कुम्हरार विधानसभा सीट 2025 के नतीजों में बीजेपी के संजय कुमार ने शानदार जीत दर्ज की है। उन्हें कुल 1,00,485 वोट मिले। संजय कुमार ने कांग्रेस उम्मीदवार इंद्रदीप कुमार चंद्रवंशी को 47,524 से ज्यादा वोटों से हराया। चंद्रवंशी को 52,961 वोट हासिल हुए।

Kumhrar Assembly Election 2025: कुम्हरार विधानसभा सीट 2025 भारतीय जनता पार्टी के संजय कुमार जीत गए हैं। उन्हें 100485 वोट मिले। संजय कुमार ने 47524 से ज्यादा वोटों से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इंद्रदीप कुमार चंद्रवंशी को हराया। चंद्रवंशी को 52961 वोट मिले।पटना जिले की कुम्हरार विधानसभा सीट (Kumhrar Assembly Seat 137) बिहार की राजनीति में खास महत्व रखती है। यह सीट शहरी क्षेत्र में आती है और यहां कायस्थ समाज का दबदबा है। पिछले तीन चुनावों में बीजेपी ने लगातार जीत दर्ज की है। वर्तमान विधायक अरुण कुमार सिन्हा (BJP) हैं, जिन्होंने 2020 में आरजेडी के धर्मेंद्र कुमार को पराजित कर अपनी हैट्रिक पूरी की।

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कुम्हरार सीट पर क्या है जातीय समीकरण?

कुम्हरार सीट पर कुल चार लाख से अधिक मतदाता हैं, जिनमें से एक लाख से ज्यादा कायस्थ समाज के हैं। इसके अलावा भूमिहार और अतिपिछड़ा वोटर भी महत्वपूर्ण हैं। इस वजह से बीजेपी का यहां स्थायी दबदबा बना हुआ है।

पिछली जीत और हार: आंकड़ों की कहानी

2020 कुम्हरार चुनाव

  •  विजेता: अरुण कुमार सिन्हा (BJP) -81,400 वोट
  •  हारने वाले: धर्मेंद्र कुमार (RJD) -54,937 वोट
  •  जीत का अंतर: 26,463 वोट

नोट: अरुण कुमार सिन्हा ने पोस्ट ग्रेजुएट तक की पढ़ाई की है। उन पर चार आपराधिक मामले चल रहे हैं। उनकी कुल संपत्ती करीब तीन करोड़ रुपए है, लेकिन उन पर किसी प्रकार की कोई देनदारी नहीं है।

2015 कुम्हरार चुनाव

  •  विजेता: अरुण कुमार सिन्हा (BJP) -87,792 वोट
  •  हारने वाले: अकील हैदर (INC)-50,517 वोट
  •  जीत का अंतर: 37,275 वोट

2010 कुम्हरार चुनाव

  •  विजेता: अरुण कुमार सिन्हा (BJP)-83,425 वोट
  •  हारने वाले: मोहम्मद कमाल परवेज (LJP)-15,617 वोट
  •  जीत का अंतर: 67,808 वोट

खास बात: तीनों चुनावों में बीजेपी ने अपने कोर वोटर कायस्थ समाज की वजह से लगातार जीत दर्ज की है।

कुम्हरार विधानसभा का जातीय समीकरण

  • सबसे बड़ी संख्या: कायस्थ समाज (लगभग 1 लाख वोटर)
  • अन्य प्रमुख वोटर: भूमिहार और अतिपिछड़ा
  • कुल मतदाता: 4,00,000+
  • शहरी क्षेत्र होने के कारण बीजेपी का स्थायी दबदबा
  • जातीय समीकरण और शहर की राजनीति ने पिछले तीन चुनावों में नतीजे तय किए। कायस्थ वोटर हर चुनाव में निर्णायक साबित हुए हैं।