पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हुए इंदौर के सुशील नथानियल की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, ताबूत का ढक्कन क्यों नहीं लगा? ईसाई रीति रिवाज से जूनी इंदौर कब्रिस्तान में दी गई अंतिम विदाई, हर आंख हुई नम।

Pahalgam Terror Attack: इंदौर के वीर सपूत सुशील नथानियल, जो जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में शहीद हो गए थे, उनकी अंतिम यात्रा एक भावनात्मक दृश्य में बदल गई। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर वीणा नगर स्थित आवास से निकला, हर गली, हर मोड़ पर लोगों की आंखें नम थीं। श्रद्धांजलि देने वालों का हुजूम उमड़ पड़ा। हर कोई बस यही कह रहा था – “हमारा हीरो चला गया।”

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उमड़ पड़ा जनसैलाब

सुशील की अंतिम यात्रा को देखने और उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए इंदौरवासियों का सैलाब उमड़ पड़ा। वीणा नगर से उनकी शवयात्रा नंदा नगर चर्च के लिए रवाना हुई, जहां प्रार्थना सभा आयोजित की गई। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार जूनी इंदौर कब्रिस्तान में ईसाई रीति रिवाजों के अनुसार किया गया।

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ताबूत का ढक्कन क्यों हटाया गया? 

अक्सर ईसाई समुदाय में ताबूत को अंतिम दर्शन के बाद सील कर दिया जाता है। लेकिन सुशील की पार्थिव देह का अंतिम दर्शन कुछ असामान्य परिस्थितियों के चलते भावुक कर देने वाला बन गया। हमले के तीन दिन बाद पार्थिव शरीर इंदौर लाया गया, जिससे शरीर में सूजन आ गई थी। इसके कारण ताबूत का ढक्कन ठीक से बंद नहीं हो पा रहा था। ऐसे में प्रतीकात्मक रूप से ढक्कन को ढका गया और अंतिम यात्रा के दौरान ढक्कन को पूरी तरह हटा दिया गया, ताकि लोग अपने नायक को आखिरी बार देख सकें।

शाम को पहुंचे सीएम, कहा – “यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा”

बुधवार रात करीब 9 बजे जैसे ही सुशील की पार्थिव देह इंदौर एयरपोर्ट पहुंची, माहौल गमगीन हो गया। हर तरफ सिर्फ सन्नाटा और श्रद्धा का भाव था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं उनके घर पहुंचकर श्रद्धांजलि दी और परिजनों को सांत्वना दी। उन्होंने कहा – “देश का यह बेटा आतंक के सामने झुका नहीं। उनका बलिदान हमें हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।”

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कब्रिस्तान में तैनात रही पुलिस और निगम टीम 

अंतिम संस्कार के दौरान जूनी इंदौर कब्रिस्तान में भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए पुलिस बल और नगर निगम की टीम तैनात की गई। जैसे ही सुशील का पार्थिव शरीर कब्रिस्तान पहुंचा, माहौल पूरी तरह ग़मगीन हो गया। कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया और फिर – पूरे सम्मान के साथ ताबूत को मिट्टी में सुला दिया गया।

पूरा शहर बोला – “गर्व है तुम्हारी शहादत पर” 

सुशील नथानियल अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी शहादत का संदेश हमेशा रहेगा – "देश पहले, जान बाद में।" इंदौर ने एक सच्चा सपूत खोया, लेकिन इतिहास ने एक अमर हीरो पा लिया।