दिल्ली सरकार कांवड़ यात्रा 2026 के लिए शिविरों की आर्थिक सहायता 15 लाख रुपये तक बढ़ाने जा रही है। प्रस्ताव कैबिनेट में मंजूरी के लिए रखा जाएगा।

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने कांवड़ यात्रा 2026 को अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने कांवड़ शिविरों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया है। यह प्रस्ताव मंगलवार को होने वाली दिल्ली कैबिनेट की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि हर साल बढ़ती कांवड़ियों की संख्या, महंगाई और शिविर संचालन पर बढ़ रहे खर्च को देखते हुए आर्थिक सहायता बढ़ाना जरूरी हो गया है।

बड़े कांवड़ शिविरों को मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ

सरकार के प्रस्ताव के अनुसार 20,000 वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र में लगने वाले और 6 से 12 दिनों तक संचालित होने वाले बड़े कांवड़ शिविरों के लिए अनुदान राशि 11 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये करने की तैयारी है। इसी तरह 20,000 वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र में 3 से 5 दिन तक चलने वाले शिविरों को मिलने वाली सहायता 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 9 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है। सरकार ने अन्य श्रेणियों के कांवड़ शिविरों के लिए भी आर्थिक सहायता बढ़ाने की योजना बनाई है।

दिल्ली में तेजी से बढ़ रही कांवड़ शिविरों की संख्या

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि राजधानी में कांवड़ यात्रा का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2024 में जहां 170 कांवड़ शिविर लगाए गए थे, वहीं 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 308 तक पहुंच गई। सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में भी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी, इसलिए व्यवस्थाओं को पहले से मजबूत करना आवश्यक है।

मुफ्त बिजली सुविधा रहेगी जारी

दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि कांवड़ समितियों को पहले की तरह 1,200 यूनिट तक मुफ्त बिजली की सुविधा मिलती रहेगी। बीएसईएस और टीपीडीडीएल को निर्देश दिए गए हैं कि यात्रा शुरू होने से पहले सभी शिविरों में समय पर बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएं और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएं। हालांकि 1,200 यूनिट से अधिक बिजली की खपत होने पर अतिरिक्त खर्च संबंधित कांवड़ समिति को स्वयं वहन करना होगा।

ग्रांट वितरण प्रक्रिया होगी आसान

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि अनुदान वितरण की प्रक्रिया को भी सरल बनाया जा रहा है ताकि समितियों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सके। अब एडवांस और अंतिम दोनों किस्तें सीधे संबंधित जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) कार्यालय से जारी की जाएंगी। इसके लिए हर मामले में राजस्व मुख्यालय के माध्यम से वित्त विभाग से अलग मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

सिंगल विंडो सिस्टम से मिलेगी राहत

सरकार ने इस वर्ष भी सिंगल विंडो सिस्टम और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की मौजूदा व्यवस्था को जारी रखने का फैसला किया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कांवड़ समितियों को अलग-अलग विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें और सभी जरूरी अनुमतियां समय पर मिल सकें।

सफाई, स्वास्थ्य और पानी की विशेष व्यवस्था

कांवड़ यात्रा के दौरान दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को साफ-सफाई, कूड़ा उठाने, फॉगिंग और स्वच्छता व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है। स्वास्थ्य विभाग और सीएटीएस एम्बुलेंस सेवा चौबीसों घंटे डॉक्टर, एम्बुलेंस, प्राथमिक उपचार केंद्र और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे।

इसके अलावा डीयूएसआईबी मोबाइल टॉयलेट यूनिट्स स्थापित करेगा और उनकी नियमित सफाई कराएगा। दिल्ली जल बोर्ड शिविरों में स्वच्छ पेयजल की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित करेगा और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त पानी के टैंकर भी उपलब्ध कराएगा।

सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन पर रहेगा विशेष फोकस

दिल्ली पुलिस और ट्रैफिक पुलिस को सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जरूरत पड़ने पर रूट डायवर्जन लागू किया जाएगा और संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

रजिस्ट्रेशन और दस्तावेज सत्यापन पर निगरानी

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जिला मजिस्ट्रेट यह सुनिश्चित करेंगे कि पात्र कांवड़ समितियों का समय पर पंजीकरण हो, उनके बैंक खाते संचालित हों और दस्तावेजों का सत्यापन समय पर पूरा किया जाए। इसके साथ ही ऑडिट से संबंधित सभी प्रक्रियाएं भी निर्धारित समयसीमा में पूरी की जाएंगी।

जियो-टैग्ड निरीक्षण से बढ़ेगी पारदर्शिता

पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए एसडीएम और तहसीलदार स्तर के अधिकारी शिविरों का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण की पुष्टि जियो-टैग्ड तस्वीरों और सत्यापन रिपोर्ट के माध्यम से की जाएगी, जिससे अनुदान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बन सके।

डीबीटी के जरिए दो किस्तों में मिलेगा अनुदान

सरकार ने तय किया है कि अनुदान राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से दो चरणों में जारी की जाएगी। पहली 50 प्रतिशत राशि अग्रिम सहायता के रूप में दी जाएगी, जबकि शेष 50 प्रतिशत राशि यात्रा पूरी होने के बाद जारी की जाएगी।

नई समितियों को नहीं मिलेगी मंजूरी

मुख्यमंत्री ने बताया कि समिति ने यह सिफारिश भी की है कि वर्ष 2025 में जिन कांवड़ समितियों और स्थानों को मंजूरी दी गई थी, वही सूची वर्ष 2026 के लिए भी लागू रहे। इस वर्ष किसी नई समिति या नए स्थान को मंजूरी देने का प्रस्ताव नहीं है।

श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देना सरकार का लक्ष्य

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता बढ़ाना नहीं है, बल्कि कांवड़ यात्रा के हर पहलू को बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि लाखों श्रद्धालु अपनी धार्मिक यात्रा को सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधाजनक माहौल में पूरा कर सकें।