MP Government Transferred 24 IAS : मध्य प्रदेश सरकार ने मंगलवार को 12 जिलों के कलेक्टरों सहित 24 आईएएस अफसरों का तबादला कर दिया। वहीं 8 महीने पहले ही डिंडौरी कलेक्टर बनाई गईं नेहा मारव्या को डीएम पद से हटाकर भोपाल में अपर सचिव बनाया गया है।

Madhya Pradesh News : मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने मंगलवार को 12 जिलों के कलेक्टरों सहित 24 आईएएस अफसरों के ट्रांसफर कर दिया है। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा डिंडौरी कलेक्टर नेहा मारव्या की है, जो अपने करियार के 14 साल में पहली बार कलेक्टर बनीं थीं, लेकिन आठ महीने में ही उन्हें इस पद से हटाकर अपर सचिव बनाकर भोपाल भेज दिया है। दरअसल, अफसर नेहा का शहपुरा से बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री ओमप्रकाश धुर्वे से हो गया था। जिसके बाद विधायक ने कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और उन्हें डिंडोरी कलेक्टर से हटाने की मांग की थी। जिसके बाद से ही कयास लगने लगे थे कि उनको लेकर कभी भी जा सकती है।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

नेहा मारव्या 2011 बैच की आईएएस अधिकारी

बता दें कि नेहा मारव्या 2011 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। नेहा 2017 में शिवपुरी जिला पंचायत की सीईओ रह चुकी हैं। उनकी गिनती मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित अधिकारियों में होती है। इसी साल जनवरी में उनका एक सोशल मीडिया पोस्ट जमकर वायरल हुआ था। उन्होंने आईएएस सर्विस मीट के पहले दिन आईएएस आफिसर्स एसोसिएशन के ग्रुप में अपना दर्द लिखकर जाहिर किया था । मैं बिना काम के बैठी हूं, मेरे पास कोई काम नहीं है। इस पोस्ट के बाद उन्हें डिडौरी कलेक्टर बनाया गया था।

कलेक्टर को बीजेपी विधायक से पंगा पड़ा महंगा

आईएएस नेहा मारव्या सबसे पहले उस समय चर्चा में आईं थीं, जब शहपुरा के भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने उन पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। विधायक ने डिंडोरी कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई के बाद कहा था डिंडौरी कलेक्टर नेहा ग्रामीणों से अभद्र व्यवहार करती हैं। इसके बाद विधायक और कलेक्टर के बीच विवाद बढ़ता गया और विधायक ने अधिकारी की शिकायत सरकार से कर दी।

नेहा मारव्या ने जब रोक दिया था शिवपुरी कलेक्टर का बिल

इसके अलावा 2017 में आईएएस नेहा मारव्या शिवपुरी जिला पंचायत की सीईओ रहते के दौरान उन्होंने शिवपुरी कलेक्टर का बिल रोक दिया था। वहीं, गाड़ी भाड़े पर थी। उसके बदले में हर महीने 24,700 रुपए का भुगतान होता था। लेकिन नेहा मारव्या ने इस पर आपत्ति लेते हुए बताया कि इस निर्धारित रेट 18,000 रुपए हैं, ऐसे में 24,7000 रुपए का भुगतान नहीं किया जाएगा।