Mysterious Electric Trap In Delhi: बेगमपुर में बिजली से भरी लोहे की ग्रिल ने ली दो जिंदगियां! 26 वर्षीय विवेक और बहन अंजू की दर्दनाक मौत, पिता ICU में। हादसे के पीछे छिपी लापरवाही या कोई साजिश? जांच में चौंकाने वाले खुलासे संभव!

Delhi Electric Shock Accident: Vivek-Anju Death, Father Critical in Electric Shock, Electric Safety Violation in Delhi-ये शब्द अब दिल्ली की एक दर्दनाक घटना से जुड़ गए हैं। राजधानी के बेगमपुर इलाके में 26 वर्षीय विवेक और उसकी बहन अंजू की करंट लगने से मौत हो गई, जबकि उनके पिता अब भी अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। हादसा एक ऐसी ग्रिल से हुआ जिसमें असुरक्षित तरीके से बिजली के तार गुजर रहे थे। लेकिन सवाल ये है कि ये केवल एक दुर्घटना है या फिर सिस्टम की घातक लापरवाही?

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क्या ये सिर्फ हादसा था या लापरवाही की साजिश? 

दिल्ली के बेगमपुर इलाके में बिजली की करंट से हुई इस डबल डेथ ने हर किसी को चौंका दिया है। लोहे की ग्रिल से निकले हाई-वोल्टेज तारों से जुड़ा ये मामला सिर्फ एक तकनीकी खामी का नतीजा है या इसके पीछे कोई बड़ी लापरवाही या साजिश है? स्थानीय लोगों का कहना है कि यह ग्रिल लंबे समय से करंट छोड़ रही थी, मगर कॉलोनी के मेंटेनेंस या बिजली विभाग ने कोई कदम नहीं उठाया।

क्यों नहीं ली गई समय रहते कोई सुरक्षा व्यवस्था? 

दिल्ली जैसे मेट्रो शहर में जहां हर गली में कैमरे, मीटर और इलेक्ट्रिक इंस्पेक्शन सिस्टम होते हैं, वहां एक लोहे की ग्रिल में बिजली के तारों का खुला संपर्क कैसे रह गया? क्या निगम या बिजली विभाग की जांच टीमों ने कभी इस ग्रिल को नहीं देखा? अगर यह लापरवाही है, तो जिम्मेदार कौन?

आखिर क्यों मौत का फंदा बन गई ग्रिल?

जिन हालात में विवेक और अंजू की मौत हुई, वो बेहद दर्दनाक थे। बताया गया कि जैसे ही उन्होंने गेट को छुआ, करंट पूरे शरीर में दौड़ गया। उनके पिता ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन वो खुद बुरी तरह झुलस गए। यह पूरा दृश्य इतना डरावना था कि आसपास के लोग भी बेहोश हो गए।

जांच से क्या निकल सकता है कोई बड़ा खुलासा? 

पुलिस और बिजली विभाग की टीमें मौके पर जांच में जुट गई हैं। करंट कहां से आया, किसने ग्रिल में तार डाले, और क्या यह पूरी तरह से एक इलेक्ट्रिकल मर्डर जैसा मामला है-इन सभी पहलुओं की पड़ताल चल रही है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और ग्रिल की वायरिंग की तकनीकी जांच की जा रही है।

निष्कर्ष: