बिहार के सारण जिले में मौजूद एक अवैध मदरसे में आतंकवाद के गुर सिखाए जा रहे थे, जहां बम तैयार किया जा रहा था। उसी दौरान हुए ब्लास्ट में मौलाना इमामुद्दीन की मौत हो गई और 15 वर्षीय छात्र नूर आलम गंभीर रूप से घायल हो गया।

बिहार न्यूज। बिहार के सारण जिले में मौजूद एक अवैध मदरसे में आतंकवाद के गुर सिखाए जा रहे थे, जहां बम तैयार किया जा रहा था। उसी दौरान हुए ब्लास्ट में मौलाना इमामुद्दीन की मौत हो गई और 15 वर्षीय छात्र नूर आलम गंभीर रूप से घायल हो गया। ये घटना बीते बुधवार 14 मई की बताई जा रही है। इस मामले पर NCPCR के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो के नेतृत्व में गहन जांच की जा रही है। TOI की रिपोर्ट के मुताबिक बम ब्लास्ट से जुड़े घटना का पर्दाफाश तब हुआ, जब मुजफ्फरपुर के रहने वाले नूर आलम को मदरसे के पास एक गेंद जैसी चीज मिली। मौलाना ने अनजान दिखने वाली चीज को तुरंत ठिकाने लगाने की कोशिश की और तभी ब्लास्ट हो गया। इस हादसे में छात्र और मौलाना घायल हो गए। पीड़ित मौलाना इमामुद्दीन का पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गया और छात्र आलम का पटना के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।

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बिहार में हादसे पर NCPCR के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि बम बनाने वाले के मदरसे की जांच के लिए बिहार का दौरा किया। बिहार के सारण (छपरा) के मोतीराजपुर गांव में अवैध रूप से चल रहे मदरसा दारुल उलूम बरकातिया रिजविया गुलशन-ए-बगदाद में बम बनाते समय विस्फोट हो गया। कानूनगो ने स्थिति की गंभीरता पर प्रकाश डाला और कहा कि मदरसे में मौजूद 14 बच्चे गायब हो गए हैं। जांच का फोकस इस बात पर है कि क्या मदरसा बम बनाने की गतिविधियों में शामिल था या बच्चों को ऐसी खतरनाक गतिविधियों का निर्देश दिया जा रहा था।

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