अमेरिका के 39वें राष्ट्रपति जिमी कार्टर का निधन हो गया है। उन्होंने 100 साल की उम्र में आखिरी सांस ली है। उनका भारत के हरियाणा गांव से जुड़ा एक खास कनेक्शन बताया गया है, जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे।

कार्टरपुरी। अमेरिका के 39वें राष्ट्रपति जिमी कार्टर अब हमारे बीच नहीं रहे हैं। उन्होंने 100 साल की उम्र में अपनी आखिरी सांसे ली है। रविवार के दिन जॉर्जिया के प्लेन्स पर मौजूद अपने घर के अंदर अपने परिवार वालों के बीच उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली है। अमेरिका की राजनीति में उनका गहरा योगदान रहा है, लेकिन क्या आपको पता है कि जिमी कार्टर और भारत के हरियाणा गांव का ऐसा खास कनेक्शन भी मौजूद है। यहां हम बात कर रहे हैं हरियाणा के गांव कार्टरपुरी की। इस गांव का नाम जिमी कार्टर के नाम पर रखा गया था। 1978 में वो भारत आए थे उसके बाद ये नाम रखा गया था।

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दरअसल 1977 में आपातकाल हटने और जनता पार्टी की जीत के बाद जिमी कार्टर भारत आने वाले पहले अमेरिका के राष्ट्रपति थे। सत्तावादी के खिलाफ भारतीय संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने आवाज उठाई थी। उन्होंने लोकतंत्र के लिए भारत की जमकर तारीफ भी की थी। अपनी बता रखते हुए जिमी कार्टर ने 2 जनवरी 1978 को कहा था, ‘भारत की मुश्किलें, जिन्हें हम अक्सर खुद भी महसूस करते हैं और जो विकासशील देशों की आम समस्याएं हैं, हमें आगे के कामों की याद दिलाती हैं। रास्ता सत्तावादी होने का नहीं है।’

भारत का दोस्त माने जाते थे जिमी कार्टर

इतना ही नहीं जिमी कार्टर ने अपनी बात रखते हुए संसद के सदस्यियों से कहा था,'लेकिन भारत की सफलताएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे इस थ्योरी को पूरी तरह से ख़ारिज कर देती हैं कि आर्थिक और सामाजिक प्रगति हासिल करने के लिए एक विकासशील देश को एक सत्तावादी या अधिनायकवादी सरकार को स्वीकार करना होगा और मानवीय भावना के स्वास्थ्य को होने वाले उस नुकसान को भी स्वीकार करना होगा जो इस तरह का शासन अपने साथ लाता है। साथ ही कार्टर ने कहा,'क्या लोकतंत्र महत्वपूर्ण है? क्या मानव स्वतंत्रता को सभी लोग महत्व देते हैं?… भारत ने अपनी दमदार आवाज में इसका जवाब हां में दिया है। एक ऐसी आवाज जो पूरी दुनिया ने सुनी है। पिछले मार्च में यहां कुछ महत्वपूर्ण हुआ था, इसलिए नहीं कि कोई खास पार्टी जीती या हारी बल्कि मुझे लगता है इसलिए क्योंकि धरती पर सबसे बड़े मतदाताओं ने स्वतंत्र और समझदारी से अपने नेताओं को चुना। इस लिहाज से लोकतंत्र खुद विजेता था।’

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