केंद्र सरकार ने 37,500 करोड़ रुपये की कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजना को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, आयात निर्भरता घटेगी और 50 हजार रोजगार सृजित होंगे।
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्र सरकार द्वारा 37 हजार 500 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय से पृथ्वी की सतह के निकट पाए जाने वाले कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दिए जाने पर प्रधानमंत्री Narendra Modi का आभार व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार लगातार ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत बनाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए बड़े फैसले ले रही है। इस योजना से देश की ऊर्जा क्षमता में बढ़ोतरी होगी और रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे।
25 कोयला गैसीकरण परियोजनाओं से बनेंगे लगभग 50 हजार रोजगार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पृथ्वी की सतह के निकट स्थित कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं की प्रोत्साहन योजना को स्वीकृति दी है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत 25 परियोजनाएं विकसित की जाएंगी, जिनके माध्यम से लगभग 50 हजार रोजगार सृजित होने की संभावना है। इससे ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा और कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के लिए नई दीर्घकालिक संभावनाएं विकसित होंगी।
Coal Gasification Scheme से ऊर्जा सुरक्षा होगी मजबूत
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को हुई बैठक में इस महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी। इस योजना का उद्देश्य भारत के कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण कार्यक्रम को गति देना है। सरकार ने वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण का राष्ट्रीय लक्ष्य तय किया है। यह योजना उसी लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और कई जरूरी उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
LNG, यूरिया और मेथनॉल आयात पर निर्भरता घटाने की तैयारी
सरकार का मानना है कि इस योजना से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG), यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों के आयात में कमी लाई जा सकेगी। वर्तमान में देश में LNG की 50 प्रतिशत से अधिक जरूरत आयात से पूरी होती है। वहीं यूरिया का लगभग 20 प्रतिशत, अमोनिया का 100 प्रतिशत और मेथनॉल का 80 से 90 प्रतिशत तक आयात किया जाता है। कोयला गैसीकरण योजना इन उत्पादों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद करेगी।
कोयला लिंकेज समझौते की अवधि 30 वर्ष तक बढ़ाई गई
केंद्र सरकार ने इस योजना के साथ एक बड़ा सुधार भी किया है। गैर-विनियमित क्षेत्र (NRS) लिंकेज नीलामी ढांचे में कोयले को सिंथेटिक गैस में बदलने वाली परियोजनाओं के लिए कोयला लिंकेज की अवधि बढ़ाकर 30 वर्ष कर दी गई है। कोयला लिंकेज का अर्थ कोयला उत्पादक कंपनियों और कोयला उपभोक्ता उद्योगों के बीच होने वाले दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते से है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और कोयला गैसीकरण परियोजनाओं में बड़े स्तर पर निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।
भारत के विशाल कोयला और लिग्नाइट भंडार का मिलेगा बेहतर उपयोग
उल्लेखनीय है कि भारत के पास लगभग 401 अरब टन कोयला भंडार और करीब 47 अरब टन लिग्नाइट उपलब्ध है। देश के कुल ऊर्जा मिश्रण में कोयले की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत से अधिक है। गैसीकरण प्रक्रिया के जरिए कोयला और लिग्नाइट को सिंथेटिक गैस में बदला जाता है। यह गैस ईंधन और विभिन्न रसायनों के उत्पादन में उपयोग होने वाला बहुउपयोगी कच्चा माल मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक से घरेलू स्तर पर ऊर्जा और रसायन उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा तथा आयात पर खर्च कम किया जा सकेगा।


