दिल्ली सरकार Ease of Doing Business को मजबूत करने पर जोर दे रही है। CM रेखा गुप्ता ने सरल नियम, तेज मंजूरी, आसान क्रेडिट और MSME-स्टार्टअप सपोर्ट की बात कही।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने Ease of Doing Business को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार कारोबार शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने की प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में काम कर रही है। उनका जोर कम जटिल नियमों, तेज मंजूरियों, आसान क्रेडिट और कारोबारियों, MSME तथा स्टार्टअप के लिए मजबूत सरकारी सहयोग पर है।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें कारोबारियों को अनावश्यक प्रक्रियाओं और जटिलताओं में कम समय लगाना पड़े। उनके मुताबिक कम जटिलता से उद्यम को बढ़ावा मिलेगा, निवेश के अवसर बढ़ेंगे और रोजगार के नए रास्ते बन सकते हैं।
Delhi Ease of Doing Business: सरल नियम और तेज मंजूरी पर फोकस
रेखा गुप्ता के बयान में Ease of Doing Business के चार प्रमुख पहलुओं पर जोर दिखाई देता है—सरल नियम, तेज क्लियरेंस, क्रेडिट तक आसान पहुंच और कारोबारियों के लिए सरकारी सपोर्ट। दिल्ली जैसे बड़े कारोबारी बाजार में अलग-अलग विभागों से मंजूरी और लाइसेंस की प्रक्रिया कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण होती है। इसी को देखते हुए दिल्ली सरकार का Udyog Mitra Portal एकीकृत इलेक्ट्रॉनिक सेवा व्यवस्था के तौर पर काम कर रहा है। आधिकारिक पोर्टल के अनुसार यहां उद्योग से जुड़ी Registration, Clearance, Licence और NOC जैसी सेवाओं को एक जगह उपलब्ध कराने का प्रावधान है। पोर्टल पर 100 से अधिक NOC ऑनबोर्ड किए जाने और समयबद्ध क्लियरेंस की व्यवस्था का भी उल्लेख है। यानी सरकार जिस दिशा की बात कर रही है, उसमें डिजिटल माध्यम से अलग-अलग प्रक्रियाओं को एक जगह लाना भी अहम हिस्सा है।
MSME और छोटे कारोबारियों के लिए Credit Support
मुख्यमंत्री के बयान में क्रेडिट तक आसान पहुंच को भी खास तौर पर शामिल किया गया है। छोटे कारोबारियों और MSME के लिए पूंजी तक पहुंच अक्सर कारोबार शुरू करने, विस्तार करने या रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती है। दिल्ली सरकार के तहत Delhi Credit Guarantee Scheme (DCGS) भी संचालित है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक यह योजना दिल्ली में स्थित Micro and Small Enterprises को संस्थागत ऋण के लिए गारंटी कवरेज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से है। इसमें पात्र इकाइयों के लिए ₹10 करोड़ तक के क्रेडिट पर गारंटी की व्यवस्था बताई गई है और कुछ मामलों में collateral-free credit का प्रावधान भी है। इस तरह Ease of Doing Business का फोकस केवल लाइसेंस और मंजूरी तक सीमित नहीं है। वित्तीय पहुंच को भी कारोबारी माहौल का हिस्सा माना जा रहा है।
Delhi Udyog Mitra Portal से Registration और Clearance की सुविधा
दिल्ली में उद्योग और कारोबार से जुड़ी सरकारी प्रक्रियाओं को डिजिटल करने के लिए Udyog Mitra Portal को एक सिंगल-पॉइंट व्यवस्था के रूप में पेश किया गया है। पोर्टल पर नए निवेशक या बिजनेस के लिए Registration, आवेदन की स्थिति देखने के लिए Ticket Track और शिकायत दर्ज करने के लिए Grievance Redressal जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
पोर्टल का उद्देश्य कारोबार के पूरे lifecycle में प्रक्रियाओं को सरल और समयबद्ध बनाना बताया गया है। ऐसे में अगर मंजूरियों और विभागीय प्रक्रियाओं को वास्तव में ज्यादा streamlined किया जाता है, तो इसका सीधा संबंध कारोबारियों के समय और compliance burden से होगा।
Business Facilitation Council भी कारोबारियों की मंजूरी प्रक्रिया से जुड़ा
दिल्ली सरकार के पास Business Facilitation Council की व्यवस्था भी है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इसका उद्देश्य औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए अलग-अलग विभागों और एजेंसियों से जरूरी मंजूरियां हासिल करने में उद्यमियों की मदद करना है।
इस परिषद में MCD, DDA, Delhi Pollution Control Committee, Labour Department, Excise Department और Trade & Taxes Department समेत विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधित्व का प्रावधान है। सरकार के मुताबिक परिषद के जरिए विभागों के बीच समन्वय और अंतर-विभागीय मुद्दों को सुलझाने पर काम किया जाता है। यह व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कारोबारियों के लिए कई बार समस्या किसी एक विभाग में नहीं, बल्कि अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय में होती है।
Delhi Jan Vishwas और Shops and Establishments Amendment भी एजेंडे में
Ease of Doing Business से जुड़ी दिशा में दिल्ली विधानसभा ने 2026 में कुछ विधायी बदलाव भी किए हैं। विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार Delhi Jan Vishwas (Amendment of Provisions) Bill, 2026 और Delhi Shops and Establishments (Amendment) Bill, 2026 जनवरी में पेश किए गए थे। दोनों विधेयकों को विधानसभा की कार्यवाही में पारित किए जाने का रिकॉर्ड दर्ज है।
इसके अलावा अगस्त 2026 में Delhi (Right of Citizen to Time Bound and Ease of Delivery of Services) Bill, 2026 भी विधानसभा के सरकारी विधेयक रिकॉर्ड में दर्ज है। इन कदमों का व्यापक संदर्भ सरकारी सेवाओं और कारोबारी प्रक्रियाओं को ज्यादा समयबद्ध तथा व्यवस्थित बनाने की दिशा से जुड़ता है।
Property और Registration Services में भी डिजिटल व्यवस्था
दिल्ली में Ease of Doing Business का दायरा केवल उद्योग विभाग तक नहीं है। Urban Development Department के Property Information System पर संपत्ति की जानकारी और encumbrance search जैसी सुविधाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया है। विभाग के अनुसार यह व्यवस्था संपत्ति से जुड़ी जानकारी तक डिजिटल पहुंच देने के उद्देश्य से विकसित की गई है।
वहीं Revenue Department की e-Sub Registrar व्यवस्था में ऑनलाइन appointment management और अलग-अलग Sub-Registrar offices से जुड़ी जानकारी उपलब्ध है। इससे संपत्ति पंजीकरण जैसी प्रक्रियाओं को भी डिजिटल माध्यम से व्यवस्थित करने की कोशिश दिखाई देती है।
निवेश और रोजगार को लेकर सरकार की बड़ी तस्वीर
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने संदेश में Ease of Doing Business को निवेश और रोजगार से सीधे जोड़ा है। उनका कहना है कि कम complexity, ज्यादा enterprise और ज्यादा investment के जरिए रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
हालांकि इन लक्ष्यों का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नियमों को सरल बनाने, मंजूरियों में तेजी लाने और वित्तीय सहायता तक पहुंच को जमीन पर किस तरह लागू किया जाता है। कारोबारियों के लिए सिर्फ नई नीति या पोर्टल पर्याप्त नहीं होता; आवेदन की समयसीमा, विभागीय जवाबदेही, प्रक्रिया की पारदर्शिता और शिकायतों के समाधान की गति भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
फिलहाल दिल्ली सरकार का संदेश स्पष्ट है कि कारोबार, MSME और स्टार्टअप से जुड़ी सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और डिजिटल माध्यम से ज्यादा सुगम करने पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले समय में इन सुधारों का असर कारोबार शुरू करने, विस्तार करने और निवेश से जुड़ी वास्तविक प्रक्रियाओं में कितना दिखाई देता है, यह इसके क्रियान्वयन से तय होगा।


