Chirag Paswan Namaz Meat Ban: केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने नमाज और नवरात्रि में मांस की दुकानें बंद करने के मुद्दे पर अपने ही नेताओं को घेरा। उन्होंने कहा कि ये सब बेकार की बातें हैं और इस पर चर्चा करने की जरूरत नहीं है। जानें पूरा बयान।

Chirag Paswan Namaz Meat Ban: केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने हाल ही में एक ऐसा बयान दिया है, जो उनके ही नेताओं के बयानों पर सवाल खड़े कर रहा है। जहां एक ओर बीजेपी और अन्य एनडीए सहयोगी दल नमाज और नवरात्रि में मांस बिक्री जैसे धार्मिक मुद्दों पर बयानबाजी कर रहे हैं, वहीं चिराग पासवान ने खुलकर इन बयानों का विरोध किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह सब फालतू की बातें हैं और इस पर चर्चा की कोई जरूरत नहीं है।

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धार्मिक मुद्दों पर राजनीति क्यों?

चिराग पासवान का यह बयान तब आया जब हाल ही में कुछ बीजेपी नेताओं ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने पर प्रतिबंध लगाने और नवरात्रि के दौरान मांस की दुकानों को बंद करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि दशकों से भारत में सभी धर्मों के लोग मिल-जुलकर रहते आए हैं और अब धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक रंग देना सिर्फ वोट बैंक की राजनीति है।

‘धर्म के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकना बंद करें’

चिराग पासवान ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कुछ लोग सिर्फ अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए समाज में बंटवारा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से सभी धर्मों का सम्मान करने वाला देश रहा है। सभी धर्मों के लोग अपने-अपने धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करते आए हैं। अब अचानक से इस पर सवाल उठाना या इसे मुद्दा बनाना पूरी तरह से गलत है।

‘नमाज कहां पढ़े और मांस की दुकानें कब खुले, ये मुद्दा नहीं’

चिराग पासवान ने कहा कि कौन कहां नमाज पढ़ेगा और नवरात्रि में मांस की दुकानें खुलेंगी या नहीं। ये सब गैर-जरूरी बहसें हैं। चिराग पासवान ने दो टूक कहा कि अगर राजनीतिक लोग धर्म से जुड़ी चीजों में हस्तक्षेप करना बंद कर दें तो देश की 90% समस्याएं खुद-ब-खुद खत्म हो जाएंगी।

क्या चिराग पासवान का बयान NDA में दरार पैदा करेगा?

इस बयान के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या चिराग पासवान का यह रुख NDA के भीतर असहमति को जन्म देगा? क्योंकि बीजेपी और उसके कुछ सहयोगी दल इन मुद्दों को ज़ोर-शोर से उठा रहे हैं। लेकिन चिराग पासवान की स्पष्ट राय है कि धर्म और राजनीति को अलग रखना चाहिए।