छत्तीसगढ़ में उद्योगों को 31 जुलाई तक वृक्षारोपण लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए गए। नवा रायपुर को पीपल सिटी बनाने और 30 लाख पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया।

रायपुर। मानसून-2026 के दौरान राज्य में औद्योगिक इकाइयों द्वारा किए जा रहे वृक्षारोपण अभियान की प्रगति की समीक्षा के लिए रायपुर स्थित बेबीलॉन कैपिटल में आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश की बड़ी और मध्यम औद्योगिक इकाइयों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ आवास एवं पर्यावरण विभाग तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों ने भाग लिया।

औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलेंगे: ओ.पी. चौधरी

बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में तेजी से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल माहौल बनाया जा रहा है, लेकिन पर्यावरणीय मानकों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उद्योगों का विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों को समान प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

वृक्षारोपण नहीं, पौधों का संरक्षण सबसे बड़ी प्राथमिकता

मंत्री चौधरी ने कहा कि वृक्षारोपण अभियान केवल निर्धारित संख्या पूरी करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि लगाए गए पौधे लंबे समय तक जीवित रहें। उन्होंने उद्योगों से सही मौसम में, उपयुक्त स्थान पर और स्वस्थ पौधों का रोपण करने के साथ उनकी नियमित सिंचाई और देखभाल सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने पीपल, नीम, शिरीष, आम और कटहल जैसी स्थानीय एवं लंबे समय तक जीवित रहने वाली प्रजातियों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में मियावाकी पद्धति जैसी आधुनिक तकनीकों का उल्लेख किया है। यदि उद्योग इन तकनीकों को अपनाते हैं तो प्रदेश में हरित क्षेत्र तेजी से बढ़ाया जा सकता है।

31 जुलाई तक वृक्षारोपण लक्ष्य पूरा करें, 15 अगस्त तक गुणवत्तापूर्ण पौधरोपण सुनिश्चित करें

मंत्री ने सभी औद्योगिक इकाइयों को निर्देश दिए कि वे अपने परिसर और आसपास अधिक से अधिक हरित क्षेत्र विकसित करें। उन्होंने कहा कि 31 जुलाई तक वृक्षारोपण का निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जाए, जबकि 15 अगस्त तक गुणवत्ता के साथ पौधरोपण सुनिश्चित किया जाए। पूरे अभियान की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी और पोर्टल पर समय पर जानकारी दर्ज करना सभी उद्योगों के लिए अनिवार्य रहेगा।

CSR के माध्यम से भी चलाएं व्यापक वृक्षारोपण अभियान

मंत्री चौधरी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल कानूनी जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के प्रति नैतिक दायित्व भी है। उन्होंने उद्योगों से अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के माध्यम से बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाने और आम लोगों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

नवा रायपुर बनेगा 'पीपल सिटी', पांच साल में एक लाख से ज्यादा पीपल के पौधे लगेंगे

मंत्री ने बताया कि नवा रायपुर को "पीपल सिटी" के रूप में विकसित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पहले से लगाए जा चुके करीब 70 हजार पौधों के अलावा अगले पांच वर्षों में एक लाख से अधिक पीपल के पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया है।

सेंध लेक का होगा विस्तार, मियावाकी पद्धति से विकसित होगा बर्ड आइलैंड

बैठक में बताया गया कि नवा रायपुर की प्रसिद्ध सेंध (Sendh) लेक के गहरीकरण और सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू हो चुका है। इस परियोजना के पूरा होने पर झील में लगभग 12 लाख घन मीटर अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता विकसित होगी और उसका क्षेत्रफल भी बढ़ेगा। झील के बीच स्थित लगभग तीन एकड़ के द्वीप पर मियावाकी पद्धति से करीब 25 हजार पौधे लगाए गए हैं, जहां प्रवासी पक्षियों के लिए प्राकृतिक बर्ड आइलैंड (ईको हब) विकसित किया जा रहा है।

इस वर्ष 22 लाख पौधे लगाए जा चुके, लक्ष्य 30 लाख से अधिक पहुंचने की उम्मीद

आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अध्यक्ष अंकित आनंद ने बताया कि पिछले एक वर्ष में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कई सुधार किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष अब तक करीब 22 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 90 प्रतिशत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों को ही अंतिम माना जाएगा। इस वर्ष 25 लाख पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है, जिसे उद्योगों के सहयोग से 30 लाख से अधिक तक पहुंचाया जा सकता है।

320 से अधिक उद्योगों की ऑनलाइन निगरानी, प्रदूषण नियंत्रण पर विशेष जोर

अंकित आनंद ने बताया कि प्रदेश के 320 से अधिक उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों को नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि मंडल का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि उद्योगों को पर्यावरणीय मानकों का पालन कराने और प्रदूषण कम करने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने पुनर्चक्रित (रिसाइकिल) जल के अधिकतम उपयोग और देशी प्रजातियों के पौधे लगाने पर विशेष जोर दिया।

प्रत्येक हेक्टेयर में 2,500 पौधे लगाने और 33% हरित क्षेत्र विकसित करने के निर्देश

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव राजू अगसिमनी ने उद्योगों को निर्देश दिए कि प्रत्येक हेक्टेयर भूमि पर कम से कम 2,500 पौधे लगाए जाएं और थ्री-लेयर प्लांटेशन के जरिए सघन ग्रीन बेल्ट विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि सभी औद्योगिक इकाइयों को अपने परिसर के कम से कम 33 प्रतिशत हिस्से में हरित क्षेत्र विकसित करना होगा। केवल स्वीकृत पौध प्रजातियों का उपयोग किया जाए और सिंचाई के लिए पुनर्चक्रित जल का इस्तेमाल किया जाए।

उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (एनालाइजर) को 24 घंटे चालू रखा जाए तथा हर तीन महीने में उसका नियमित कैलिब्रेशन कराया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी वृक्षारोपण अभियान की वास्तविक सफलता लगाए गए पौधों की संख्या नहीं, बल्कि उनके सुरक्षित संरक्षण और जीवित रहने में है।

बैठक में राज्य की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट, डायरेक्टर स्तर के प्रतिनिधियों के साथ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय एवं विभागीय अधिकारी भी मौजूद रहे।