केसरिया विधानसभा चुनाव 2025 में जेडीयू की शालिनी मिश्रा ने जीत दर्ज की है। उन्हें 78,192 वोट मिले। शालिनी मिश्रा ने 16,340 वोटों के अंतर से विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के वरुण विजय को हराया। वरुण विजय को कुल 61,852 वोट मिले।

Kesaria Assembly Election 2025: केसरिया विधानसभा चुनाव 2025 (Kesaria Assembly Election 2025) बिहार की उन सीटों में गिनी जाती है जहां हर चुनाव में नया मोड़ आता है। केसरिया विधानसभा चुनाव 2025 सीट जनता दल (यूनाइटेड) की शालिनी मिश्रा जीत गई हैं। उन्हें 78192 वोट मिले। उन्होंने 16340 वोटों के अंतर से विकासशील इंसान पार्टी के वरुण विजय को हराया। वरुण विजय को 61852 वोट मिले। पूर्वी चंपारण जिले की यह सीट इतिहास और राजनीति दोनों के लिहाज से बेहद खास है। यहां बौद्ध स्तूप जितना ऊंचा और ऐतिहासिक है, उतनी ही ऊंची-नीची लहरें राजनीति में भी उठती रही हैं। यही वजह है कि हर चुनाव में जनता अपने फैसले से बड़े-बड़े नेताओं के सपने तोड़ देती है और नए समीकरण बना देती है।

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केसरिया का चुनावी इतिहास-सवालों से भरी कहानी

2010: भाजपा ने जमाया कब्जा

2010 में भाजपा के सचिंद्र प्रसाद सिंह ने केसरिया सीट पर बड़ी जीत हासिल की। उन्होंने CPI के राम शरण प्रसाद यादव को 11,683 वोटों के अंतर से हराया। भाजपा को 34,649 वोट मिले जबकि CPI को 22,966 वोट। यह चुनाव साबित करता है कि उस वक्त बीजेपी ने यहां मजबूत पकड़ बनाई थी।

2015: राजद की वापसी कैसे हुई?

2015 का चुनाव पूरी तरह से राजद के पक्ष में गया। डॉ. राजेश कुमार ने भाजपा के राजेंद्र प्रसाद गुप्ता को हराकर शानदार जीत दर्ज की। राजद को 62,902 वोट मिले जबकि भाजपा को 46,955 वोट। यानी अंतर था 15,947 वोटों का। यह जीत महागठबंधन की लहर का नतीजा थी, जिसने पूरे बिहार में भाजपा को चुनौती दी थी।

2020: जदयू ने किया बड़ा उलटफेर

2020 में केसरिया सीट पर मुकाबला बेहद कड़ा रहा। जदयू की शालिनी मिश्रा मैदान में उतरीं और उन्होंने आरजेडी के संतोष कुशवाहा को हराया। शालिनी मिश्रा को 40,219 वोट मिले जबकि संतोष कुशवाहा को 30,992 वोट। जीत का अंतर रहा 10,628 वोट। यह चुनाव दिखाता है कि यहां हर बार जनता नया फैसला करती है।

वोटर डिटेल और समीकरण

  • 1. ग्रामीण वोटर: लगभग 100%
  • 2. मुस्लिम, यादव और दलित वोटर-यहां की राजनीति का संतुलन तय करते हैं।
  • 3. फ्लोटिंग वोटर: हर चुनाव में जीत-हार का अंतर बदलते हैं।
  • 4. यहां की राजनीति का सबसे बड़ा राज यही है कि जनता किसी पार्टी को स्थायी समर्थन नहीं देती।