MP के  इंदौर में नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे की गिरफ्तारी ने मचाई सनसनी! हत्या की कोशिश के आरोप, थाने पर समर्थकों का हंगामा, सियासी गलियारों में हलचल तेज… आखिर सच्चाई क्या है?

Chintu Chouksey Arrest: इंदौर में एक साधारण बच्चों के झगड़े ने उस वक्त राजनीतिक रंग ले लिया जब नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे और उनके सहयोगी सुभाष के खिलाफ जानलेवा हमले का आरोप लगा। भाजपा कार्यकर्ता कपिल पाठक की शिकायत पर पुलिस ने चिंटू चौकसे को हिरासत में लिया। मामला हीरा नगर थाना क्षेत्र का है जहां पुलिस ने देर रात कार्रवाई कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

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पुलिस ने की मेडिकल जांच, कोर्ट में पेश करने की तैयारी 

हीरा नगर थाना पुलिस ने चिंटू चौकसे और सुभाष को गिरफ्तार करने के बाद एमवाय अस्पताल ले जाकर मेडिकल परीक्षण करवाया। इसके बाद दोनों को कोर्ट में पेश किए जाने की तैयारी की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायतकर्ता ने जो आरोप लगाए हैं, उनकी गहनता से जांच की जा रही है।

समर्थकों का थाने पर हंगामा, गिरफ्तारी के खिलाफ नारेबाजी 

चिंटू चौकसे की गिरफ्तारी की खबर जैसे ही फैली, उनके सैकड़ों समर्थक थाने के बाहर जमा हो गए। समर्थकों ने पुलिस पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। भीड़ ने थाने के सामने प्रदर्शन कर चौकसे की तुरंत रिहाई की मांग की। समर्थकों का कहना है कि यह गिरफ्तारी राजनीतिक साजिश का हिस्सा है।

क्या यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई? 

स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने इस मामले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। उनका कहना है कि चिंटू चौकसे जनहित के मुद्दों पर खुलकर बोलते हैं और बीजेपी की नीतियों का विरोध करते हैं, जिससे सत्ता पक्ष उनसे नाराज़ है। वहीं, बीजेपी नेताओं का कहना है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और यदि किसी ने अपराध किया है तो कार्रवाई होनी ही चाहिए।

सियासी गलियारों में हलचल, प्रशासन पर उठे सवाल 

चिंटू चौकसे की गिरफ्तारी ने इंदौर की सियासत में हलचल मचा दी है। जहां एक ओर कांग्रेस इस कार्रवाई को सत्ता का दुरुपयोग बता रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा इसे न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है। लेकिन सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या प्रशासन इस पूरे मामले को निष्पक्ष तरीके से हैंडल कर रहा है?

आगे क्या? जांच के बाद खुलेगा पूरा सच 

पुलिस फिलहाल जांच में जुटी है और कोर्ट में पेशी के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। यदि चिंटू चौकसे पर लगे आरोप साबित होते हैं तो उनके राजनीतिक भविष्य पर बड़ा असर पड़ सकता है। दूसरी ओर यदि यह आरोप झूठे साबित होते हैं तो यह गिरफ्तारी प्रशासन के लिए शर्मिंदगी का कारण बन सकती है।