सर्दियों में प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने दो बड़े फैसले लिए हैं। अब छोटी सड़कों की सफाई 30 इलेक्ट्रिक मशीनों से होगी। साथ ही, आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर प्रदूषण के रियल-टाइम सोर्स का पता लगाया जाएगा।

सर्दियों से पहले दिल्ली सरकार ने प्रदूषण कंट्रोल करने के लिए कमर कस ली है। मंगलवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई। इसमें दो अहम फैसले लिए गए। पहला, छोटी सड़कों से धूल हटाने के लिए 30 इलेक्ट्रिक रोड-स्वीपिंग मशीनें उतारी जाएंगी। दूसरा, आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर पीएम 2.5 और पीएम 10 प्रदूषण के सोर्स की रियल-टाइम मॉनिटरिंग होगी।

धूल कंट्रोल करने के लिए इलेक्ट्रिक स्वीपर

सरकार अब उन छोटी सड़कों की भी मशीनों से सफाई कराएगी, जहां अभी यह सुविधा नहीं है। इस योजना में 10 मीटर से कम चौड़ी करीब 609 किलोमीटर लंबी सड़कें शामिल हैं। इसके लिए 250 वार्डों की 854 सड़कों की पहचान की गई है। दिल्ली सरकार इन मशीनों को खरीदने के लिए फंड देगी, जबकि एमसीडी इन्हें सड़कों पर चलाएगी।

इन 30 इलेक्ट्रिक स्वीपिंग मशीनों पर 10 साल में करीब 393.73 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इलेक्ट्रिक गाड़ियों के इस्तेमाल से सड़क की धूल तो कम होगी ही, साथ ही सफाई का काम भी पर्यावरण के अनुकूल रहेगा।

प्रदूषण के सोर्स की रियल-टाइम मॉनिटरिंग

कैबिनेट ने आईआईटी दिल्ली के साथ 5 साल के करार को भी मंजूरी दी है। इसके तहत पीएम 2.5 और पीएम 10 के सोर्स पर लगातार नजर रखी जाएगी। यह सिस्टम बताएगा कि दिनभर में गाड़ियों के धुएं, सड़क की धूल और पराली या कूड़ा जलने से कितना प्रदूषण फैल रहा है।

इस प्रोजेक्ट के तहत राउस एवेन्यू में मौजूद सुपर साइट और एक मोबाइल लैब को फिर से चालू किया जाएगा। इसके अलावा, एक रियल-टाइम डैशबोर्ड और रिपोर्टिंग सिस्टम भी बनेगा। साथ ही, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के अधिकारियों को ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 19.22 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

साल भर चलेगा प्रदूषण के खिलाफ अभियान

सीएम रेखा गुप्ता ने साफ किया कि सरकार सिर्फ सर्दियों में ही नहीं, बल्कि पूरे साल प्रदूषण के खिलाफ काम करेगी। उन्होंने बताया कि सड़क की धूल, गाड़ियों, कंस्ट्रक्शन, फैक्ट्रियों और कूड़ा जलने से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए सभी विभाग, एमसीडी, डीपीसीसी और वैज्ञानिक संस्थाएं मिलकर काम करेंगी।

ये दोनों फैसले दिल्ली के 'विंटर एक्शन प्लान 2026-27' का हिस्सा हैं। सरकार का मकसद है कि ग्राउंड लेवल पर काम, क्लीन टेक्नोलॉजी और साइंटिफिक मॉनिटरिंग के जरिए प्रदूषण को जड़ से खत्म किया जाए।

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