भोपाल में आचार्य समय सागर महाराज के चातुर्मास समारोह में पहुंचे सीएम मोहन यादव ने संतों के महत्व, यूसीसी और जनकल्याण पर अपने विचार रखे।
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को भोपाल स्थित विद्योदय तीर्थ में आयोजित परम पूज्य आचार्य 108 श्री समय सागर जी महाराज के पावन वर्षायोग (चातुर्मास) के कलश स्थापना समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने आचार्य श्री का आशीर्वाद प्राप्त किया और अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि यह दिन उनके जीवन के सबसे सौभाग्यशाली दिनों में से एक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों का सौभाग्य है कि उन्हें संतों और आध्यात्मिक विभूतियों का सान्निध्य प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज यहां का वातावरण इतना आध्यात्मिक और आनंदमय है कि ऐसा महसूस हो रहा है मानो होली, दीपावली और अन्य सभी त्योहार एक साथ मना लिए हों।
चरण प्रक्षालन को बताया जीवन का यादगार क्षण
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उन्हें आचार्य समय सागर महाराज के चरण प्रक्षालन का अवसर मिला, जिसे वे जीवनभर नहीं भूल पाएंगे। उन्होंने इसे अपने जीवन का बड़ा सौभाग्य बताते हुए कहा कि ऐसे अवसर परमात्मा की विशेष कृपा से ही प्राप्त होते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आचार्य श्री के राजधानी भोपाल आगमन से पूरा प्रदेश धन्य हो गया है। उन्होंने कहा कि 84 लाख योनियों के बाद प्राप्त मानव जीवन में दो रास्ते होते हैं। एक मार्ग हमें ईश्वर और सद्गुणों की ओर ले जाता है, जबकि दूसरा मार्ग जीवन को कष्टों की ओर धकेलता है। संतों का आशीर्वाद हमें सही दिशा चुनने की प्रेरणा देता है।
संतों का सान्निध्य जीवन को देता है नई दिशा
मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें कई बार संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज का आशीर्वाद लेने का अवसर मिला। उनके प्रवचनों से हमेशा आध्यात्मिक ऊर्जा मिली। उन्होंने कहा कि जब भी आचार्य विद्यासागर महाराज के दर्शन किए, ऐसा अनुभव हुआ मानो किसी दिव्य शक्ति का साक्षात्कार हो रहा हो।
उन्होंने कहा कि आज आचार्य समय सागर महाराज के दर्शन कर वे स्वयं को धन्य महसूस कर रहे हैं। इस भाव को शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं है। भारत की आध्यात्मिक पहचान ऐसी ही महान विभूतियों के कारण बनी हुई है और यही हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत है।
आत्मसंयम और ‘जियो और जीने दो’ भारत की पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत विश्व में अपनी अलग पहचान बना रहा है। जहां दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष और शक्ति प्रदर्शन की राजनीति दिखाई देती है, वहीं भारत आत्मसंयम, सहअस्तित्व और ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांत पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि हम सभी जन्म से मृत्यु तक की यात्रा के यात्री हैं। इसलिए हमें सभी जीवों के प्रति करुणा और प्रेम का भाव रखना चाहिए। गौ-माता के संरक्षण और सेवा को भी भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उन्होंने कहा कि समाज और संस्कृति की रक्षा हम सभी की जिम्मेदारी है।
समाजसेवा भी एक प्रकार की साधना है
डॉ. यादव ने कहा कि साधना केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। अस्पताल बनाना, गौशालाओं का संचालन करना, उद्योग स्थापित कर लोगों को रोजगार देना और समाज को आत्मनिर्भर बनाना भी एक प्रकार की साधना है। उन्होंने कहा कि आचार्य समय सागर महाराज समाज को स्वावलंबी बनाने और जनहित के कार्यों के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका यह प्रयास समाज के लिए अनुकरणीय है।
नई शिक्षा नीति से संस्कार और संस्कृति को मिल रहा बल
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू नई शिक्षा नीति केवल किताबों तक सीमित शिक्षा नहीं देती, बल्कि बच्चों को भारतीय संस्कृति, मूल्यों और संस्कारों से भी जोड़ती है। उन्होंने कहा कि हमारी भाषा, संवाद और जीवनशैली में स्वदेशी भाव होना चाहिए। अपनी संस्कृति और परंपराओं पर गर्व करना हर भारतीय का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में शासक को राजा नहीं बल्कि जनसेवक माना गया है और जनप्रतिनिधियों को इसी भावना के साथ कार्य करना चाहिए।
हर अवसर का उपयोग जनकल्याण के लिए करें
मुख्यमंत्री ने कहा कि परमात्मा प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में अवसर देता है। उन अवसरों का उपयोग समाज और राष्ट्रहित में किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शासन का प्रत्येक निर्णय गरीबों, जरूरतमंदों और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए।
UCC पर भी बोले मुख्यमंत्री मोहन यादव, आचार्य श्री को दिया विधानसभा आने का निमंत्रण
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उनकी सरकार जनकल्याण के मार्ग पर लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि हाल ही में मध्यप्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने आचार्य समय सागर महाराज को विधानसभा आने का निमंत्रण देते हुए कहा कि यदि उनका मार्गदर्शन विधायकों को मिले तो लोकतंत्र और समाज दोनों को लाभ होगा। इसके लिए विशेष एक दिवसीय सत्र भी आयोजित किया जा सकता है।
जीवन में सब मिलता है, लेकिन साथ कुछ नहीं जाता
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति को विकास के चार प्रमुख स्तंभ बताया है। राज्य सरकार भी इन्हीं वर्गों के कल्याण को केंद्र में रखकर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान वर्ष को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि जीवन में व्यक्ति को बहुत कुछ प्राप्त होता है, लेकिन अंत समय में कुछ भी साथ नहीं जाता। ऐसे में संतों की शिक्षाएं ही जीवन का सच्चा मार्गदर्शन करती हैं और यही संदेश समाज को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।


