मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश को मिल्क कैपिटल बनाने के प्रयास सफल हो रहे हैं। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और सांची ब्रांड की बिक्री बढ़ी है। किसानों को 1609 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है और नई डेयरी योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 21 मई को पशुपालन एवं डेयरी विभाग की समीक्षा बैठक में कहा कि मध्यप्रदेश को देश की “मिल्क कैपिटल” बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयास अब सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में बड़ी उपलब्धियां हासिल करने के लिए तैयार है।

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 9.67 लाख किलोग्राम दूध का संकलन हो रहा है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक है। वहीं बीते छह महीनों में प्रतिदिन 11 लाख किलोग्राम से ज्यादा दूध संकलन दर्ज किया गया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस उपलब्धि को लगातार बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयास जारी रखे जाएं।
डेयरी योजनाओं और पशुपालन कार्यक्रमों की हुई विस्तृत समीक्षा
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य में संचालित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति की जानकारी ली। इनमें डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनू योजना, आचार्य विद्यासागर गौसंवर्धन योजना, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम, क्षीरधारा ग्राम योजना, पशु स्वास्थ्य सेवाएं, चारा उत्पादन, पशु पोषण और स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना जैसे विषय शामिल रहे।
इसके अलावा ब्रीडर एसोसिएशन, दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान, राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) द्वारा दिए जा रहे सहयोग पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, मुख्य सचिव अनुराग जैन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
दुग्ध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर मध्यप्रदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वर्तमान में मध्यप्रदेश दुग्ध उत्पादन के मामले में देश में तीसरे स्थान पर है और सरकार का लक्ष्य राज्य को पहले स्थान तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में शुरू किए गए प्रयास लगातार सफल हो रहे हैं। प्रदेश में अब तक 1752 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है। इसके साथ ही ग्वालियर डेयरी प्लांट के आधुनिकीकरण, शिवपुरी डेयरी प्लांट को पुनर्जीवित करने और इंदौर में प्रतिदिन 3 लाख लीटर क्षमता वाले मिल्क पाउडर प्लांट की शुरुआत जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन पहलों से प्रदेश को दुग्ध उत्पादन और विपणन के क्षेत्र में अग्रणी बनाने में मदद मिली है और यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
दूध उत्पादक किसानों को 1609 करोड़ रुपये का भुगतान
बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के मार्गदर्शन में किए गए प्रयासों के चलते वर्ष 2025-26 में दूध उत्पादक किसानों को 1609 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। पिछले वर्ष यह राशि 1398 करोड़ रुपये थी। इस तरह किसानों को किए गए भुगतान में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है।
सरकार द्वारा समयबद्ध भुगतान व्यवस्था लागू किए जाने से विभिन्न दुग्ध संघों में दूध खरीद मूल्य में 2.50 रुपये से 8.50 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी हुई है। इससे किसानों की आय में सुधार आया है और उनके जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।
सांची ब्रांड की बिक्री और लोकप्रियता में बढ़ोतरी
बैठक में यह भी बताया गया कि राज्य सरकार द्वारा सांची ब्रांड को मजबूत करने के लिए किए गए प्रयास सफल रहे हैं। विपणन और ब्रांडिंग रणनीतियों के चलते सांची के विभिन्न उत्पादों की बिक्री में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
विशेष रूप से घी की बिक्री में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके अलावा पनीर, दही, छाछ और फ्लेवर्ड दूध जैसे उत्पादों की मांग भी बढ़ी है। बेहतर पैकेजिंग और आधुनिक ब्रांडिंग पर भी विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे उपभोक्ताओं के बीच सांची ब्रांड की लोकप्रियता बढ़ी है।


