नालंदा में एक शख्स 5 दिनों तक साइबर ठगों के जाल में फंसा रहा। 'डिजिटल गिरफ्तारी' के नाम पर 1.60 लाख रुपये की ठगी हुई। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

नालंदा। नालंदा जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, एक शख्स को साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट कर लिया और उससे 1.60 लाख रुपये ठग लिए। 5 दिन तक शख्स ठगों की उंगलियो पर नाचता रहा, खुद को घर में कैद रखा। मामला खुला तो पुलिस भी चकरा गई। पीड़ित विकास कुमार हरनौत रेल कारखाने (हरेका) में एचआर डिपार्टमेंट में सहायक के पद पर तैनात हैं और भोजपुर जिले के जगदीशपुर इलाके के रहने वाले हैं।

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कैसे शुरू हुआ ठगी का खेल?

दरअसल, विकास कुमार के साथ ठगी का यह खेल एक अनजान नंबर से आए व्हाट्सएप कॉल के बाद शुरू हुआ। कॉल करने वाले ने खुद को CBSE और साइबर क्राइम दिल्ली का अधिकारी बताया। ठग ने विकास को बताया कि उसके खिलाफ दिल्ली में एक केस दर्ज है। कहा गया कि उसने गलत तरीके से पैसे जमा किए हैं और उसकी गिरफ्तारी हो सकती है। गिरफ्तारी का डर दिखाकर ठग ने उसे पांच दिन तक घर में रहने के लिए मजबूर कर दिया। विकास को चेतावनी दी गई कि वह किसी से बात न करे और कोई फोन कॉल न उठाए। इस दौरान ठगों ने मानसिक दबाव डालकर विकास को पूरी तरह से कंट्रोल में ले लिया।

पांच लाख की मांग, 1.60 लाख ट्रांसफर कराए गए

ठग ने जब विकास को बताया कि केस रफा-दफा करने और जमानत के लिए 5 लाख रुपये देने होंगे, तो विकास ने असमर्थता जताई। इसके बाद ठगों ने उसे 1.60 लाख रुपये तुरंत ट्रांसफर करने को कहा और बाकी राशि बाद में देने की बात कही। लगातार दबाव डालने के बाद विकास ने 1.60 लाख रुपये ठगों को ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। वह पांच दिन तक पूरी तरह उनके जाल में फंसा रहा। दो दिन तक वह ऑफिस भी नहीं गया, जिससे सहकर्मियों को भी शक होने लगा।

कैसे खुला मामला?

4 फरवरी को विकास ने अपने एक दोस्त से पैसे उधार मांगे और उसे आपबीती सुनाई, तो दोस्त ने उसे बताया कि यह साइबर ठगी का मामला है और ‘डिजिटल अरेस्ट’ का कोई कानूनी आधार नहीं होता। तब विकास को एहसास हुआ कि वह ठगी का शिकार हो चुका है। उसने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस अब साइबर सेल की मदद से इस मामले की जांच कर रही है। ठगों की पहचान के लिए बैंक ट्रांजैक्शन और कॉल डिटेल्स खंगाली जा रही हैं। पुलिस के मुताबिक, इस संबंध में शिकायत मिली है, पूरे मामले की जांच की जा रही है।

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