छत्तीसगढ़ सरकार रायपुर में 14 रियासतों के इतिहास हेतु 'रियासत वीथिका' बना रही है। इसमें ऐतिहासिक धरोहरें प्रदर्शित होंगी। 27 अक्टूबर 2026 को राज परिवारों से सुझाव मांगे गए। इस पहल से राज्य में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

छत्तीसगढ़ की पुरानी रियासतों का इतिहास अब लोगों को एक ही जगह देखने को मिल सकता है। राज्य सरकार रायपुर में ‘रियासत वीथिका’ बनाने की योजना पर काम कर रही है। इसमें 14 पूर्ववर्ती रियासतों की ऐतिहासिक धरोहरों, राजसी परंपराओं और दुर्लभ चीजों को सहेजकर रखा जाएगा। इससे नई पीढ़ी को प्रदेश के इतिहास को करीब से जानने का मौका मिलेगा।

 क्या है रियासत वीथिका और इसमें क्या दिखेगा? 

  • प्रस्तावित रियासत वीथिका में छत्तीसगढ़ की पुरानी रियासतों से जुड़ी खास चीजों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें राजघरानों के राजचिह्न, पारंपरिक कपड़े, पुराने हथियार, प्राचीन सिक्के, मुहरें और ऐतिहासिक दस्तावेज शामिल हो सकते हैं।
  • इसके साथ ही अलग-अलग राजघरानों के त्योहारों, रीति-रिवाजों और दरबार की परंपराओं की जानकारी भी लोगों को दी जाएगी। अभी इनमें से कई धरोहरें राजमहलों, निजी संग्रहों, स्थानीय संग्रहालयों और अभिलेखागारों में रखी हुई हैं। सरकार की योजना इन्हें एक मंच पर लाकर छत्तीसगढ़ के इतिहास की झलक दिखाने की है।

 राज परिवारों से लिए जा रहे सुझाव

इस योजना को लेकर 27 अक्टूबर 2026 को रायपुर के उद्योग भवन स्थित पर्यटन मंडल के सभाकक्ष में बैठक हुई। इसमें अलग-अलग रियासतों के वंशजों और प्रतिनिधियों को प्रेजेंटेशन के जरिए योजना की जानकारी दी गई। उनसे सुझाव भी मांगे गए, ताकि गैलरी को बेहतर तरीके से तैयार किया जा सके।

पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने बताया कि इस काम में राज परिवारों के सुझाव और सहयोग को महत्व दिया जाएगा। इसके लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने की योजना है, जो रियासतों से जुड़ी ऐतिहासिक सामग्री और जानकारियां जुटाने का काम करेगा।

पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा 

  • छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने कहा कि प्रदेश का इतिहास और संस्कृति काफी समृद्ध है। सरकार ऐतिहासिक महलों को हेरिटेज पर्यटन और होमस्टे के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है।
  • रियासत वीथिका बनने से विद्यार्थियों, शोधार्थियों और पर्यटकों को फायदा मिलने की उम्मीद है। इससे छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक पहचान को बढ़ावा मिलेगा और आने वाली पीढ़ियां अपने अतीत को बेहतर तरीके से समझ सकेंगी।

बैठक में कौन-कौन हुए शामिल?

बैठक में रायगढ़, सरगुजा, सारंगढ़, कवर्धा, छुईखदान, उदयपुर-धरमजयगढ़ और खैरागढ़ के राज परिवारों के प्रतिनिधि शामिल हुए। रायगढ़ राजघराने से राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह सहित कई प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव दिए। संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग और छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे।