मध्य प्रदेश के 12 जिलों में सामान्य से कम बारिश के बाद CM मोहन यादव ने पेयजल को प्राथमिकता देने, कम पानी वाली फसलें बढ़ाने और जल प्रबंधन के निर्देश दिए।

भोपाल। मध्य प्रदेश के कई जिलों में इस बार सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों में जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा कि कम वर्षा वाले जिलों में सबसे पहले पेयजल की जरूरत पूरी की जाए और पानी की उपलब्धता को देखते हुए किसानों को कम पानी वाली फसलों की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने ये निर्देश मंत्रालय में मानसून और प्रदेश में हुई बारिश की स्थिति की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक में दिए। बैठक में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

MP में 12 जिलों में सामान्य से कम बारिश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समीक्षा बैठक में बताया कि प्रदेश के 12 जिलों में सामान्य से कम वर्षा हुई है। इनमें आलीराजपुर, धार, झाबुआ, रतलाम, बैतूल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, हरदा और शाजापुर शामिल हैं। इन जिलों में आगे पानी की उपलब्धता को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से जल प्रबंधन की तैयारी अभी से मजबूत की जाए, ताकि आने वाले समय में पेयजल संकट जैसी स्थिति न बने।

पेयजल को मिलेगी सबसे पहली प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि सामान्य से कम बारिश वाले इलाकों में जल प्रबंधन करते समय पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके बाद उपलब्ध पानी का उपयोग अन्य जरूरतों के लिए किया जाए। उन्होंने किसानों को भी ऐसी फसलें लेने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा, जिनमें अपेक्षाकृत कम पानी की आवश्यकता होती है। इसका उद्देश्य उपलब्ध जल संसाधनों पर दबाव कम करना और खेती के लिए पानी की उपलब्धता को लंबे समय तक बनाए रखना है।

जल उपभोक्ता समितियों की भी होगी अहम भूमिका

कम बारिश वाले जिलों में स्थिति से निपटने के लिए सिर्फ सरकारी स्तर पर प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। मुख्यमंत्री ने जल उपभोक्ता समितियों से भी सक्रिय भूमिका निभाने को कहा है। उन्होंने कहा कि इन समितियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच जल संरक्षण और उपलब्ध पानी के बेहतर इस्तेमाल को लेकर वातावरण तैयार किया जाए। जरूरत के मुताबिक पानी के इस्तेमाल और भविष्य की स्थिति को लेकर भी लोगों को जागरूक किया जाए।

बांधों और जलाशयों में पानी की स्थिति की समीक्षा

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश के प्रमुख बांधों और जलाशयों में मौजूद पानी की स्थिति की जानकारी ली। इसके साथ ही उन जिलों के जल स्रोतों की भी समीक्षा की गई, जहां सामान्य से कम बारिश हुई है। समीक्षा में नदियों के जलप्रवाह, भू-जल स्तर और मिट्टी में मौजूद नमी की स्थिति जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी चर्चा हुई। इन सभी संकेतकों को देखते हुए आने वाले दिनों में जल उपलब्धता का आकलन करने पर जोर दिया गया।

कम बारिश वाले जिलों में रोजगार के लिए जलगंगा अभियान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कम वर्षा वाले जिलों में रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में भी काम शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जलगंगा अभियान के तहत इन क्षेत्रों में विभिन्न गतिविधियां शुरू की जाएं। इससे एक ओर जल संरक्षण और जल प्रबंधन से जुड़े कामों को गति मिलेगी, वहीं स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी तैयार किए जा सकेंगे। सरकार का जोर कम बारिश वाले क्षेत्रों में उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के साथ ग्रामीण स्तर पर गतिविधियों को बढ़ाने पर है। बैठक में राजस्व, जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग के अधिकारियों ने प्रदेश की बारिश, जल स्रोतों और जल उपलब्धता से संबंधित जानकारी प्रस्तुत की।