BEML Manufacturing Unit Madhya Pradesh: रायसेन जिले के उमरिया में 1800 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली बीईएमएल रेल हब परियोजना का शिलान्यास हुआ। यह इकाई रेलवे कोच निर्माण के साथ 5000 से अधिक लोगों को रोजगार देगी और मेक इन इंडिया को बढ़ावा देगी।

BEML Rail Hub Umaria: मध्यप्रदेश के औद्योगिक मानचित्र पर एक नया अध्याय जुड़ गया है। रायसेन जिले के ग्राम उमरिया में 1800 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली बीईएमएल (BEML) रेल हब फॉर मैन्युफैक्चरिंग इकाई का शिलान्यास किया गया। यह परियोजना न केवल प्रदेश में औद्योगिक क्रांति का नया दौर लाएगी, बल्कि हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर भी प्रदान करेगी।

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बीईएमएल का दूसरा बड़ा रेलवे रोलिंग स्टॉक यूनिट

बीईएमएल के प्रेसिडेंट एवं सीएमडी शांतनु राय ने कार्यक्रम में बताया कि कंपनी की स्थापना 1964 में हुई थी और तब से यह रक्षा, रेल और खनन क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही है। बेंगलुरु में मेट्रो रेल कोच इकाई के बाद उमरिया का यह दूसरा बड़ा रेलवे रोलिंग स्टॉक यूनिट होगा। लक्ष्य है कि 18 महीने में पहला कोच तैयार कर लिया जाए। यहां अत्याधुनिक तकनीक से लाइट वेट एल्युमीनियम रेलवे कोच बनाए जाएंगे और भविष्य में रक्षा उत्पादों का निर्माण भी संभव होगा।

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मुख्यमंत्री ने बताया ‘प्रदेश के लिए स्वर्णिम दिन’

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने परियोजना को प्रदेश के लिए स्वर्णिम अवसर बताते हुए कहा कि 2023 के बाद से प्रदेश को 3600 करोड़ रुपये से अधिक के औद्योगिक विकास की सौगात मिल चुकी है। भोपाल मेट्रो के कोच भी अब यहीं तैयार होंगे। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है और 48 लाख हेक्टेयर का लैंड बैंक तैयार किया गया है।

रक्षा मंत्री का भरोसा - मिलेगा हर संभव सहयोग

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश को औद्योगिक विकास के लिए अल्प समय में 30 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त हुआ है, जो नेतृत्व की दक्षता का प्रमाण है। उन्होंने आश्वासन दिया कि रक्षा मंत्रालय से मध्यप्रदेश को पूर्ण सहयोग मिलेगा और इस परियोजना से एमएसएमई सेक्टर को भी बड़ा लाभ होगा।

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इस परियोजना से सीधे तौर पर 5000 लोगों को रोजगार मिलेगा, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से हजारों अन्य लोगों के लिए अवसर पैदा होंगे। कोच निर्माण के साथ ही रेलवे से जुड़े अन्य उत्पादों का भी निर्माण यहां किया जाएगा, जो ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को गति देगा।

आर्थिक विकास में मध्यप्रदेश की नई पहचान, पर्यावरण और सुरक्षा पर विशेष ध्यान

रक्षा मंत्री ने बताया कि भारत 2014 में अर्थव्यवस्था के मामले में 15वें स्थान पर था, जो अब दुनिया में चौथे स्थान पर पहुंच चुका है। रक्षा क्षेत्र में निर्यात 600 करोड़ से बढ़कर 24 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

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यह परियोजना मध्यप्रदेश को न केवल औद्योगिक मानचित्र पर अग्रणी बनाएगी, बल्कि इसे ‘मॉडर्न प्रदेश’ के रूप में स्थापित करेगी। बीईएमएल इकाई में सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के मानकों का पालन किया जाएगा। साथ ही रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि भविष्य में यहां उच्च स्तरीय नवाचार संभव हो सके।

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