MP Road Development Projects: मध्यप्रदेश में नई सड़क, रिंग रोड और हाईवे परियोजनाओं से भोपाल, इंदौर और उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिलने वाला है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सिंहस्थ 2028 से पहले सभी प्रमुख सड़क परियोजनाएं पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
मध्य प्रदेश में आने वाले वर्षों में सड़क और कनेक्टिविटी का नक्शा तेजी से बदलने वाला है। राज्य सरकार अब सिर्फ शहरों को जोड़ने वाली सड़कें नहीं बना रही, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने की तैयारी में है। राजधानी भोपाल, इंदौर और उज्जैन को केंद्र में रखकर बड़े स्तर पर सड़क, रिंग रोड, हाईवे और एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं पर काम तेज किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में साफ कहा कि नई सड़क परियोजनाएं प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगी। उन्होंने सिंहस्थ 2028 से पहले सभी जरूरी सड़क परियोजनाएं पूरी करने के निर्देश भी दिए।
भोपाल और इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र को मिलेगा सीधा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि भोपाल और इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों को नई सड़क परियोजनाओं का प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलना शुरू हो चुका है। आने वाले समय में जबलपुर और ग्वालियर भी इस इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से तेजी से आगे बढ़ेंगे। राज्य सरकार जिन प्रमुख परियोजनाओं पर फोकस कर रही है, उनमें शामिल हैं-
- इंदौर-उज्जैन सिक्स लेन रोड
- उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन हाईवे
- इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोरलेन प्रोजेक्ट
- भोपाल वेस्टर्न बायपास
- सागर-दमोह फोरलेन सड़क परियोजना
- बड़वाह-धामनोद फोरलेन प्रोजेक्ट
सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से उद्योग, व्यापार, पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को बड़ा फायदा मिलेगा।
सिंहस्थ 2028 से पहले पूरे होंगे सड़क निर्माण कार्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सिंहस्थ 2028 के आयोजन से कुछ महीने पहले ही सभी जरूरी सड़क परियोजनाएं पूरी कर ली जाएं। उज्जैन में सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की संभावना रहती है, इसलिए सड़क और ट्रैफिक व्यवस्था को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है।
सड़क दुर्घटनाओं में आई कमी
बैठक में बताया गया कि सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में प्रदेश को सकारात्मक परिणाम मिले हैं। वर्ष 2025 की पहली तिमाही की तुलना में 2026 में सड़क दुर्घटनाओं में कमी दर्ज की गई है।
- 2025 में दुर्घटनाएं: 16,006
- 2026 में दुर्घटनाएं: 15,278
- कुल कमी: 728 दुर्घटनाएं
इसके अलावा घायलों और मृतकों की संख्या में भी कमी आई है। सरकार का दावा है कि रोड सेफ्टी उपायों के चलते दुर्घटनाओं में औसतन 15 से 20 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज हुई है।
ब्लैक स्पॉट्स पर विशेष फोकस
प्रदेश में फिलहाल 481 ब्लैक स्पॉट्स चिन्हित किए गए हैं। इन स्थानों पर दुर्घटनाएं रोकने के लिए कई कदम उठाए गए हैं-
स्कूल जोन में स्पीड लिमिट
- चेतावनी संकेतक
- लेन मार्किंग
- रोड मार्किंग
- दिशा संकेतक
- प्राथमिक उपचार केंद्रों की योजना
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि दुर्घटना संभावित क्षेत्रों के पास तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए ताकि समय रहते लोगों की जान बचाई जा सके।
बड़े शहरों में तेजी से बनेंगी रिंग रोड
प्रदेश के बड़े शहरों में ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए रिंग रोड परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
प्रमुख रिंग रोड परियोजनाएं:
- भोपाल पश्चिमी बायपास: 35.6 किलोमीटर
- जबलपुर रिंग रोड
- ग्वालियर रिंग रोड
- उज्जैन रिंग रोड
इसके अलावा रतलाम, देवास, सागर, सतना, रीवा और कटनी जैसे शहरों में भी नई रिंग रोड बनाने की तैयारी चल रही है।
रेलवे ओवरब्रिज और एलिवेटेड कॉरिडोर से बदलेगी तस्वीर
मध्यप्रदेश रेलवे ओवरब्रिज निर्माण के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। सरकार के मुताबिक-
- PWD सड़कों पर 105 रेलवे ओवरब्रिज बनाए जा चुके हैं
- 16 नए ROB सड़क विकास निगम के तहत मंजूर हुए
- 25 ROB और RUB NHAI के अंतर्गत स्वीकृत किए गए
इसके अलावा शहरी ट्रैफिक को आसान बनाने के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं पर भी तेजी से काम हो रहा है। जबलपुर में यह कार्य पूरा हो चुका है, जबकि भोपाल और ग्वालियर में करीब 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
‘प्रगति पथ’ परियोजनाओं पर सरकार का फोकस
प्रदेश में इस समय छह बड़े ‘प्रगति पथ’ निर्माणाधीन हैं।
- नर्मदा प्रगति पथ
- मालवा-निमाड़ विकास पथ
- मध्यभारत विकास पथ
- बुंदेलखंड विकास पथ
- विंध्य एक्सप्रेस-वे
- अटल प्रगति पथ
सरकार का दावा है कि ये परियोजनाएं प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक प्रगति को नई दिशा देंगी।
किसानों और आम लोगों की सुरक्षा पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में कहा कि सड़क विकास के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि गांवों से शहरों तक फल और सब्जियां लाने वाले किसानों को हेलमेट वितरण अभियान से जोड़ा जाए ताकि दोपहिया दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके।


