दिल्ली में प्रदूषण पर 10 प्वाइंट एक्शन प्लान तैयार है। वाहन, धूल, कचरा और उद्योगों पर कार्रवाई के साथ CM रेखा गुप्ता ने जनभागीदारी की अपील की।

दिल्ली में सर्दियों से पहले वायु प्रदूषण पर नियंत्रण की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि Delhi Clean Air Action 2026 के तहत प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों को निशाना बनाते हुए 10 फोकस्ड इंटरवेंशन पर काम किया जा रहा है। इनमें वाहन प्रदूषण, सड़क और निर्माण की धूल, कचरा व बायोमास जलाना तथा औद्योगिक उत्सर्जन जैसे मुद्दे शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने साफ हवा को साझा लक्ष्य बताते हुए दिल्लीवासियों से ‘जनभागीदारी’ के जरिए अभियान में सक्रिय रूप से शामिल होने की अपील की है। उनके मुताबिक, प्रदूषण कम करने में हर जिम्मेदार कदम मायने रखता है।

Delhi Clean Air Action 2026: प्रदूषण के हर बड़े स्रोत पर फोकस

दिल्ली सरकार की 2026 की एयर पॉल्यूशन मिटिगेशन रणनीति सिर्फ सर्दियों के दौरान तात्कालिक पाबंदियों तक सीमित नहीं है। इसमें वाहन उत्सर्जन, सड़क की धूल, निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाली धूल, कचरा और खुले में जलाने की घटनाएं, औद्योगिक प्रदूषण, ट्रैफिक मैनेजमेंट और सार्वजनिक परिवहन जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

केंद्र और दिल्ली सरकार की 28 सितंबर की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में इन उपायों को समयबद्ध तरीके से लागू करने और अलग-अलग इलाकों की समस्या के हिसाब से कार्रवाई करने पर जोर दिया गया। दिल्ली के 37 प्रदूषण हॉटस्पॉट पर 10 अक्टूबर तक जनभागीदारी कार्यक्रम आयोजित करने की बात भी कही गई है।

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‘No PUCC, No Fuel’ से वाहन प्रदूषण पर शिकंजा

वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए ‘No PUCC, No Fuel’ व्यवस्था को मिशन मोड में लागू करने की तैयारी है। इसके तहत वैध Pollution Under Control Certificate यानी PUCC के बिना वाहनों को ईंधन नहीं देने की व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाएगा।

दिल्ली के करीब 500 ANPR-सक्षम पेट्रोल पंपों पर जागरूकता और प्रवर्तन अभियान चलाने की योजना है। इससे वाहन मालिकों पर अपने वाहनों का प्रदूषण प्रमाणपत्र वैध रखने का दबाव बढ़ेगा। दिल्ली सरकार ने अक्टूबर से PUCC जांच अभियान शुरू करने की भी घोषणा की है। इसके साथ ही बुराड़ी में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन शुरू किया गया है, जिसकी सालाना करीब एक लाख वाहनों की जांच क्षमता बताई गई है।

Construction Dust Control: निर्माण कार्यों पर भी सख्ती

दिल्ली में प्रदूषण का एक बड़ा मुद्दा निर्माण और सड़क की धूल है। नए विंटर एक्शन प्रोटोकॉल में इस क्षेत्र पर विशेष निगरानी की जा रही है। बैठक में तय किया गया है कि 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल पैदा करने वाली डिमोलिशन गतिविधियों और आउटडोर सिविल कंस्ट्रक्शन पर रोक रहेगी। इसके बाद 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू रहेगा।

निर्माण एवं विध्वंस कचरे के प्रबंधन के लिए Malba App पर रजिस्ट्रेशन को बिल्डिंग प्लान की मंजूरी से जोड़ने की दिशा में भी कदम उठाया जा रहा है। निर्माण स्थलों की निगरानी के लिए तकनीक और कैमरों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है।

37 Pollution Hotspots पर अब लोकल एक्शन प्लान

दिल्ली में पहचाने गए 37 प्रदूषण हॉटस्पॉट को लेकर इस बार सामान्य दिशा-निर्देशों के बजाय इलाके के हिसाब से कार्रवाई पर जोर है। इन जगहों पर 10 अक्टूबर तक Jan Bhagidari कार्यक्रम आयोजित करने और स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के कारणों के मुताबिक कार्रवाई तय करने को कहा गया है। इसमें जनप्रतिनिधियों, स्थानीय संगठनों और संबंधित सरकारी एजेंसियों की भागीदारी की योजना है। मकसद यह है कि सिर्फ कागज पर योजना न रहे, बल्कि मौके पर उसकी प्रगति भी देखी जाए।

Winter Pollution Action: BS-VI वाहनों और पार्किंग पर भी फैसले

सर्दियों के दौरान प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई अतिरिक्त उपाय तय किए गए हैं। 1 नवंबर 2026 से दिल्ली में बाहर पंजीकृत और BS-VI से नीचे के वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध की व्यवस्था तय की गई है, हालांकि CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को इससे छूट दी गई है। इसके अलावा पार्किंग शुल्क बढ़ाने, सरकारी कार्यालयों में अलग-अलग समय पर काम शुरू करने और कुछ कार्यालयों में 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था जैसे उपाय भी विंटर प्रोटोकॉल में शामिल हैं।

EV Policy और पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग पर जोर

सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के साथ पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाने की दिशा में भी काम कर रही है। बैठक में EV Policy 2026, पुराने वाहनों को स्क्रैप करने के लिए बढ़े हुए प्रोत्साहन और Parivartan Scheme के तहत मिशन मोड में रजिस्ट्रेशन पर जोर दिया गया। अक्टूबर-नवंबर में जनभागीदारी कैंप लगाकर लोगों को इन योजनाओं से जोड़ने की योजना है।

Industrial Pollution पर AI से निगरानी

औद्योगिक प्रदूषण पर निगरानी बढ़ाने के लिए AI-enabled Command and Control Centre को ऑपरेशनल करने का फैसला लिया गया है। साथ ही मॉनिटरिंग स्टेशनों की संख्या 47 से बढ़ाकर 60 करने और 334 प्रवर्तन टीमों को तैनात करने की योजना है।

इन टीमों का इस्तेमाल नियमों का पालन नहीं करने वाली और प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई में किया जाएगा। साथ ही नागरिक शिकायतों, दैनिक AQI बुलेटिन और NCR स्तर पर समन्वित कार्रवाई को भी मजबूत करने की बात कही गई है।

Delhi Air Pollution 2026 में जनता की भूमिका क्यों अहम?

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का संदेश इस बार केवल सरकारी कार्रवाई तक सीमित नहीं है। Jan Bhagidari को अभियान का अहम हिस्सा बनाया गया है। यानी वाहन की नियमित प्रदूषण जांच कराना, कचरा खुले में न जलाना, निर्माण नियमों का पालन करना और जहां जरूरत हो वहां प्रदूषण से जुड़ी शिकायत दर्ज कराना जैसे छोटे कदम भी इस रणनीति का हिस्सा हैं।

केंद्र और दिल्ली सरकार की हालिया बैठकों में भी यह बात सामने आई है कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए अलग-अलग विभागों के साथ NCR के राज्यों और स्थानीय स्तर पर नागरिकों का समन्वय जरूरी है। दिल्ली की वायु गुणवत्ता हर साल सर्दियों में चुनौती बनती है। ऐसे में Delhi Clean Air Action 2026 का फोकस अब सिर्फ AQI खराब होने के बाद प्रतिबंध लगाने के बजाय पहले से तैयारी, हॉटस्पॉट आधारित कार्रवाई, तकनीकी निगरानी और नागरिक भागीदारी पर है। असली असर इस बात से तय होगा कि घोषित उपाय जमीन पर कितनी तेजी और निरंतरता से लागू होते हैं।