एनडीए (NDA) के भीतर सीट बंटवारे का मसला अब तक अनसुलझा है। भाजपा (BJP) और जदयू (JDU) के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मुलाकात भी इस विषय पर चर्चा का केंद्र बनी, लेकिन कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया। सूत्रों का कहना है कि NDA ने रणनीतिक तौर पर सीट बंटवारे का ऐलान आचार संहिता लागू होने तक टाल दिया है।

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आचार संहिता बनेगी ‘टर्निंग प्वाइंट’

चुनाव आयोग ने मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 30 सितंबर तक पूरा करने की योजना बनाई है। इसके बाद 5 अक्टूबर तक कभी भी आचार संहिता लागू हो सकती है। यानी अक्टूबर के पहले सप्ताह से चुनावी बिगुल औपचारिक रूप से बज जाएगा। आयोग के सूत्रों का कहना है कि मतदान अधिकतम दो चरणों में कराए जाने की संभावना है और 22 नवंबर से पहले पूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

NDA रणनीतिकार चाहते हैं कि सीट बंटवारे और उम्मीदवारों के नामों की घोषणा आचार संहिता लगने के बाद की जाए, ताकि विपक्ष को तैयारी का समय न मिले। यही कारण है कि अभी तक यह मामला ‘सस्पेंस’ की तरह बना हुआ है।

2020 का फॉर्मूला या नया समीकरण?

बीते विधानसभा चुनाव 2020 में NDA ने सीटों का बंटवारा 122-121 के अनुपात में किया था। जदयू को 122 और भाजपा को 121 सीटें मिली थीं। जदयू ने इसमें से 7 सीटें हम (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा) को दी थीं, जबकि भाजपा ने अपने कोटे से 11 सीटें वीआईपी को दी थीं।

इस बार स्थिति थोड़ी जटिल है। NDA में दो नए सहयोगी शामिल हो गए हैं—चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा। ऐसे में भाजपा को अपने कोटे से लोजपा (रामविलास) को लगभग 20 सीटें देनी पड़ सकती हैं। वहीं जदयू को हम और रालोमो के बीच तालमेल बैठाना होगा। सूत्र बताते हैं कि हम को 8-10 और रालोमो को 6-8 सीटें मिल सकती हैं।

बीजेपी-जदयू की आंतरिक खींचतान

भाजपा और जदयू दोनों दल चाहते हैं कि उन्हें ‘बड़ी पार्टी’ का दर्जा मिले। 2020 में जदयू की सीटें कम हुई थीं और बीजेपी विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। इस बार जदयू 122 सीटों की हिस्सेदारी दोहराना चाहती है, लेकिन बीजेपी 130 सीटों से कम पर मानने के मूड में नहीं है। सूत्रों के अनुसार, अमित शाह और नीतीश कुमार की मुलाकात में यह मुद्दा सबसे गर्म रहा, लेकिन दोनों नेताओं ने किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय इस मसले को आचार संहिता के बाद टालने का फैसला किया।

आचार संहिता के बाद NDA का ‘पॉलिटिकल धमाका’

NDA में सीट बंटवारे को लेकर सस्पेंस ने राजनीति में रोमांच पैदा कर दिया है। आचार संहिता लगते ही NDA सबसे पहले सीटों की हिस्सेदारी का ऐलान करेगा और फिर उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की जाएगी। बीजेपी-लोजपा(R), जदयू-हम-रालोमो और संभवत: VIP के बीच तालमेल बैठाने के बाद ही अंतिम तस्वीर साफ होगी।

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि NDA की यह रणनीति विपक्ष को चौंकाने और ‘गेम-चेंजर’ साबित करने के लिए है। लेकिन यह भी सच है कि ज्यादा देर तक सस्पेंस बनाए रखने से कार्यकर्ताओं में असमंजस और नाराज़गी भी बढ़ सकती है।