दिल्ली के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में 3 अगस्त तक 37.99 लाख पौधे लगाए गए। 70 लाख लक्ष्य का 54% पूरा हो चुका है, रिज क्षेत्र पुनर्जीवन पर फोकस है।
दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देने के उद्देश्य से चलाया जा रहा ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान लगातार गति पकड़ रहा है। राजधानी में अब तक 37.99 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं, जो निर्धारित 70 लाख पौधरोपण लक्ष्य का 54 प्रतिशत से अधिक है। 3 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार यह अभियान न केवल सरकारी विभागों बल्कि आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और स्वयंसेवी समूहों की सक्रिय भागीदारी के कारण उल्लेखनीय सफलता हासिल कर रहा है।
दिल्ली सरकार का मानना है कि पौधरोपण केवल संख्या बढ़ाने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य शहर की हरित संपदा को मजबूत करना और भविष्य की पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण तैयार करना है। इसी कारण अभियान के तहत लगाए गए पौधों की निगरानी और संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को मिल रहा जनभागीदारी का मजबूत समर्थन
अभियान की सबसे बड़ी विशेषता लोगों की व्यापक भागीदारी रही है। बड़ी संख्या में नागरिक अपनी माताओं के सम्मान में पौधे लगा रहे हैं और उन्हें संरक्षित रखने का संकल्प भी ले रहे हैं। सरकारी विभागों, स्कूलों, कॉलेजों, आरडब्ल्यूए, धार्मिक संस्थाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा सामूहिक पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इससे अभियान केवल सरकारी योजना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक जुड़ाव के कारण लोगों के बीच एक जन अभियान के रूप में विकसित हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी पौधे के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनता है तो उसके संरक्षण की संभावना भी बढ़ जाती है। यही वजह है कि अभियान को लंबे समय तक सफल बनाने में जनता की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दिल्ली रिज क्षेत्र के पुनर्जीवन पर विशेष फोकस
इस वर्ष पौधरोपण अभियान का एक बड़ा उद्देश्य दिल्ली के रिज (Ridge) क्षेत्रों का पुनर्जीवन भी है। रिज क्षेत्र को दिल्ली के ‘ग्रीन लंग्स’ कहा जाता है क्योंकि यह राजधानी के पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। विभिन्न रिज क्षेत्रों में स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुरूप पौधों का चयन किया जा रहा है ताकि उनकी वृद्धि बेहतर हो सके। विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर ऐसे पौधों को प्राथमिकता दी जा रही है जो लंबे समय तक टिकाऊ हों और जैव विविधता को मजबूत करें। पर्यावरणविदों का मानना है कि रिज क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पौधरोपण से वायु गुणवत्ता सुधारने, तापमान नियंत्रण और हरित आवरण बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पौधों की सर्वाइवल रेट बढ़ाने के लिए सख्त मॉनिटरिंग व्यवस्था
दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियां केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं हैं। अभियान के तहत लगाए गए पौधों की सर्वाइवल रेट (जीवित रहने की दर) बढ़ाने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत किया गया है। पौधों की नियमित देखभाल, सिंचाई, सुरक्षा और स्वास्थ्य की समीक्षा की जा रही है। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि पौधरोपण के बाद भी लगातार फील्ड निरीक्षण जारी रखें ताकि किसी भी प्रकार की क्षति या सूखने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि पौधरोपण अभियानों की वास्तविक सफलता केवल लगाए गए पौधों की संख्या से नहीं, बल्कि उनके जीवित रहने और विकसित होने की दर से तय होती है। इसी दृष्टिकोण से निगरानी व्यवस्था को अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
दिल्ली में हरित आवरण बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
दिल्ली लंबे समय से वायु प्रदूषण और घटते हरित क्षेत्र जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को राजधानी के पर्यावरणीय भविष्य के लिए महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि वर्तमान गति बनी रहती है तो आने वाले महीनों में दिल्ली 70 लाख पौधरोपण के लक्ष्य के और करीब पहुंच सकती है। सरकार को उम्मीद है कि यह अभियान न केवल हरित आवरण बढ़ाएगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति नागरिकों में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत करेगा।


