दिल्ली के एम्स में 16 और 17 सितंबर को सुपर माइक्रो सर्जरी पर एक खास वर्कशॉप हुई। इसमें लिम्फेडेमा और डायबिटिक फुट अल्सर जैसी बीमारियों के लिए 6 जटिल सर्जरी की गईं। इस दौरान 0.8 मिमी से भी पतली नसों की सर्जरी की नई तकनीकें दिखाई गईं।

दिल्ली के एम्स (AIIMS) में 16 और 17 सितंबर को सुपर माइक्रो सर्जरी पर एक शानदार वर्कशॉप का आयोजन हुआ। इस दौरान 6 जटिल सर्जरी की गईं और इस फील्ड में इस्तेमाल होने वाली नई और एडवांस तकनीकों का डेमो भी दिया गया।

सुपर माइक्रो सर्जरी क्या है?

सुपर माइक्रो सर्जरी असल में माइक्रो सर्जरी का ही एक बहुत एडवांस रूप है। इसमें 0.8 मिलीमीटर से भी छोटी खून की नसों (यहां तक कि 0.3 से 0.5 मिमी जितनी बारीक) पर काम किया जाता है। इन ऑपरेशनों में बेहद हाई-टेक सर्जिकल माइक्रोस्कोप और बारीक उपकरणों का इस्तेमाल होता है। इसमें इस्तेमाल होने वाले टांके इंसान के बाल से भी तीन से पांच गुना ज्यादा पतले होते हैं। आम माइक्रोस्कोप से जिन नसों को रिपेयर करना नामुमकिन होता है, उन्हें इन अल्ट्रा-पावरफुल माइक्रोस्कोप के जरिए आसानी से ठीक किया जा सकता है।

वर्कशॉप की डिटेल्स और खास एक्सपर्ट्स

इस वर्कशॉप में कुल 6 सर्जरी की गईं। इनमें फाइलेरिया और ब्रेस्ट कैंसर के बाद हाथ में होने वाली सूजन (लिम्फेडेमा) के लिए लिम्फैटिक सुपर माइक्रो सर्जरी शामिल थी। इसके अलावा, लंबे समय से न भर रहे डायबिटिक फुट अल्सर को ठीक करने के लिए अल्ट्रा-थिन स्किन फ्लैप वाली सुपर माइक्रो सर्जिकल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी भी की गई।

एम्स नई दिल्ली के प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने इस वर्कशॉप को आयोजित किया था। इसमें दक्षिण कोरिया के प्रोफेसर जून पियो (जे.पी.) होंग मुख्य रिसोर्स पर्सन थे। वे सुपर माइक्रो सर्जरी और लिम्फैटिक रिकंस्ट्रक्शन के मामले में दुनिया भर में जाने जाते हैं। उनके अलावा कोयंबटूर के गंगा अस्पताल के डॉ. हरि वेंकटरमणी और कासरगोड के एस्टर अस्पताल की डॉ. समरीन जाफर भी बतौर एक्सपर्ट शामिल हुईं। एम्स की तरफ से विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. मनीष सिंघल, डॉ. शशांक चौहान, डॉ. शिवांगी साहा और डॉ. नंदिनी सिंह तंवर ने भी इसमें हिस्सा लिया।

एम्स में सर्जरी की नई तकनीकें

इस वर्कशॉप में इंडोसायनिन ग्रीन (ICG) इन्फ्रारेड मैपिंग और हाई-फ्रीक्वेंसी अल्ट्रासाउंड मैपिंग जैसी नई तकनीकों का डेमो भी दिया गया।

आपको बता दें कि दिल्ली एम्स में हर साल 300 से ज्यादा माइक्रो सर्जरी होती हैं। अब सुपर माइक्रो सर्जरी, ICG मैपिंग और हाई-फ्रीक्वेंसी अल्ट्रासाउंड मैपिंग जैसी तकनीकों के जुड़ने से ब्रेस्ट कैंसर, लिम्फेडेमा और डायबिटिक फुट अल्सर जैसी बीमारियों के इलाज में काफी मदद मिलेगी।

आने वाले समय में इन तकनीकों से डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) और माइग्रेन की सर्जरी के लिए भी नए रास्ते खुल सकते हैं।

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