चिरैया विधानसभा चुनाव 2025 में भाजपा के लाल बाबू प्रसाद गुप्ता ने 90572 वोट पाकर जीत हासिल की। उन्होंने राजद के लक्ष्मी नारायण प्रसाद यादव को 39360 वोटों से हराया। यह सीट भाजपा और राजद के बीच कड़े मुकाबले के लिए जानी जाती है।

Chiraiya Assembly Election 2025: चिरैया विधानसभा चुनाव 2025 में भारतीय जनता पार्टी के लाल बाबू प्रसाद गुप्ता जीत गए हैं। उन्हें 90572 वोट मिले। उन्होंने 39360 वोटों से राष्ट्रीय जनता दल लक्ष्मी नारायण प्रसाद यादव को हराया। जिन्हें 51212 वोट मिले। चिरैया विधानसभा चुनाव 2025 (Chiraiya Assembly Election 2025) बिहार की सबसे दिलचस्प सीटों में से एक माना जाता है। यह पूर्वी चंपारण जिले का हिस्सा है और यहां हर चुनाव में राजनीतिक समीकरण बदल जाते हैं। कभी भाजपा (BJP) का दबदबा रहता है, तो कभी राजद (RJD) जोरदार टक्कर देता है। 

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2010 विधानसभा चुनाव: भाजपा की धमाकेदार शुरुआत

2010 के चुनाव में चिरैया सीट से भाजपा के अवनीश कुमार सिंह ने बड़ी जीत दर्ज की थी। उन्होंने राजद प्रत्याशी लक्ष्मी नारायण प्रसाद यादव को हराया।

  •  अवनीश कुमार सिंह (BJP): 39,459 वोट
  •  लक्ष्मी नारायण यादव (RJD): 24,631 वोट
  •  जीत का अंतर: 14,828 वोट

खास बात: यह जीत भाजपा के लिए इस सीट पर मजबूत पकड़ बनाने की शुरुआत थी।

2015 विधानसभा चुनाव: कांटे की टक्कर

2015 का चुनाव बेहद करीबी रहा। भाजपा के लाल बाबू प्रसाद गुप्ता और राजद के लक्ष्मी नारायण यादव के बीच कड़ा मुकाबला हुआ।

  •  लाल बाबू प्रसाद गुप्ता (BJP): 62,831 वोट
  •  लक्ष्मी नारायण यादव (RJD): 58,457 वोट
  •  जीत का अंतर: सिर्फ 4,374 वोट

खास बात: यहां से साफ हुआ कि राजद धीरे-धीरे अपना वोट बैंक मजबूत कर रहा है और भाजपा की चुनौती बढ़ रही है।

2020 विधानसभा चुनाव: भाजपा की हैट्रिक

2020 में भाजपा ने एक बार फिर जीत दर्ज की। इस बार लाल बाबू प्रसाद गुप्ता (BJP) ने राजद के अच्छेलाल प्रसाद को हराया।

  •  लाल बाबू प्रसाद गुप्ता (BJP): 62,904 वोट
  •  अच्छेलाल प्रसाद (RJD): 46,030 वोट
  •  जीत का अंतर: 16,874 वोट

खास बात: भाजपा ने लगातार तीसरी बार चिरैया सीट अपने नाम की, लेकिन मुकाबला अब भी कांटे का रहा।

जातीय और सामाजिक समीकरण

  • 1. चिरैया विधानसभा में यादव, भूमिहार, राजपूत और मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
  • 2. यादव और मुस्लिम वोट पारंपरिक तौर पर राजद के साथ जाते हैं।
  • 3. भाजपा को सवर्ण और पिछड़े वर्गों का अच्छा समर्थन मिलता है।
  • 4. यही कारण है कि यहां हर चुनाव कड़ा और रोमांचक हो जाता है।