पटना साहिब विधानसभा चुनाव 2025: इस सीट पर BJP का दबदबा कायम है। 2025 चुनाव में, BJP के नए उम्मीदवार रत्नेश कुमार ने कांग्रेस प्रत्याशी को 38,900 वोटों से हराया। इससे पहले नंदकिशोर यादव यहां से लगातार 7 बार चुनाव जीत चुके थे।

Patna Sahib Assembly Election 2025: पटना साहिब विधानसभा चुनाव 2025 (Patna Sahib Assembly Election 2025) बिहार की सबसे चर्चित सीटों में से एक है। राजधानी पटना जिले की इस सीट पर लंबे समय से भाजपा (BJP) का कब्ज़ा है। खासकर नंदकिशोर यादव यहां सात बार लगातार जीत दर्ज कर चुके हैं। लेकिन 2025 का चुनाव इसलिए दिलचस्प रहा क्योकि बीजेपी ने नंद किशोर यादव का टिकट काट कर रत्नेश कुमार को मैदान में उतारा था। रत्नेश कुमार ने 130366 वोट प्राप्त करते हुए कांग्रेस प्रत्याशी शंशांत शेखर को 38900 वोटो से शिकस्त दी। कांग्रेस प्रत्याशी को 91466 को वोट मिले। जनसुराज पार्टी के विनीता मिश्रा को 5263 वोट मिले।

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2010 का चुनाव: भाजपा की बड़ी जीत

2010 में नंदकिशोर यादव (BJP) ने परवेज अहमद (INC) को हराया।

  •  नंदकिशोर यादव (BJP)- 91,419 वोट
  •  परवेज अहमद (INC)- 26,082 वोट
  •  जीत का अंतर: 65,337 वोट

2015 का चुनाव: कांटे की टक्कर में BJP आगे

2015 में नंदकिशोर यादव (BJP) और संतोष मेहता (RJD) के बीच बेहद कड़ा मुकाबला हुआ।

  •  नंदकिशोर यादव (BJP)- 88,108 वोट
  •  संतोष मेहता (RJD)-85,316 वोट
  •  जीत का अंतर: 2,792 वोट

2020 का चुनाव: कांग्रेस को मिली करारी हार

2020 में फिर से नंदकिशोर यादव (BJP) ने बाज़ी मारी। इस बार उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी प्रवीन सिंह (INC) को हराया।

  •  नंदकिशोर यादव (BJP)- 97,692 वोट
  •  प्रवीन सिंह (INC)- 79,392 वोट
  •  जीत का अंतर: 18,300 वोट

पटना साहिब का जातीय समीकरण

  • 1. वैश्य समाज: लगभग 80,000 वोटर (सबसे निर्णायक भूमिका)
  • 2. कोइरी, कुर्मी और मुस्लिम मतदाता: बड़ी संख्या में
  • 3. यादव मतदाता: सीट का गेमचेंजर

खास बात: जातीय समीकरण भाजपा के पक्ष में जाता रहा है, लेकिन 2025 में विपक्ष इस गणित को तोड़ने की रणनीति बना रहा है।

पटना साहिब का चुनावी इतिहास

  • 1. 1995 से लगातार नंदकिशोर यादव का दबदबा
  • 2. अब तक 15 चुनाव, जिसमें 6 बार BJP, 5 बार कांग्रेस, 2 बार जनसंघ और 1-1 बार जनता दल व जनता पार्टी को जीत
  • 3. 2008 के परिसीमन के बाद सीट का नाम पटना साहिब पड़ा, उससे पहले यह पटना पूर्वी के नाम से जानी जाती थी।