झाबुआ के बलराम कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के लिए प्राकृतिक खेती, शून्य ब्याज ऋण, सिंचाई, डेयरी, कपास और आधुनिक कृषि तकनीकों पर बड़ा रोडमैप पेश किया।
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को झाबुआ में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव-2026 के दौरान किसानों से ऑनलाइन संवाद किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, खेती को अधिक लाभकारी बनाने और आधुनिक तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने किसानों से नई तकनीक अपनाने और बदलते मौसम के अनुरूप खेती करने की अपील भी की।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में "कृषक कल्याण वर्ष" के अंतर्गत बलराम कृषि महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसकी शुरुआत इंदौर से हुई थी और अब यह अभियान प्रदेश के विभिन्न जिलों तक पहुंच रहा है।
MP Balram Krishi Mahotsav 2026: इन जिलों में होंगे अगले आयोजन
मुख्यमंत्री ने बताया कि बलराम कृषि महोत्सव की अगली कड़ी 21 जुलाई को अलीराजपुर, 23 जुलाई को बड़वानी, 25 जुलाई को खरगौन, 27 जुलाई को बुरहानपुर और 30 जुलाई को खंडवा में आयोजित होगी। इसके बाद प्रदेश के अन्य जिलों में भी कृषि आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
कम बारिश की आशंका, किसानों की मदद के लिए प्रशासन को निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मौसम विभाग ने इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना जताई है। ऐसे में उन्होंने प्रशासन को पूरी तैयारी के साथ किसानों की सहायता के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को तीन लाख रुपये तक का कृषि ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा किसानों को केवल पांच रुपये में बिजली कनेक्शन देने की योजना भी संचालित की जा रही है। डेयरी विकास को बढ़ावा देने के लिए 40 लाख रुपये तक की परियोजनाओं पर 33 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है।
प्राकृतिक खेती और आधुनिक तकनीक अपनाने की अपील
मुख्यमंत्री ने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीक, वैज्ञानिक सलाह, प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण के उपाय अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा तथा कृषि विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्राकृतिक खेती के विजन को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत झाबुआ जिले में 50 कृषि सखियों का चयन किया गया है। वर्तमान में जिले में लगभग 3,125 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की जा रही है और किसानों की फसलों का प्रमाणन भी कराया जा चुका है।
कड़कनाथ को मिलेगी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि "एक जिला-एक उत्पाद" योजना के तहत झाबुआ के प्रसिद्ध कड़कनाथ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। वर्ष 2025 के दौरान जिले में कड़कनाथ पालन से एक हजार से अधिक नए हितग्राही जुड़े हैं, जिससे स्थानीय किसानों की आय में भी वृद्धि होने की उम्मीद है।
पशुपालन, मत्स्य पालन और कपास उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती के साथ पशुपालन किसानों की नियमित आय का मजबूत माध्यम बन सकता है। सरकार डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन और अन्य पशुपालन गतिविधियों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से बढ़ावा दे रही है। उन्होंने बताया कि जिले में 760 से अधिक तालाब विकसित किए गए हैं, जिनमें करीब तीन हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मत्स्य पालन किया जा रहा है। कपास उत्पादन को लेकर उन्होंने कहा कि खरीफ-2026 में अब तक झाबुआ जिले में 23,230 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बोवनी हो चुकी है। यह पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 16 प्रतिशत अधिक है।
पीएम मित्रा पार्क से किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि धार जिले के बदनावर में विकसित हो रहे पीएम मित्रा पार्क से झाबुआ के कपास उत्पादक किसानों को "खेत से कारखाने" तक की सुविधा मिलेगी। इससे कपास उत्पादकों को बेहतर बाजार मिलेगा और रोजगार के साथ औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलेगी।
झाबुआ का टमाटर देशभर में बना पहचान
मुख्यमंत्री ने पेटलावद स्थित टमाटर प्रसंस्करण इकाई का उल्लेख करते हुए कहा कि जिले में 2,812 हेक्टेयर क्षेत्र में टमाटर की खेती हो रही है और लगभग 1.68 लाख मीट्रिक टन उत्पादन किया जा रहा है। यहां टमाटर उत्पादकों का क्लस्टर विकसित किया गया है, जहां टमाटर सॉस और केचअप का उत्पादन किया जा रहा है। साथ ही 12 सोलर ड्रायर यूनिट के माध्यम से टमाटर का डिहाइड्रेशन भी किया जा रहा है। झाबुआ का टमाटर राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली सहित कई राज्यों में भेजा जा रहा है।
नर्मदा माइक्रो सिंचाई परियोजना से 50 हजार किसानों को फायदा
मुख्यमंत्री ने बताया कि नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना पूरी होने के बाद लगभग 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इससे करीब 50 हजार किसानों को लाभ मिलेगा और कम पानी में अधिक उत्पादन संभव हो सकेगा।
बलराम कृषि महोत्सव में किसानों को मिल रही आधुनिक तकनीक की जानकारी
बलराम कृषि महोत्सव के दौरान किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत बीज, नए कृषि यंत्र, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और सरकार की विभिन्न किसान हितैषी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। महोत्सव में उत्कृष्ट किसानों का सम्मान, हितग्राहियों को लाभ वितरण, कृषि यंत्रों का प्रदर्शन और तकनीकी साहित्य भी उपलब्ध कराया जा रहा है। कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता और अन्य विभागों द्वारा प्रदर्शनी लगाकर किसानों को विशेषज्ञों से सीधे संवाद का अवसर भी दिया जा रहा है।
डिजिटल खेती, ड्रोन तकनीक और स्मार्ट सिंचाई पर विशेष जोर
महोत्सव में किसानों को डिजिटल कृषि सेवाएं, ऑनलाइन कृषि परामर्श, मौसम आधारित खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, ड्रोन तकनीक, स्मार्ट सिंचाई प्रणाली, आधुनिक कृषि यंत्र और बाजार आधारित खेती की जानकारी दी जा रही है। साथ ही बदलती जलवायु के अनुसार खेती के नए तरीके और जोखिम प्रबंधन के उपाय भी समझाए जा रहे हैं।
13 नवंबर तक पूरे प्रदेश में चलेंगे कृषि महोत्सव
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने, कृषि प्रसंस्करण, विपणन और रोजगार से जोड़ने का व्यापक प्रयास है। कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता, ऊर्जा, राजस्व और एमएसएमई सहित 16 विभाग मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। प्रदेश के सभी जिलों में 13 नवंबर तक विभिन्न कृषि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
बलराम कृषि महोत्सव के 6 प्रमुख कृषि संकल्प
बलराम कृषि महोत्सव के माध्यम से किसानों को छह प्रमुख कृषि संकल्पों से जोड़ा जा रहा है-
- प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना।
- जल संरक्षण और "हर खेत को पानी" के लक्ष्य को आगे बढ़ाना।
- कृषि यंत्रीकरण और आधुनिक तकनीकों का विस्तार।
- फसल विविधीकरण एवं मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहन।
- किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और कृषि उद्यमिता को बढ़ावा।
- सरकार की सभी किसान कल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ किसानों तक पहुंचाना।


