दिल्ली हाई कोर्ट ने वीवो से जुड़े 20,000 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसे दो चीनी नागरिकों को चीन जाने से रोक दिया है. निचली अदालत ने उन्हें जाने की इजाजत दी थी, लेकिन ED ने इसे चुनौती दी. हाई कोर्ट ने कहा कि भारत और चीन के बीच कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है, इसलिए उनके वापस न लौटने का बड़ा खतरा है.
नई दिल्ली : दिल्ली हाई कोर्ट ने वीवो मोबाइल से जुड़े करीब 20,000 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी दो चीनी नागरिकों को चीन जाने की इजाजत देने वाले निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी है. हाई कोर्ट ने कहा कि इन लोगों के फरार होने का खतरा बहुत ज़्यादा है और भारत-चीन के बीच कोई प्रत्यर्पण संधि (Extradition Treaty) भी नहीं है।
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कौन है वो चीनी नागरिक?
- इनमें से एक चीनी नागरिक का नाम ग्वांगवेन कुआंग उर्फ एंड्रयू है, जो एडमिन मैनेजर के तौर पर काम करता था। उसे अक्टूबर 2023 में गिरफ्तार किया गया था और नवंबर 2024 में जमानत मिली थी।
- दूसरे चीनी नागरिक का नाम वेइगांग वांग है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले में दोनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।
ED की दलीलें सुनने के बाद फैसला
- ED ने निचली अदालत के 17 जून के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें दोनों आरोपियों को चीन जाने की इजाजत दी गई थी. एजेंसी ने हाई कोर्ट से इस आदेश को रद्द करने की मांग की. साथ ही, याचिका पर फैसला आने तक आदेश पर अंतरिम रोक लगाने की भी अपील की.
- जस्टिस तेजस कारिया ने ED की दलीलें सुनने के बाद 17 जून के आदेश पर रोक लगा दी और दोनों चीनी नागरिकों को नोटिस जारी किया. मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को होगी.
- 19 जून को दिए अपने आदेश में जस्टिस कारिया ने कहा, "मामले के सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, निचली अदालत के 17.06.2026 के आदेश के अमल पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई जाती है."
- कोर्ट ने आगे कहा, "इसलिए, इस याचिका पर विचार करना ज़रूरी है. अगर आदेश पर रोक नहीं लगाई गई, तो आरोपी चीन चला जाएगा, जिससे यह याचिका बेमतलब हो जाएगी."
8 जून को कुआंग की विदेश यात्रा की अर्जी खारिज
- ED को अंतरिम राहत देते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि दोनों आरोपी चीन के नागरिक हैं और उन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) और मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत गंभीर आरोप हैं।
- ग्वांगवेन कुआंग के आदेश पर रोक लगाते हुए जस्टिस कारिया ने कहा, "आरोपों की गंभीरता, आरोपी का विदेशी नागरिक होना और भारत-चीन के बीच किसी प्रत्यर्पण संधि का न होना, इन बातों को देखते हुए यह आशंका निराधार नहीं है कि वह भारत वापस नहीं लौटेगा."
- हाई कोर्ट ने यह भी गौर किया कि निचली अदालत ने 8 जून को कुआंग की विदेश यात्रा की अर्जी खारिज कर दी थी. लेकिन इसके बाद, बिना किसी नए ठोस कारण के, दोबारा दी गई अर्जी को मंजूर कर लिया गया।
- कोर्ट ने कहा, "इस कोर्ट को ED की इस दलील में दम लगता है कि अगर इस स्टेज पर आरोपी को भारत छोड़ने की इजाजत दी गई, तो मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों से जुड़ी जांच और कार्यवाही प्रभावित हो सकती है."
- कोर्ट ने यह भी बताया कि आरोपी ने अपनी अर्जी के साथ जो मेडिकल डॉक्यूमेंट्स लगाए थे, उनकी अभी तक जांच नहीं हुई है. कोर्ट ने यह भी पाया कि विवादित आदेश पारित करने से पहले ED को आरोपी के पिता की मेडिकल कंडीशन को वेरिफाई करने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया।
- ED की तरफ से पेश हुए स्पेशल काउंसिल ज़ोहेब होसैन और वकील प्रांजल त्रिपाठी ने दलील दी कि ग्वांगवेन कुआंग उर्फ एंड्रयू ने जानबूझकर अपराध की कमाई से जुड़ी गतिविधियों में मदद की. एजेंसी के मुताबिक, उसकी भूमिका में कंपनियों के असली मालिकों को छिपाना, अपराध की कमाई को ठिकाने लगाने के लिए बनाई गई कंपनियों को चलाना और मनी लॉन्ड्रिंग में मदद करना शामिल था।
- ED ने बताया कि जांच में पता चला है कि वीवो मोबाइल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उसकी स्टेट डिस्ट्रिब्यूटर कंपनियों ने अपराध के जरिए लगभग 2,02,41,17,72,292 रुपये की कमाई की।
- इसके बाद, एजेंसी ने 6 दिसंबर, 2023 को निचली अदालत में PMLA की धाराओं 3, 4 और 70 के तहत शिकायत दर्ज की. 20 दिसंबर, 2023 को निचली अदालत ने शिकायत का संज्ञान लिया और कुआंग को मामले में आरोपी बनाया.
- सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि कुआंग के खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर (LOC) को निचली अदालत ने 29 अप्रैल, 2026 को ही रद्द कर दिया था. ED ने हाई कोर्ट को बताया कि उस आदेश को भी चुनौती दी गई है. वहीं, आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि यह चुनौती मौजूदा याचिका दायर होने के बाद दी गई, इसलिए इसे यात्रा की अनुमति रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
- हाई कोर्ट इस मामले पर अगली सुनवाई 2 जुलाई को करेगा।
