दिल्ली सरकार ने ₹657 करोड़ से अधिक की लागत से 270 किलोमीटर से ज्यादा सड़कों के सुदृढ़ीकरण को मंजूरी दी है। पहली बार जोनवार कॉम्पोजिट टेंडर प्रणाली लागू होगी। 48 घंटे में गड्ढों की मरम्मत और 5 साल की जवाबदेही तय की गई है।
दिल्ली सरकार ने राजधानी की सड़क व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित व्यय वित्त समिति (EFC) की बैठक में 657 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 270 किलोमीटर से ज्यादा सड़कों के सुदृढ़ीकरण को मंजूरी दी गई। इस योजना के तहत पूर्वी, उत्तरी और दक्षिणी दिल्ली के कई प्रमुख मार्गों का पुनर्निर्माण और उन्नयन किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि इस परियोजना का उद्देश्य केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यात्रियों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराना भी है। इससे लाखों लोगों को बेहतर सड़क नेटवर्क का लाभ मिलेगा।
पहली बार लागू होगी जोनवार कॉम्पोजिट टेंडर प्रणाली
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि दिल्ली में पहली बार जोनवार कॉम्पोजिट टेंडर प्रणाली लागू की जाएगी। इसके तहत सड़क निर्माण और रखरखाव से जुड़े कार्यों को एकीकृत तरीके से किया जाएगा, जिससे जवाबदेही बढ़ेगी और काम की गुणवत्ता पर बेहतर नियंत्रण रखा जा सकेगा।
सरकार ने ठेकेदारों के लिए पांच वर्ष की डिफेक्ट लाइबिलिटी अवधि तय की है। इसके अलावा सड़क पर गड्ढा बनने की स्थिति में 48 घंटे के भीतर मरम्मत सुनिश्चित करने का प्रावधान भी किया गया है, ताकि लोगों को लंबे समय तक खराब सड़कों का सामना न करना पड़े।
गुणवत्ता और पर्यावरण मानकों पर रहेगा विशेष फोकस
सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सीएसआईआर-सीआरआरआई (CSIR-CRRI) और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA) द्वारा स्वतंत्र गुणवत्ता ऑडिट कराया जाएगा। इससे निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी होगी और तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
वहीं, धूल और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए आयोग फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) के पर्यावरणीय मानकों का सख्ती से पालन किया जाएगा। बैठक में लोक निर्माण विभाग मंत्री प्रवेश साहिब सिंह और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। सरकार का मानना है कि यह परियोजना राजधानी के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और नागरिकों को बेहतर सड़क सुविधाएं देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

