दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने गुरुवार को एक बड़े 10-साला मास्टर प्लान की घोषणा की। इस प्लान का मकसद जंगली जानवरों की सुरक्षा, इकोसिस्टम को फिर से बेहतर बनाना और राजधानी में हरियाली बढ़ाना है।

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने राजधानी में वन्यजीवों की सुरक्षा, इकोसिस्टम को दोबारा मजबूत करने और ग्रीन कवर बढ़ाने के लिए 10 साल का मास्टर प्लान तैयार किया है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। ANI से बातचीत में मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य दिल्ली में स्थानीय वन्यजीवों के लिए ऐसा टिकाऊ शहरी वातावरण तैयार करना है, जहां जानवरों को भोजन और पानी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए जंगल से बाहर न निकलना पड़े। सिरसा ने कहा कि हाल के समय में वन्यजीवों की संख्या बढ़ने के साथ कुछ नए जानवर भी दिल्ली के इलाकों में दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में सरकार ने उनकी सुरक्षा के लिए एक विस्तृत रणनीति तैयार की है।

Delhi Wildlife: जंगल में ही पानी और भोजन की व्यवस्था पर जोर

मनजिंदर सिंह सिरसा के मुताबिक, वन्यजीवों के जंगल से बाहर आने की एक बड़ी वजह पानी की कमी है। इसे देखते हुए वन क्षेत्रों के भीतर ही पानी के स्रोत विकसित किए जा रहे हैं, ताकि जानवरों को पानी की तलाश में आबादी वाले इलाकों की ओर न जाना पड़े। उन्होंने बताया कि भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। खास तौर पर बंदरों के लिए अलग-अलग इलाकों में रोजाना भोजन पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। सरकार का मकसद ऐसा सिस्टम तैयार करना है जिसमें जानवरों को उनके प्राकृतिक वातावरण में ही पर्याप्त पानी और भोजन मिल सके। इससे इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव की स्थिति को भी कम करने में मदद मिल सकती है।

Green Cover बढ़ाने और Natural Areas को फिर से विकसित करने की तैयारी

दिल्ली सरकार के 10 साल के प्लान में सिर्फ वन्यजीव संरक्षण ही नहीं, बल्कि राजधानी के ग्रीन कवर को बढ़ाना भी शामिल है। मौजूदा प्राकृतिक क्षेत्रों को फिर से बेहतर बनाने के साथ-साथ दिल्ली की दूसरी बड़ी पर्यावरणीय समस्याओं पर भी विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। सरकार इन इलाकों की मौजूदा स्थिति का आकलन कर आगे की रणनीति तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। योजना का व्यापक उद्देश्य दिल्ली में ऐसा पर्यावरण तैयार करना है जहां शहर का विकास और प्राकृतिक इकोसिस्टम एक-दूसरे के साथ संतुलन में आगे बढ़ सकें।

Delhi Flood: यमुना फ्लडप्लेन को लेकर NGT की सख्ती

वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुधार को लेकर दिल्ली सरकार की यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब National Green Tribunal यानी NGT राजधानी के पर्यावरण प्रबंधन से जुड़े मामलों पर लगातार नजर रख रहा है। दिल्ली में हाल में आई बाढ़ से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान NGT ने यमुना के फ्लडप्लेन के सीमांकन को लेकर चल रहे विवाद पर भी सख्त रुख अपनाया।

NGT अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की बेंच ने पर्यावरण के Principal Secretary को DDA और Irrigation & Flood Control (I&FC) Department के साथ एक संयुक्त बैठक करने का निर्देश दिया है। यह बैठक एक सप्ताह के भीतर आयोजित करने को कहा गया है।

Yamuna Floodplain Demarcation: DDA और I&FC की बैठक क्यों जरूरी?

संयुक्त बैठक का मुख्य उद्देश्य यमुना के बाढ़ क्षेत्र यानी Floodplain की वास्तविक भौतिक सीमाओं के सीमांकन को लेकर बने गतिरोध को खत्म करना है। यह प्रक्रिया उस समय से अटकी हुई है, जब I&FC विभाग ने बीच में ही एक संशोधित नक्शा जारी कर दिया था। इसके बाद फ्लडप्लेन की सीमाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। NGT चाहता है कि इस मामले में संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ आगे बढ़ें और निर्धारित मानकों के आधार पर सीमांकन की प्रक्रिया पूरी करें।

NGT ने Floodplain Mapping के नियमों को लेकर क्या कहा?

ट्रिब्यूनल ने साफ किया कि यमुना के फ्लडप्लेन के सीमांकन के लिए तय पैरामीटर में किसी तरह की मनमानी नहीं हो सकती। NGT के मुताबिक, सीमांकन के मानक River Ganga Authorities Order, 2016 के तहत निर्धारित हैं। इनमें एक मीटर का कंटूर और 1:100 साल का बाढ़ स्तर यानी 100-year flood level शामिल है। इसका मतलब है कि फ्लडप्लेन की पहचान निर्धारित तकनीकी मानकों के आधार पर ही की जानी चाहिए। इसी आधार पर नदी के बाढ़ क्षेत्र की वास्तविक सीमा तय की जानी है।

I&FC को एक हफ्ते में Affidavit दाखिल करने का आदेश

NGT ने Irrigation & Flood Control Department को अगली सुनवाई से पहले एक सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। ट्रिब्यूनल के निर्देशों के मुताबिक, विभाग को फ्लडप्लेन के सीमांकन से जुड़े मामले में अपनी स्थिति और संबंधित जानकारी रिकॉर्ड पर रखनी होगी। इस मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर 2026 को होगी।

Delhi Environment Plan और Yamuna Floodplain पर अब आगे क्या?

एक तरफ दिल्ली सरकार वन्यजीवों के संरक्षण और ग्रीन कवर बढ़ाने के लिए लंबी अवधि की योजना पर काम कर रही है, वहीं दूसरी ओर यमुना फ्लडप्लेन के सीमांकन को लेकर NGT ने विभागों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया है। 10 साल के Master Plan में वन्यजीवों के लिए जंगल के भीतर पानी और भोजन की उपलब्धता, प्राकृतिक क्षेत्रों का सुधार और ग्रीन कवर बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं। वहीं NGT की कार्रवाई यमुना के बाढ़ क्षेत्र की सीमाओं को तय करने और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। आने वाले समय में इन दोनों मोर्चों पर होने वाली कार्रवाई दिल्ली के पर्यावरण प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण और यमुना के बाढ़ क्षेत्र की सुरक्षा के लिहाज से अहम मानी जा रही है।