कटनी की स्लीमनाबाद टनल अंतिम चरण में है। इसके शुरू होने पर 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई मिलेगी और विंध्य क्षेत्र की खेती बदल जाएगी।
भोपाल। मध्यप्रदेश के कटनी जिले में बन रही स्लीमनाबाद टनल अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 17 जुलाई को इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निरीक्षण किया। इसे प्रदेश की सबसे चुनौतीपूर्ण इंजीनियरिंग परियोजनाओं में गिना जा रहा है। टनल के शुरू होने के बाद जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना के लगभग 1450 गांवों की करीब 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी। इससे विंध्य और महाकौशल क्षेत्र की खेती, रोजगार और अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।
Sleemanabad Tunnel Project: वर्षों की चुनौती के बाद सफलता के करीब पहुंची परियोजना
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि टनल निर्माण का कार्य तीन शिफ्टों में लगातार चलाया गया। शुरुआती वर्षों में काम की गति काफी धीमी थी और वर्ष 2015 तक केवल 1406 मीटर तक ही टनल की खुदाई हो सकी थी। इसके बाद वर्ष 2016 में टनल के अपस्ट्रीम हिस्से से जर्मनी से लाई गई आधुनिक मशीन के जरिए खुदाई शुरू हुई। इस दौरान इंजीनियरों, तकनीशियनों और मजदूरों को कई तकनीकी और प्राकृतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। वर्ष 2023 में नई सरकार बनने के बाद ठेकेदार ने भी काम छोड़ने की स्थिति बना ली थी। मशीनें पुरानी हो चुकी थीं और लंबे समय तक एक ही मशीन से खुदाई जारी रखनी पड़ी। तमाम कठिनाइयों के बावजूद अब वर्ष 2026 में यह परियोजना लगभग पूरी हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि टनल शुरू होने के बाद अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में करीब ढाई लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।
Engineering Marvel: विज्ञान और इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण बनी स्लीमनाबाद टनल
मुख्यमंत्री ने कहा कि विंध्य क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद कई हिस्सों में पानी की कमी लंबे समय से चुनौती बनी हुई थी। यह टनल कटनी, रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जैसे जिलों के लिए जीवनदायिनी साबित होगी। उन्होंने कहा कि नर्मदा नदी का जल सामान्य रूप से खंभात की खाड़ी की ओर बहता है, लेकिन आधुनिक इंजीनियरिंग के जरिए अब यही पानी ऐतिहासिक टनल के माध्यम से गंगा बेसिन की सोन नदी क्षेत्र तक पहुंचेगा और वहां हरियाली लाएगा। लगभग 12 किलोमीटर लंबी यह परियोजना भविष्य में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए भी केस स्टडी मानी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि टनल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि भीषण भूकंप की स्थिति में भी यह लगभग 100 वर्षों तक सुरक्षित रहेगी। कई स्थानों पर इसकी गहराई जमीन से 120 फीट तक है। उन्होंने परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि करीब 1600 करोड़ रुपये की परियोजना में केंद्र सरकार ने लगभग 275 करोड़ रुपये का सहयोग दिया है।
MP Irrigation Project: सिंचाई क्षमता में होगा बड़ा इजाफा
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय ऐसा भी आया था जब लगने लगा था कि यह परियोजना पूरी नहीं हो पाएगी। लेकिन सरकार ने कठिन चट्टानों और तकनीकी बाधाओं के बावजूद काम जारी रखा। उन्होंने बताया कि चित्रकूट और विंध्य क्षेत्र के पांच जिलों—रीवा, सतना, मैहर, कटनी और पन्ना—में करीब 2.5 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। इससे पेयजल की समस्या भी काफी हद तक दूर होगी और कई स्थानों पर बिजली उत्पादन की भी संभावना बनेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कभी केवल साढ़े सात लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होती थी। बाद में यह बढ़कर 44 लाख हेक्टेयर हुई और पिछले ढाई वर्षों में इसे बढ़ाकर 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाया गया है।
Farmer Welfare Year: किसान कल्याण वर्ष में किसानों को बड़ी सौगात
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में यह परियोजना किसानों के लिए बड़ी उपलब्धि साबित होगी। अगले तीन महीनों में रबी सीजन के लिए लगभग एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस परियोजना की खासियत यह है कि नीचे से नर्मदा नदी और ऊपर से कटनी नदी प्रवाहित होगी। यह परियोजना बुंदेलखंड और बघेलखंड के लाखों किसानों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगी। मुख्यमंत्री ने किसानों से अपनी कृषि भूमि नहीं बेचने की अपील करते हुए कहा कि आने वाले समय में यह क्षेत्र पंजाब और हरियाणा जैसी कृषि समृद्धि हासिल करेगा। इससे पलायन रुकेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
Tunnel Construction Challenges: इंजीनियरों ने किया असंभव को संभव
करीब 11.952 किलोमीटर लंबी इस टनल का निर्माण विंध्य पर्वतमाला के भीतर किया गया है। इसके जरिए नर्मदा का पानी गुरुत्वाकर्षण के सहारे सोन नदी तक पहुंचाया जाएगा। निर्माण के दौरान इंजीनियरों को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कठोर मार्बल और लाइमस्टोन की चट्टानें, मजबूत डोलोमाइट परतें, विशाल भूमिगत गुफाएं और प्रति मिनट करीब 25 हजार लीटर पानी का रिसाव काम में सबसे बड़ी बाधा बने।
स्थिति इतनी कठिन थी कि खुदाई में इस्तेमाल की गई अमेरिकी मशीन भी टूट गई। इसके बाद जर्मनी की अत्याधुनिक हेरेनकनेक्ट मशीन मंगाई गई और विशेष टेम ग्राउटिंग तकनीक अपनाकर काम को आगे बढ़ाया गया। टनल की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि यह घनी आबादी, रेलवे ट्रैक और राष्ट्रीय राजमार्ग के नीचे से गुजरने के बावजूद कहीं भी कोई नुकसान नहीं हुआ।
Project Cost: 2008 में शुरू हुआ सफर, लागत दोगुनी से ज्यादा पहुंची
इस परियोजना का निर्माण कार्य हैदराबाद की निर्माण एजेंसी मेसर्स पटेल-एसईडब्ल्यू (संयुक्त उपक्रम) को सौंपा गया था। वर्ष 2008 में इसका अनुबंध हुआ था और उस समय अनुमानित लागत 799 करोड़ रुपये तय की गई थी। बाद में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, जल रिसाव रोकने के लिए विशेष तकनीकों और आधुनिक मशीनों के उपयोग के कारण लागत बढ़ती गई। अब तक इस परियोजना पर 1610.47 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। वर्तमान में पूरे अनुबंध का 96.66 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। परियोजना के अंतर्गत 12.135 किलोमीटर लंबी ओपन कट नहर और 11.952 किलोमीटर लंबी मुख्य टनल का निर्माण पूरी तरह समाप्त हो चुका है।
Narmada Tunnel Benefits: 1450 गांवों की बदलेगी तस्वीर
10.14 मीटर व्यास वाली इस विशाल टनल से नर्मदा का पानी बिना बिजली और बिना भारी पंपों के केवल गुरुत्वाकर्षण के सहारे आगे बढ़ेगा। बरगी दायीं तट मुख्य नहर के माध्यम से जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जिले के करीब 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी। इसके अंतर्गत कटनी में 21,823 हेक्टेयर, मैहर में 54,227 हेक्टेयर, सतना में 1,04,970 हेक्टेयर, रीवा में 3,532 हेक्टेयर तथा पन्ना में 448 हेक्टेयर भूमि को सीधा लाभ मिलेगा।
MP Government Roadmap: 2027 तक सिंचाई क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य
टनल के बाद बनने वाले आठों ग्रुपों पर तेजी से काम जारी है। मार्च 2026 तक 44,160 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित की जा चुकी है। राज्य सरकार की योजना के अनुसार दिसंबर 2026 तक 87,433 हेक्टेयर और दिसंबर 2027 तक कुल 1,54,693 हेक्टेयर क्षेत्र में पूर्ण सिंचाई व्यवस्था उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा जल संसाधन विभाग की अन्य परियोजनाओं के तहत करीब 30,307 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को भी इसी टनल से पानी उपलब्ध कराया जाएगा।


