Mohan Yadav Law And Order Review : मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपराधियों की संपत्ति कुर्क करने को लेकर क्या निर्देश दिए? साइबर अपराधों से निपटने के लिए मध्यप्रदेश सरकार कौन से नए कदम उठाने जा रही है? महिलाओं की सुरक्षा और कानून व्यवस्था मजबूत करने के लिए पुलिस को क्या जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं?

मध्यप्रदेश में कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गृह विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनकी अवैध संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ाई जाए। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को सक्रिय, जवाबदेह और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर विशेष जोर दिया।

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बदलते अपराधों से निपटने के लिए पुलिस को मिलेंगे नए संसाधन

भोपाल में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बदलते समय के साथ अपराधों का स्वरूप भी बदल रहा है। ऐसे में पुलिस बल को आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक संसाधन और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

उन्होंने संकेत दिए कि मध्यप्रदेश में विवेचना अधिकारियों (Investigating Officers) के लिए विशेष अन्वेषण भत्ता लागू करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसके लिए अन्य राज्यों में लागू व्यवस्थाओं का अध्ययन भी कराया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराध स्थल तक त्वरित पहुंच, डिजिटल साक्ष्य संग्रह, फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी, गवाहों और पीड़ितों के परिवहन तथा न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े खर्चों को देखते हुए विवेचना अधिकारियों को अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है।

अपराधियों की संपत्ति कुर्क करने में न हो ढिलाई

बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गंभीर अपराधों में शामिल अपराधियों की अवैध संपत्तियों को चिन्हित कर कानूनी प्रक्रिया के तहत कुर्क करने की कार्रवाई में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि कानून का भय तभी प्रभावी होगा जब अपराधियों को आर्थिक रूप से भी नुकसान पहुंचे और अपराध से अर्जित संपत्ति पर कार्रवाई की जाए।

महिलाओं की सुरक्षा को लेकर विशेष निर्देश

मुख्यमंत्री ने महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटर और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के आसपास छेड़छाड़ या असामाजिक गतिविधियों की घटनाएं बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। पुलिस को संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निगरानी और गश्त बढ़ानी होगी।

साइबर अपराध रोकने के लिए विशेषज्ञों की मदद

देशभर में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने गृह विभाग को आईटी कंसल्टेंट और साइबर विशेषज्ञों की सेवाएं लेने के निर्देश दिए। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि सोशल मीडिया आधारित अपराधों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के दुरुपयोग की निगरानी और विश्लेषण के लिए राज्य साइबर सेल को और मजबूत बनाया जाए।

सिंहस्थ 2028 की तैयारियों पर भी हुई चर्चा

मुख्यमंत्री ने उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए भीड़ प्रबंधन, कानून व्यवस्था, वीआईपी सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और आपदा प्रबंधन के लिए आवश्यक पुलिस बल की तैयारी पर चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सिंहस्थ के लिए विकसित होने वाली व्यवस्थाओं को अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी आधारभूत संरचना के रूप में तैयार किया जाए, ताकि भविष्य में भी उनका उपयोग किया जा सके।

पुलिस के नवाचारों की मुख्यमंत्री ने की सराहना

डॉ. मोहन यादव ने पुलिस विभाग द्वारा किए जा रहे कई नवाचारों की प्रशंसा भी की। उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नियंत्रण, सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के प्रयास, आपदा मित्रों के प्रशिक्षण, एयर एम्बुलेंस संचालन में सहयोग, अग्निशमन सेवाओं के समन्वय और सैनिक कल्याण से जुड़े प्रयासों को सराहनीय बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन पहलों को और प्रभावी बनाने के लिए विभागीय स्तर पर लगातार निगरानी और सुधार की आवश्यकता है।

AI आधारित सुरक्षा व्यवस्था पर भी मंथन

बैठक में एआई तकनीक का उपयोग कर "सेफगार्ड एमपी" जैसी व्यवस्था विकसित करने पर भी चर्चा हुई। इस पहल का उद्देश्य बुजुर्गों, महिलाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा को तकनीकी माध्यम से मजबूत करना है। इसके अलावा काउंटर टेररिस्ट ग्रुप की क्षमता बढ़ाने, विशेष पुलिस इकाइयों के प्रशिक्षण, जिला स्तर पर सीन ऑफ क्राइम मोबाइल यूनिट की व्यवस्था और वीवीआईपी ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों को विशेष भत्ता देने जैसे प्रस्तावों पर भी विचार किया गया।