भारत पर्व 2026 में मध्यप्रदेश के बुधनी खिलौने, चंदेरी साड़ियां, जरी-जरदोजी और गोंड चित्रकला आकर्षण बने हैं। 15 नवंबर तक चलेगा आयोजन।

गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परिसर में आयोजित ‘भारत पर्व 2026’ में मध्यप्रदेश अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक हस्तशिल्प के साथ खास पहचान बना रहा है। यहां लगाए गए मध्यप्रदेश पवेलियन में प्रदेश के अलग-अलग जिलों के प्रसिद्ध उत्पादों और कलाओं को प्रदर्शित किया जा रहा है। बुधनी के लकड़ी के लाख के खिलौने, भोपाल की जरी-जरदोजी, अशोकनगर की चंदेरी साड़ियां और बुरहानपुर के केले के रेशे से बने हस्तनिर्मित उत्पाद लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।

सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर आयोजित यह पर्व ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को समर्पित है। इसके जरिए देश के अलग-अलग राज्यों की सांस्कृतिक विविधता, परंपराओं और स्थानीय उत्पादों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। मध्यप्रदेश ने भी इस आयोजन में अपने ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) कार्यक्रम के तहत प्रदेश की खास पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सामने रखा है।

भारत पर्व 2026 में MP के ODOP उत्पादों का जलवा, बुधनी के खिलौने बने आकर्षण

मध्यप्रदेश पवेलियन में प्रदेश के उन उत्पादों को प्रमुखता से जगह दी गई है, जिनकी पहचान देशभर में है। इनमें सीहोर जिले के बुधनी में तैयार होने वाले लकड़ी के लाख के खिलौने खास आकर्षण बने हुए हैं। इन खिलौनों में स्थानीय कारीगरों की पारंपरिक कला और हुनर की झलक देखने को मिलती है।

इसके अलावा भोपाल की जरी-जरदोजी कला, अशोकनगर की विश्वप्रसिद्ध चंदेरी साड़ियां और बुरहानपुर में केले के रेशे से तैयार किए जाने वाले हस्तनिर्मित उत्पाद भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं। इन उत्पादों के जरिए मध्यप्रदेश की अलग-अलग शिल्प परंपराओं को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया गया है। इसका मकसद सिर्फ प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान दिखाना नहीं, बल्कि स्थानीय कारीगरों की मेहनत, दक्षता और रचनात्मकता को भी देशभर के लोगों तक पहुंचाना है।

MP Pavilion में जरी-जरदोजी और गोंड चित्रकला का लाइव डेमो

भारत पर्व में मध्यप्रदेश के पवेलियन का एक और खास आकर्षण पारंपरिक कलाओं का लाइव प्रदर्शन है। यहां भोपाल की जरी-जरदोजी कला और प्रदेश की प्रसिद्ध गोंड चित्रकला को कलाकारों द्वारा बनाते हुए दिखाया जा रहा है। जरी-जरदोजी की बारीक कढ़ाई और इसमें इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक तकनीक को करीब से देखने का मौका मिल रहा है। वहीं, गोंड चित्रकला में प्राकृतिक रंगों, प्रकृति से प्रेरित आकृतियों और खास चित्र शैली के जरिए आदिवासी कला परंपरा की झलक दिखाई जा रही है।

लाइव डेमो के माध्यम से आगंतुक इन कलाओं को केवल देखने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे की मेहनत, निर्माण प्रक्रिया और बारीकियों को भी समझ पा रहे हैं। इससे पारंपरिक कलाकारों को अपना हुनर दिखाने के साथ अपनी कला के बारे में लोगों को बताने का अवसर मिल रहा है।

Vocal for Local और आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बढ़ावा

‘भारत पर्व 2026’ में मध्यप्रदेश की भागीदारी स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में अहम मानी जा रही है। इस आयोजन में प्रदेश के शिल्पकारों और स्थानीय उत्पाद निर्माताओं को देश के अलग-अलग हिस्सों से आए लोगों के सामने अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है।

इस तरह की पहल से ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी बढ़ावा मिलता है। स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने और पारंपरिक कला को नई पीढ़ी से जोड़ने में ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मध्यप्रदेश के लिए यह अपने स्थानीय कारीगरों, पारंपरिक शिल्प और सांस्कृतिक विरासत को देशभर में पहचान दिलाने का अच्छा अवसर है।

15 नवंबर तक चलेगा भारत पर्व 2026, एकता नगर में पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परिसर में आयोजित ‘भारत पर्व 2026’ का आयोजन 15 नवंबर 2026 तक किया जाएगा। इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कला और स्थानीय उत्पादों को एक मंच पर प्रदर्शित किया जा रहा है। यह आयोजन ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करने के साथ देश की सांस्कृतिक विविधता को समझने का अवसर भी दे रहा है। इसके अलावा, एकता नगर और आसपास के पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने और पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने की भी उम्मीद है।