पूर्व केंद्रीय मंत्री RCP सिंह की बेटी और वकील लता सिंह ने राजनीति में प्रवेश किया है। वे प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी से CM नीतीश कुमार के गढ़ नालंदा की अस्थावां सीट से चुनाव लड़ेंगी।

पटनाः बिहार विधानसभा सभा चुनाव 2025 के लिए जनसुराज के उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी होने के बाद राज्य की सियासी गलियारों में इन दिनों एक नया नाम लता सिंह सुर्खियों में है। जी हां, ये वही लता सिंह हैं जो कभी सुप्रीम कोर्ट की गलियों में कानून की लड़ाई लड़ती थीं, अब नालंदा के अस्थावां विधानसभा सीट से जनता का दिल जीतने और चुनावी लड़ाई लड़ने उतर रही हैं। लता सिंह पेशे से वकील हैं, लेकिन इस बार उनकी दलीलें कोर्ट में नहीं, बल्कि बिहार की जनता के सामने होंगी।

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राजनीति में नई लेकिन बैकग्राउंड बेहद मजबूत

लता सिंह कोई साधारण उम्मीदवार नहीं हैं। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री और जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रामचंद्र प्रसाद सिंह (RCP सिंह) की बेटी हैं। वही आरसीपी सिंह जो कभी नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते थे। राजनीति उनके घर की दीवारों से टकरा कर गूंजती रही है, इसलिए यह कहा जा सकता है कि लता ने बचपन से राजनीति को सिर्फ देखा नहीं, जिया है।

दिल्ली के DPS आरके पुरम से स्कूली शिक्षा लेने के बाद उन्होंने प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) से ग्रेजुएशन और फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में वकालत शुरू की और कई अहम मामलों में पैरवी की।

जनसुराज ने अस्थावां सीट से बनाया उम्मीदवार

प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज ने जब 51 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की, तो जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, उनमें से एक नाम है लता सिंह का। लता को नालंदा जिले की अस्थावां विधानसभा सीट से टिकट दिया गया है। वही इलाका जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह जिला और गढ़ माना जाता है। दिलचस्प यह है कि इसी सीट से नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के भी चुनाव लड़ने की चर्चा है। अगर ऐसा हुआ, तो यह मुकाबला पुराने सहयोगी बनाम वर्तमान सत्ता के बीच की सीधी भिड़ंत बन जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट से राजनीति की अदालत तक

लता सिंह का पेशेवर सफर बेहद प्रेरक रहा है। वह सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करती हैं और कानून की बारीकियों को समझती हैं। शुरुआती दिनों में उन्होंने पटना हाई कोर्ट में तत्कालीन एडवोकेट जनरल ललित किशोर के अधीन वकालत की ट्रेनिंग ली। उनकी बड़ी बहन लिपि सिंह, बिहार कैडर की आईपीएस अधिकारी हैं। यानी यह परिवार पहले से ही प्रशासन और शासन दोनों को बहुत करीब से जानता है। लता सिंह ने खुद एक इंटरव्यू में कहा था, “मैंने राजनीति अपने पिता से सीखी है, लेकिन राजनीति को नए नजरिए से जीना चाहती हूं। अब वक्त है बदलाव का।”

परिवारवाद पर उठे सवाल और लता का जवाब

जनसुराज हमेशा से “परिवारवाद खत्म करने” की बात करता रहा है। ऐसे में आरसीपी सिंह की बेटी को टिकट देना प्रशांत किशोर के लिए एक राजनीतिक विरोधाभास (Political Irony) बन गया है। लेकिन जब लता साइ से इस विषय पर सवाल किया गया था तो लता सिंह ने बेबाकी से जवाब दिया, “राजनीति में आने के लिए पात्रता चाहिए, वंश नहीं। अगर आपके पास योग्यता और दृष्टिकोण है, तो कोई रोक नहीं सकता। परिवारवाद तब होता है जब आप अयोग्य होकर सिर्फ नाम के बल पर राजनीति में आएं।”

पिता की विरासत और अपनी पहचान

यह बात भी कम दिलचस्प नहीं कि RCP सिंह और नीतीश कुमार के बीच कभी राजनीतिक रिश्ते बहुत गहरे थे और आज RCP की बेटी जनसुराज से टिकट लेकर उसी नालंदा में चुनाव लड़ रही हैं जहाँ नीतीश की सियासी पकड़ सबसे मजबूत है। राजनीति में इसे साइलेंट रिवेंज भी कहा जा रहा है। एक पिता की राजनीतिक दूरी को अब बेटी अपने तरीके से नया मोड़ दे रही है।