Baiga Tribal Development: मध्य प्रदेश सरकार बालाघाट जिले के 100 पूर्व नक्सल प्रभावित गांवों के विकास पर 225 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करेगी। सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर फोकस रहेगा। अधिकारियों को 14 दिनों में गांवों का दौरा कर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
Naxal Affected Villages: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में नक्सलवाद से प्रभावित रहे गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के अनुरूप जिले के 100 चिन्हित गांवों के सर्वांगीण विकास की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इन गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए 225 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जाएगी। इसके साथ ही ग्रामीणों को रोजगार और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। जिला प्रशासन ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को 14 दिनों के भीतर गांवों का दौरा कर विकास संबंधी जरूरतों का आकलन करने के निर्देश दिए हैं।
100 गांवों के विकास पर खर्च होंगे 225 करोड़ रुपये
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 29 अगस्त 2026 को बालाघाट जिले के बैगा जनजाति बहुल और पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के लोगों से संवाद किया और क्षेत्र के 100 गांवों के समग्र विकास के लिए 225 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत करने की घोषणा की थी।
इस पहल का उद्देश्य लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहे गांवों में विकास कार्यों को गति देना, ग्रामीणों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना और स्थानीय परिवारों के लिए रोजगार के स्थायी अवसर तैयार करना है। इस राशि के अलावा विभिन्न विभाग अपनी योजनाओं और विभागीय बजट के माध्यम से भी विकास कार्य कराएंगे।
सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा पर रहेगा जोर
विकास कार्ययोजना में गांवों की बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके तहत सड़क, सिंचाई, पेयजल, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की जरूरतों का आकलन किया जा रहा है।
प्रशासन का जोर ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन बेहतर बनाने, किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने, पेयजल की समस्याओं को दूर करने और स्वास्थ्य केंद्रों तथा शैक्षणिक सुविधाओं को मजबूत करने पर है। गांवों में उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय जरूरतों के आधार पर विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे।
खेती और वनोपज से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
सरकार की योजना केवल बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों की आमदनी बढ़ाने के लिए कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
इसके अलावा, वन उपज पर आधारित आजीविका के अवसर विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
14 दिनों में गांवों का दौरा करेंगी विभागीय टीमें
बालाघाट जिला प्रशासन ने विकास कार्ययोजना तैयार करने के लिए 100 गांवों को अलग-अलग क्लस्टर में बांटा है। संबंधित विभागों के अधिकारियों को गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से सीधे संवाद करने और उनकी समस्याओं को समझने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अधिकारियों को 14 दिनों के भीतर सभी चिन्हित गांवों का भ्रमण पूरा करने और विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान बुनियादी सुविधाओं की स्थिति, ग्रामीणों की जरूरतों और रोजगार की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा, ताकि प्रत्येक गांव के हिसाब से विकास की प्राथमिकताएं तय की जा सकें।
26 अक्टूबर को 15 गांवों में पहुंचीं टीमें
26 अक्टूबर को विभिन्न विभागों के अधिकारियों की टीमों ने बालाघाट जिले के पांच विकासखंडों के गांवों का भ्रमण कर ग्रामीणों से बातचीत की। इस दौरान बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं और आजीविका के संभावित साधनों की जानकारी जुटाई गई।
लांजी विकासखंड के कट्टीपार, सतोना, बरगुड़ और देवरबेली गांवों का दौरा किया गया। बिरसा विकासखंड के दड़ेकसा, बिलालकसा और सोनगुड्डा में भी अधिकारियों ने ग्रामीणों से संवाद किया।
इसी तरह बैहर विकासखंड के लूद, हिर्री, भर्री, सोनपुरी और बिठली गांवों में विकास संबंधी जरूरतों का आकलन किया गया। परसवाड़ा विकासखंड के चालीसबोड़ी और मोहनपुर तथा किरनापुर विकासखंड के सीतापार और बोरवन गांवों में भी टीमों ने पहुंचकर जानकारी जुटाई।
ग्रामीणों की जरूरतों के आधार पर बनेंगे प्रस्ताव
गांवों के भ्रमण के दौरान जुटाई गई जानकारी के आधार पर संबंधित विभाग अपने-अपने क्षेत्र के विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार करेंगे। इसमें बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने से जुड़े कार्य शामिल होंगे।
इस पहल के जरिए पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे गांवों में विकास को गति देने और ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।




