बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर मुकाबला है। 6 नवंबर को मतदान और 14 नवंबर को परिणाम आएंगे। NDA और महागठबंधन के बीच सीधी टक्कर है, लेकिन प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी ने कई सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।

पटनाः बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अपने पहले चरण में पूरी तरह रोचक मोड़ पर पहुंच चुका है। इस फेज में 18 जिलों की 121 सीटों पर नामांकन पूरे हो गए हैं और सियासी तापमान लगातार बढ़ रहा है। इस चुनाव में मतदान 6 नवंबर और परिणाम 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। एनडीए और महागठबंधन के बीच सीधा मुकाबला है, लेकिन इस बार प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी की एंट्री ने समीकरणों को उलझा दिया है।

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पटना जिले में दिग्गजों की जंग

राजधानी पटना की 14 सीटों पर कुल 158 प्रत्याशी मैदान में हैं। यहां पटना साहिब सीट पर भाजपा के रत्नेश कुशवाहा और कांग्रेस के शशांत शेखर के बीच दिलचस्प टक्कर है। बांकीपुर सीट से भाजपा के नितिन नवीन और आरजेडी की रेखा कुमारी में मुकाबला है। मोकामा सीट पर इस बार दो बाहुबलियों की टक्कर है। एक ओर छोटे सरकार अनंत सिंह तो दूसरी ओर उनके सामने खड़ी हैं सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी।

राघोपुर का मुकाबला भी होगा दिलचस्प

सबसे चर्चित सीट वैशाली जिला के राघोपुर की है, जहां पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव एक बार फिर मैदान में हैं। यह यादव परिवार का राजनीतिक गढ़ माना जाता है। उनके सामने एनडीए के सतीश कुमार यादव और जनसुराज पार्टी के चंचल कुमार हैं। इस सीट से तेजस्वी यादव तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं।

छपरा में सिनेमा बनाम सियासत

छपरा सीट सबसे चर्चित है। भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव ने राजनीति में एंट्री लेकर यहाँ से नामांकन किया है। उनके सामने एनडीए की छोटी कुमारी और राजद के शत्रुघ्न यादव हैं, जबकि जनसुराज पार्टी से जय प्रकाश सिंह मैदान में हैं। खेसारी के आने से छपरा की सियासत में उत्साह और स्टार पावर दोनों जुड़ गए हैं। अब सवाल यह है। जनता इस बार “हीरो” चुनेगी या “अनुभवी नेता”?

सीवान में मंगल पांडेय की परीक्षा

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मंगल पांडेय सीवान सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने आरजेडी के अवध बिहारी चौधरी हैं। यह सीट पारंपरिक रूप से गर्म मिजाज मानी जाती है, जहां जातीय समीकरण, संगठन की ताकत और स्थानीय मुद्दे निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

नालंदा में नीतीश की लोकप्रियता की परीक्षा

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा की सीटों पर इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प है। यहाँ जदयू के श्रवण कुमार लगातार सातवीं बार चुनाव मैदान में हैं, जिनके सामने कांग्रेस के कौशलेंद्र कुमार और जनसुराज की कुमारी पूनम सिन्हा हैं। यह सीट “नीतीश ब्रांड की लोकप्रियता” की सीधी परीक्षा मानी जा रही है।

दरभंगा और भोजपुर की टक्कर

दरभंगा सीट पर भाजपा के संजय सरवगी, वीआईपी पार्टी के उमेश सहनी, और जनसुराज के आर.के. मिश्रा के बीच त्रिकोणीय संघर्ष है। वहीं भोजपुर जिले की संदेश सीट पर जदयू के राधा चरण साह और राजद के दीपू सिंह आमने-सामने हैं, जबकि जनसुराज के राजीव रंजन सिंह तीसरे मोर्चे के चेहरे हैं।

महागठबंधन की ‘दोस्ताना फाइट’

पहले फेज में कई सीटों पर महागठबंधन के भीतर भी ‘फ्रेंडली फाइट’ की स्थिति है। कहलगांव सीट पर राजद के रजनीश यादव और कांग्रेस के प्रवीण कुशवाहा आमने-सामने हैं। इसी तरह लालगंज और तारापुर जैसी सीटों पर भी सहयोगी दलों के प्रत्याशी एक-दूसरे को टक्कर दे रहे हैं। इससे गठबंधन के मतों के बिखराव का खतरा बढ़ गया है।

जनसुराज पार्टी: तीसरे मोर्चे की चुनौती

प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी अब तक पहले चरण में 100 से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतार चुकी है। इनमें कुछ उल्लेखनीय नाम हैं। जैसे कुम्हरार (पटना) से केसी सिन्हा, कर्गहर (रोहतास) से भोजपुरी गायक रितेश रंजन पांडेय और भोरे (गोपालगंज) से प्रीति किन्नर। पार्टी कई सीटों पर पारंपरिक मुकाबले को त्रिकोणीय बना रही है, जिससे एनडीए और महागठबंधन दोनों चिंतित हैं।

जिलों में गरम चुनावी हवा

पहले चरण में उत्तर बिहार और कोसी-मिथिला क्षेत्र केंद्र में हैं। पश्चिमी व पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, दरभंगा, वैशाली, सिवान, भोजपुर और पटना जैसे जिलों में टक्कर कड़ी है। इन क्षेत्रों में एनडीए की पुरानी पकड़ के बावजूद विपक्ष भी बेरोजगारी, प्रवासन और महंगाई के मुद्दों पर आक्रामक है।​