MP Cabinet Meeting 2026: मोहन यादव सरकार ने ₹8,225 करोड़ से अधिक के प्रस्ताव मंजूर किए। सिंचाई, स्वास्थ्य, वन संरक्षण और नए जिलों में शिक्षा कार्यालयों पर जोर।
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 27 अक्टूबर 2026 को हुई मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक में विकास, सिंचाई, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में ₹8,225 करोड़ से अधिक के विभिन्न वित्तीय प्रस्तावों को स्वीकृति मिली। इनमें सिंचाई परियोजनाओं के लिए ₹3,378.69 करोड़, कैम्पा निधि के तहत ₹2,050.03 करोड़ और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की योजनाओं के लिए ₹1,743.58 करोड़ का प्रावधान शामिल है।
इसके अलावा सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण योजनाओं, नए जिलों में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों की स्थापना, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के संचालन और सरकारी संपत्तियों के रखरखाव से जुड़े प्रस्तावों पर भी निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने गेहूं की खरीद और बिक्री से जुड़े एक पुराने मामले में भी कार्योत्तर स्वीकृति दी।
MP Cabinet Meeting 2026: ₹8,225 करोड़ से अधिक के प्रस्ताव मंजूर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में हुई कैबिनेट बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक कई योजनाओं को जारी रखने के लिए राशि स्वीकृत की गई। इन फैसलों में कृषि और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन, वन संरक्षण तथा प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
प्रदेश में किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने, पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने और आम लोगों के लिए सरकारी सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से विभिन्न विभागों के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। नए जिलों में शिक्षा विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने के साथ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ और अन्य विभागों के कामकाज को सुचारू रखने के लिए भी वित्तीय प्रावधान किए गए।
सिंचाई परियोजनाओं के लिए ₹3,378.69 करोड़ मंजूर, किसानों को मिलेगा लाभ
मध्य प्रदेश में कृषि क्षेत्र को मजबूत करने और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने के लिए कैबिनेट ने चार प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं के संचालन को जारी रखने की मंजूरी दी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक इन परियोजनाओं के लिए कुल ₹3,378 करोड़ 69 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इनमें छिंदवाड़ा, सिवनी, मुरैना, सागर और दमोह जिलों में सिंचाई सुविधाओं से जुड़े कार्य शामिल हैं।
छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स परियोजना के लिए ₹2,611.13 करोड़
छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स परियोजना के लिए ₹2,611 करोड़ 13 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। इस परियोजना का उद्देश्य छिंदवाड़ा जिले के 1,90,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली विकसित करना है। इसके तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी तकनीकों के माध्यम से किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने की योजना है। सूक्ष्म सिंचाई से पानी का बेहतर उपयोग करने और कृषि भूमि तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने में मदद मिलेगी। इस परियोजना के पूरा होने से जिले में खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में काम आगे बढ़ सकेगा।
पेंच व्यपवर्तन परियोजना के लिए ₹197 करोड़ की मंजूरी
पेंच व्यपवर्तन वृहद परियोजना के निरंतर संचालन के लिए ₹197 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। इसका उद्देश्य बांध निर्माण के माध्यम से छिंदवाड़ा और सिवनी जिलों में कृषि के लिए पानी उपलब्ध कराना है। इस परियोजना के तहत छिंदवाड़ा जिले में 1,26,647 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना से जुड़े कार्यों को जारी रखने के लिए कैबिनेट ने वित्तीय मंजूरी दी है।
मुरैना की चेंटीखेड़ा सिंचाई परियोजना के लिए ₹531.15 करोड़
मुरैना जिले की चेंटीखेड़ा वृहद सिंचाई परियोजना के लिए ₹531 करोड़ 15 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस परियोजना के अंतर्गत बांध निर्माण और सिंचाई प्रणाली विकसित करने का काम चल रहा है। परियोजना के माध्यम से जिले में 15,300 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित करने का लक्ष्य है। इसके लिए आवश्यक कार्यों को आगे बढ़ाने और परियोजना का निरंतर संचालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राशि मंजूर की गई है।
सागर और दमोह में पंचमनगर सिंचाई कॉम्प्लेक्स को ₹39.41 करोड़
सागर जिले की पंचमनगर सिंचाई कॉम्प्लेक्स परियोजना के लिए ₹39 करोड़ 41 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है। इस परियोजना के तहत पगरा बांध और पंचमनगर बैराज का निर्माण पहले ही किया जा चुका है। अब पगरा बांध से पाइप प्रणाली के जरिए सागर और दमोह जिलों के 25,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की व्यवस्था की जानी है। कैबिनेट की मंजूरी से परियोजना के शेष कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
MP CAMPA Fund: वन संरक्षण और पौधारोपण के लिए ₹2,050.03 करोड़ मंजूर
मध्य प्रदेश कैबिनेट ने प्रतिकरात्मक वन रोपण निधि यानी कैम्पा (CAMPA) के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना लागू करने के लिए ₹2,050 करोड़ 3 लाख रुपये के उपयोग को मंजूरी दी है। इस राशि का इस्तेमाल वन संरक्षण, पौधारोपण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और वन क्षेत्रों के विकास से जुड़े कार्यों में किया जाएगा। कैम्पा निधि का उद्देश्य विकास परियोजनाओं के कारण वन भूमि के उपयोग से होने वाले नुकसान की भरपाई करना है। इसके तहत क्षतिपूर्ति पौधारोपण के साथ पहले से किए गए कार्यों का रखरखाव भी किया जाता है।
कैम्पा निधि से इन कार्यों को मिलेगी गति
स्वीकृत राशि का उपयोग कई तरह के पर्यावरणीय और वन विकास कार्यों में किया जा सकेगा। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- पिछले वर्षों में किए गए पौधारोपण और अन्य वन संबंधी कार्यों का रखरखाव।
- क्षतिपूर्ति पौधारोपण और खराब हो चुके वन क्षेत्रों का सुधार।
- नदियों के पुनर्जीवन के लिए जलग्रहण क्षेत्रों में वनीकरण।
- मिट्टी के कटाव को रोकने और जल संरक्षण के कार्य।
- ग्रामीणों की आजीविका बढ़ाने के लिए गांवों से लगे वन क्षेत्रों में बांस सहित अन्य प्रजातियों के पौधे लगाना।
- वन्यप्राणी संरक्षित क्षेत्रों के गांवों से स्वैच्छिक विस्थापन के कार्य।
- संरक्षित क्षेत्रों और उनके बफर जोन में वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास का विकास।
- नगर वनों की स्थापना।
- वन और वन्यप्राणी संबंधी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना।
- ग्रामीणों की क्षमता बढ़ाने और वन संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्रोत्साहित करना।
वन भूमि के उपयोग से मिलने वाली राशि का कैसे होता है इस्तेमाल?
वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के तहत विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए वन भूमि के उपयोग की अनुमति दी जाती है। ऐसी अनुमति देते समय भारत सरकार की ओर से कई शर्तें लगाई जाती हैं। इन शर्तों के तहत संबंधित संस्थानों से क्षतिपूर्ति वनीकरण, वन्यप्राणी प्रबंधन और नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) जैसी मदों के लिए राशि जमा कराई जाती है। इस तरह प्राप्त धनराशि को राज्य की प्रतिकरात्मक वन रोपण निधि में रखा जाता है। इस निधि का इस्तेमाल वन भूमि के उपयोग से होने वाले नुकसान की भरपाई और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों के लिए किया जाता है। कैबिनेट की मंजूरी से वित्तीय वर्ष 2026-27 में इन कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए संसाधन उपलब्ध होंगे।
सामाजिक न्याय और दिव्यांगजन कल्याण योजनाओं के लिए ₹651.25 करोड़
कैबिनेट ने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की विभिन्न योजनाओं को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए ₹651 करोड़ 25 लाख रुपये मंजूर किए हैं। इस राशि का इस्तेमाल दिव्यांगजनों के कल्याण, विशेष विद्यालयों और संस्थानों के संचालन तथा सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं में किया जाएगा।
विभाग की अलग-अलग योजनाओं के लिए स्वीकृत राशि का विवरण इस प्रकार है:
| योजना | स्वीकृत राशि |
| आयुक्त दिव्यांगजन कार्यालय की स्थापना से संबंधित योजना | ₹6.34 करोड़ |
| स्वावलंबन केंद्र, इंदौर | ₹2.29 करोड़ |
| दृष्टि एवं श्रवण बाधित विद्यालयों और संस्थाओं के वेतन-भत्ते | ₹152.37 करोड़ |
| मध्य प्रदेश राज्य सामान्य वर्ग कल्याण आयोग के कार्य | ₹6 करोड़ |
| कलापथक योजना | ₹45 करोड़ |
| निर्देशन और प्रशासन | ₹430.04 करोड़ |
| समग्र सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम सहित अन्य संबंधित योजनाएं | ₹9.21 करोड़ |
| कुल | ₹651.25 करोड़ |
स्वावलंबन केंद्र, इंदौर का पहले नाम भिक्षुक प्रवेश केंद्र तथा कर्मशाला योजना, इंदौर था। इसके लिए भी वित्तीय प्रावधान किया गया है। इन मंजूरियों का उद्देश्य विभागीय योजनाओं का संचालन जारी रखना और संबंधित संस्थानों की प्रशासनिक तथा वित्तीय जरूरतों को पूरा करना है।
चार नए जिलों में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय खुलेंगे, 100 पदों के लिए मंजूरी
मध्य प्रदेश के नवगठित जिलों निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय स्थापित किए जाएंगे। कैबिनेट ने इन कार्यालयों के गठन के लिए कुल 68 नए पदों के सृजन और आउटसोर्सिंग के माध्यम से 32 कर्मचारियों की सेवाएं लेने की मंजूरी दी है। इस व्यवस्था पर ₹16 करोड़ 80 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। मंजूरी के अनुसार, चारों जिलों में प्रत्येक कार्यालय के लिए 17 नए पद सृजित किए जाएंगे। इसके अलावा हर जिले में आउटसोर्सिंग के जरिए आठ कर्मचारियों की सेवाएं ली जा सकेंगी।
इस तरह प्रत्येक जिले में 25 पदों और सेवाओं की व्यवस्था होगी। चारों जिलों को मिलाकर 68 नियमित नए पदों के साथ आउटसोर्सिंग के जरिए 32 लोगों की सेवाएं लेने का प्रावधान किया गया है। नए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों की स्थापना से संबंधित जिलों में शिक्षा विभाग के प्रशासनिक कार्यों को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर विभागीय कामकाज के संचालन के लिए आवश्यक व्यवस्था तैयार की जा सकेगी।
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के संचालन के लिए ₹345.52 करोड़ मंजूर
मंत्रि-परिषद ने सामान्य प्रशासन विभाग के अंतर्गत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) में संचालित योजनाओं को जारी रखने के लिए ₹345 करोड़ 52 लाख रुपये की मंजूरी दी है। यह राशि 16वें वित्त आयोग की अवधि यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए स्वीकृत की गई है।
मंजूर राशि का इस्तेमाल मुख्य रूप से तीन मदों में किया जाएगा:
- स्थापना, वेतन-भत्ते और कार्यालय व्यय: ₹327.52 करोड़।
- प्रशासकीय भवन का निर्माण: ₹11 करोड़।
- विभागीय परिसंपत्तियों का रखरखाव: ₹7 करोड़।
इस वित्तीय मंजूरी का उद्देश्य आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के कामकाज को सुचारू बनाए रखना है। इसमें कर्मचारियों के वेतन-भत्तों, कार्यालय के नियमित खर्चों, भवन निर्माण और विभागीय संपत्तियों के रखरखाव के लिए धन उपलब्ध कराया जाएगा।
विधि एवं विधायी कार्य विभाग की संपत्तियों के रखरखाव के लिए ₹40 करोड़
मध्य प्रदेश कैबिनेट ने विधि एवं विधायी कार्य विभाग की परिसंपत्तियों के रखरखाव से संबंधित योजना को जारी रखने के लिए ₹40 करोड़ मंजूर किए हैं। यह राशि 16वें वित्त आयोग की अवधि के लिए स्वीकृत की गई है। यह अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक रहेगी। इस मंजूरी का उद्देश्य विभाग की संपत्तियों के रखरखाव से जुड़े कार्यों को निरंतर जारी रखना है, ताकि संबंधित विभागीय संसाधनों का उचित रखरखाव किया जा सके।
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ₹1,743.58 करोड़ की मंजूरी
प्रदेश में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की योजनाओं को लगातार जारी रखने के लिए कैबिनेट ने ₹1,743 करोड़ 58 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। यह मंजूरी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की अवधि के लिए दी गई है। राशि का प्रावधान विभाग की निर्देशन एवं प्रशासन से संबंधित योजना के निरंतर संचालन के लिए किया गया है। स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग की योजनाओं के संचालन के लिए यह वित्तीय स्वीकृति महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य विभागीय व्यवस्था को जारी रखने और प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना है।
मध्य प्रदेश में गेहूं की खरीद-बिक्री के पुराने मामले को कार्योत्तर मंजूरी
कैबिनेट ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अंतर्गत रबी विपणन वर्ष 2020-21 में चमकविहीन गेहूं की बिक्री से जुड़े प्रस्ताव को कार्योत्तर स्वीकृति दी है। यह मामला निविदा के माध्यम से गेहूं बेचने और मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन को इस कार्य के लिए अधिकृत करने से संबंधित है। प्रस्ताव के अनुसार, रबी विपणन वर्ष 2020-21 में सात लाख मीट्रिक टन चमकविहीन गेहूं की निविदा के जरिए बिक्री के लिए की गई कार्रवाई और कॉरपोरेशन को अधिकृत किए जाने पर कार्योत्तर स्वीकृति दी गई। इसके अलावा, मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन की ओर से निविदा के माध्यम से कुल 5.8 लाख मीट्रिक टन चमकविहीन गेहूं की बिक्री की गई थी। इसमें दो लाख मीट्रिक टन और 3.8 लाख मीट्रिक टन गेहूं की बिक्री शामिल थी। कैबिनेट ने इस बिक्री प्रक्रिया को भी कार्योत्तर अनुमोदन प्रदान किया। यह निर्णय पहले की गई कार्रवाई को बाद में औपचारिक मंजूरी देने से संबंधित है।
MP Cabinet Decisions: सिंचाई, स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्था पर फोकस
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में अलग-अलग विभागों की योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय मंजूरियां दी गईं। सिंचाई परियोजनाओं के लिए बड़ी राशि स्वीकृत कर कृषि क्षेत्र पर ध्यान दिया गया, जबकि कैम्पा निधि के माध्यम से वन संरक्षण और पर्यावरण से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ।
इसके साथ ही सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण योजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ और नए जिलों में शिक्षा विभाग के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने से जुड़े प्रस्ताव भी मंजूर किए गए। गेहूं की बिक्री से संबंधित पुराने मामले को कार्योत्तर स्वीकृति देना भी बैठक के फैसलों में शामिल रहा।
इन फैसलों के जरिए राज्य सरकार ने विकास योजनाओं को जारी रखने, विभागीय व्यवस्थाओं को मजबूत करने और प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में जरूरी सुविधाओं के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया है।







