मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय क्षेत्रों में जैविक खेती, शिक्षा और पशुपालन को बढ़ावा देने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बैगा, भारिया और सहारिया समाज के विकास के लिए अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए हैं।
मध्य प्रदेश में जनजातीय क्षेत्रों के विकास को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जनजातीय कार्य विभाग की समीक्षा बैठक में साफ संकेत दिए कि अब आदिवासी इलाकों में सिर्फ योजनाएं नहीं, बल्कि जमीन पर बदलाव दिखाई देना चाहिए। सरकार जैविक खेती, शिक्षा, छात्रवृत्ति, पशुपालन और बुनियादी सुविधाओं को एक साथ जोड़कर जनजातीय समाज के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।

भोपाल में हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनजातीय क्षेत्रों में जैविक खेती को बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ के दंतेवाड़ा जिले में आदिवासी किसान जिस तरह ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं, उसका अध्ययन करने के लिए मध्यप्रदेश से एक विशेष दल भेजा जाए ताकि वहां के सफल मॉडल को प्रदेश में भी लागू किया जा सके।
जैविक खेती से बदल सकती है आदिवासी इलाकों की तस्वीर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि जनजातीय क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों की भरपूर उपलब्धता है और यहां जैविक खेती की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। अगर आदिवासी किसानों को सही प्रशिक्षण, बाजार और तकनीकी सहायता मिले तो उनकी आय में बड़ा बदलाव आ सकता है। सरकार अब ऐसी योजनाओं पर फोकस कर रही है, जिनसे जनजातीय किसान रासायनिक खेती से हटकर प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर बढ़ें। इससे खेती की लागत घटेगी और उत्पादों की बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।
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बैगा, भारिया और सहारिया जनजातियों पर विशेष ध्यान
बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश की विशेष पिछड़ी जनजातियों— बैगा, भारिया और सहारिया समाज के समग्र विकास के लिए लगातार काम करने के निर्देश दिए। सरकार इन समुदायों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पोषण से जुड़ी योजनाओं को और मजबूत करने की तैयारी में है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन जनजातियों तक योजनाओं का प्रभावी लाभ पहुंचाना राज्य सरकार के लिए बड़ी चुनौती रहा है। ऐसे में अब विभागीय समन्वय और निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
शिक्षा और छात्रावासों की गुणवत्ता सुधारने पर जोर
मुख्यमंत्री ने जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित स्कूलों, आश्रमों और छात्रावासों की गुणवत्ता सुधारने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित रहन-सहन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्ष 2026 के हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणामों में प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ 10 जिलों में से 7 जिले जनजातीय क्षेत्र से जुड़े रहे। इसे सरकार ने सकारात्मक संकेत माना है।
करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति वितरित
सरकार ने बैठक में छात्रवृत्ति योजनाओं का आंकड़ा भी साझा किया। अधिकारियों के मुताबिक-
- दिसंबर 2023 से अब तक कक्षा 9 और 10 के 3 लाख 65 हजार विद्यार्थियों को 137 करोड़ 52 लाख रुपये की छात्रवृत्ति दी गई।
- पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत 4 लाख 28 हजार विद्यार्थियों को 673 करोड़ 64 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
इसके अलावा प्रदेश में फिलहाल 2671 छात्रावास और आश्रम शालाएं संचालित की जा रही हैं।
जनजातीय क्षेत्रों में बढ़ेगा पशुपालन और दुग्ध उत्पादन
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जनजातीय समाज में पशुपालन को भी बढ़ावा दिया जाए। सरकार चाहती है कि आदिवासी परिवार खेती के साथ डेयरी और पशुपालन से अतिरिक्त आय अर्जित करें। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
विभागों के बीच समन्वय पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए अलग-अलग विभागों को मिलकर काम करना होगा। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, खेती और रोजगार जैसी योजनाओं को एकीकृत तरीके से लागू किया जाए ताकि लोगों को सीधे लाभ मिल सके। उन्होंने समाजसेवी संगठनों की भागीदारी बढ़ाने की भी बात कही, ताकि पारंपरिक आदिवासी संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को सुरक्षित रखते हुए विकास का मॉडल तैयार किया जा सके।
सरकार का फोकस: विकास के साथ पहचान भी सुरक्षित रहे
सरकार अब ऐसी नीति पर काम कर रही है जिसमें विकास के साथ आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली को भी सुरक्षित रखा जा सके। यही वजह है कि जैविक खेती, पारंपरिक कृषि और स्थानीय संसाधनों पर आधारित योजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। आने वाले समय में मध्यप्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में जैविक खेती, शिक्षा सुधार और बुनियादी सुविधाओं पर सरकार का यह फोकस प्रदेश की ग्रामीण और आदिवासी अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।
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