बिहार में हिजाब विवाद पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सीएम नीतीश कुमार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि नियुक्ति पत्र लेते समय चेहरा दिखाना जरूरी है, यह भारत है, कोई इस्लामिक देश नहीं। घटना को धार्मिक चश्मे से देखना ठीक नहीं है। 

Bihar Hijab Controversy: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा सार्वजनिक कार्यक्रम में एक मुस्लिम महिला नुसरत परवीन का हिजाब खींचने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस बीच, केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता गिरिराज सिंह ने गुरुवार को नीतीश कुमार का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है। अगर कोई नियुक्ति पत्र लेने के लिए जा रहा हो, क्या उसका चेहरा नहीं दिखाएंगे। क्या ये कोई इस्लामिक देश है? उन्होंने आगे कहा, आप पासपोर्ट लेने जाती हो, एयरपोर्ट पर जाती हो तो चेहरा दिखाती हो कि नहीं। ये भारत है और यहां कानून का राज चलेगा। नीतीश कुमार ने बिल्कुल सही किया।

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हर चीज को इस्लाम से जोड़ने की अजीब परंपरा

गिरिराज सिंह ने आगे कहा, नीतीश कुमार अगर अपॉइंटमेंट लेटर बांट रहे थे तो कोई हिजाब के अंदर से नियुक्ति पत्र लेगा क्या? एयरपोर्ट पर जाएं और कहें मैं हिजाब नहीं हटाऊंगी मुझे जाने दो। ये बेवकूफी भरी बात है और हर चीज में इसे इस्लाम से जोड़ने की एक नई परंपरा चल पड़ी है। लोगों को डराने के लिए कोई पंजाब, तो कोई पाकिस्तान से फतवा जारी करता है, जैसे जागीर है उनकी।

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नौकरी करना है या नहीं, ये महिला का पर्सनल मैटर

गिरिराज सिंह से जब पूछा गया कि नुसरत परवीन सरकारी नौकरी लेने से मना कर सकती है, तो उन्होंने जवाब दिया कि यह उस महिला पर निर्भर है कि वह सरकारी नौकरी मना करे या भाड़ में जाए। इस घटना को धार्मिक चश्मे से देखना ठीक नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

हाल ही में पटना में मुख्यमंत्री आवास पर नए भर्ती हुए आयुष डॉक्टरों के लिए अपॉइंटमेंट लेटर बांटने का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस इवेंट से जुड़ा एक वीडियो राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने X पर शेयर किया, जिसमें नीतीश कुमार मंच पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे के साथ दिख रहे हैं। जब नुसरत परवीन नाम की एक महिला डॉक्टर हिजाब से अपना चेहरा ढके हुए मंच पर आई, तो नीतीश कुमार नाराज हो गए। उन्होंने पूछा, यह क्या है? इसके बाद वो उन्होंने खुद ही महिला का हिजाब नीचे खिसका दिया। इसके बाद वायरल हुए वीडियो से मामले ने तूल पकड़ लिया और खबर आई कि नुसरत परवीन अब सरकारी डॉक्टर की नौकरी नहीं करेंगी। बता दें कि इस कार्यक्रम में 1283 आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र बांटे गए, जिनमें आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी डॉक्टर शामिल थे। इनमें से महज 10 को ही व्यक्तिगत रूप से लेटर दिए गए, बाकी को ऑनलाइन बांटा गया।