बिलासपुर में चोरी की नीयत से दुकान में घुसे युवक की करंट से मौत…पर हैरानी ये कि केस दर्ज हुआ दुकानदार पर! क्या सुरक्षा के लिए उठाया कदम बन गया अपराध? पुलिस जांच में नए राज़ खुलेंगे या कहानी में छिपा है कोई और मोड़?

Bilaspur Shop Electrocution Death: बिलासपुर के तखतपुर क्षेत्र में एक अजीब और विवादित मामला सामने आया है। यहाँ एक युवक चोरी की नीयत से दुकान में घुसा और करंट लगने से उसकी मौत हो गई। घटना ने न केवल इलाके में सनसनी मचा दी है बल्कि पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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चोरी की नीयत या नियति का खेल?

जरेली मेनरोड स्थित शिवा ट्रेडर्स के मालिक भागीरथी जायसवाल की दुकान में 16 अगस्त की रात को सामान्य बंद की गई। अगले दिन सुबह जब दुकानदार दुकान की सफाई कर रहे थे, तो उन्होंने सीढ़ी के पास मृत अवस्था में एक युवक देखा। मृतक की पहचान अर्जुन पात्रे, नगोई निवासी, 30 वर्ष के रूप में हुई। युवक की मौत के बाद स्वजनों ने हत्या का आरोप लगाया। पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विद्युत विभाग की जांच के आधार पर पाया कि युवक की मृत्यु बिजली के करंट से हुई थी।

क्या सुरक्षा का कदम ही बन गया दुकानदार के लिए अपराध?

दुकानदार भागीरथी जायसवाल ने बताया कि चोरी रोकने के लिए उन्होंने खाली स्थान पर करंट का तार लगा रखा था। उनका कहना है कि अगर कोई चोर रात में चोरी के इरादे से दुकान में घुसेगा, तो उसे चोट लगेगी या बाहर गिरना पड़ेगा। इसी व्यवस्था के चलते मृतक युवक करंट की चपेट में आ गया। लेकिन, इस घटना के बाद पुलिस ने धारा 106(1) के तहत दुकानदार के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। अब सवाल उठता है – क्या चोरी रोकने के लिए उठाया गया कदम अपराध बन गया?

चोर के घर वालों ने लगाया हत्या का आरोप

घटना की जानकारी मिलते ही मृतक के परिवार वाले मौके पर पहुंचे और उन्होंने आरोप लगाया कि यह हत्या है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विद्युत विभाग के प्रमाण पत्र ने यह स्पष्ट किया कि मृत्यु अचानक करंट लगने से हुई।

क्या बिलासपुर की ये घटना सुरक्षा बनाम कानून की लड़ाई है?

इस मामले ने बिलासपुर में सुरक्षा और कानून के बीच की सीमा पर बहस छेड़ दी है। दुकानदार ने चोरी रोकने के लिए कदम उठाए, लेकिन कानून ने उन्हें आरोपी बना दिया। अब यह मामला पुलिस जांच के दायरे में है और न्यायपालिका तय करेगी कि क्या यह कदम उचित था या इसके लिए दुकानदार जिम्मेदार हैं।