MP News: क्या 13 लाख किसानों को मिला सबसे बड़ा फायदा? क्या मोहन यादव सरकार ने MSP पर बनाया नया रिकॉर्ड? क्या किसानों के खातों में पहुंच गए 23 हजार करोड़ रुपये? जानिए कैसे 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी कर एमपी बना देश में चर्चा का केंद्र।
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने इस वर्ष गेहूं खरीदी के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। प्रदेश में तय लक्ष्य 100 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले 104 लाख 22 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीदी की गई। यह उपलब्धि राज्य की कृषि व्यवस्था और किसानों के हित में किए गए प्रभावी प्रबंधन को दर्शाती है।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि पहले प्रदेश को 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों के बाद केंद्र सरकार ने इसे बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया। प्रदेश ने इस संशोधित लक्ष्य को भी पार कर नया कीर्तिमान बना दिया।
MSP Wheat Procurement: 13 लाख से ज्यादा किसानों से खरीदी
राज्य सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 13 लाख 41 हजार 266 किसानों से गेहूं खरीदा है। इस उपलब्धि के साथ मध्यप्रदेश किसानों से गेहूं खरीदी करने वाला देश का नंबर-1 राज्य बन गया है। वहीं कुल गेहूं उपार्जन के मामले में प्रदेश पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। कोविड-19 अवधि को छोड़ दें तो पिछले 10 वर्षों में यह समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है।
Small Farmers Benefit: लघु और सीमांत किसानों को मिला प्राथमिकता लाभ
राज्य सरकार ने खरीदी प्रक्रिया में लघु और सीमांत किसानों को प्राथमिकता दी। प्रदेश के 8 लाख 9 हजार 990 छोटे एवं सीमांत किसानों से 32 लाख 14 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीदा गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं कई खरीदी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और किसानों को दी जा रही सुविधाओं की समीक्षा की। इसके साथ ही किसानों से बातचीत कर भुगतान और खरीदी व्यवस्था की जानकारी भी ली।
Wheat Procurement Payment: किसानों को 23 हजार करोड़ से ज्यादा भुगतान
प्रदेश सरकार ने किसानों को खरीदे गए गेहूं का अब तक 23,708.13 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया है। वहीं खरीदे गए गेहूं में से 96 लाख 52 हजार 957 मीट्रिक टन गेहूं का परिवहन भी पूरा किया जा चुका है, जो कुल उपार्जन का लगभग 93 प्रतिशत है। इस वर्ष किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा गया। इसके अलावा राज्य सरकार ने 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी दिया। इस तरह किसानों को कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर मिली।
MP Division Wise Wheat Procurement: संभागवार गेहूं खरीदी के आंकड़े
प्रदेश के विभिन्न संभागों में गेहूं खरीदी के आंकड़े भी सामने आए हैं। भोपाल संभाग सबसे आगे रहा, जहां 28 लाख 47 हजार 284 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया।
- रीवा संभाग: 6 लाख 15 हजार 851 मीट्रिक टन
- जबलपुर संभाग: 12 लाख 73 हजार 667 मीट्रिक टन
- शहडोल संभाग: 70 हजार 666 मीट्रिक टन
- सागर संभाग: 8 लाख 56 हजार 968 मीट्रिक टन
- भोपाल संभाग: 28 लाख 47 हजार 284 मीट्रिक टन
- नर्मदापुरम संभाग: 9 लाख 22 हजार 508 मीट्रिक टन
- उज्जैन संभाग: 22 लाख 84 हजार 47 मीट्रिक टन
- इंदौर संभाग: 8 लाख 62 हजार 719 मीट्रिक टन
- ग्वालियर संभाग: 4 लाख 36 हजार 805 मीट्रिक टन
- चंबल संभाग: 2 लाख 40 हजार 581 मीट्रिक टन
Wheat Procurement Facilities: खरीदी केंद्रों पर किसानों के लिए बेहतर इंतजाम
सरकार ने गेहूं खरीदी केंद्रों पर किसानों की सुविधा के लिए कई व्यवस्थाएं कीं। हर केंद्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 कर दी गई। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त तौल कांटे लगाने का अधिकार जिलों को दिया गया। तौल पर्ची जारी करने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक किया गया। वहीं देयक जारी करने की प्रक्रिया भी रात 12 बजे तक जारी रखी गई। खरीदी कार्य सप्ताह में 6 दिन संचालित किया गया।
किसानों के लिए केंद्रों पर पीने के पानी, छायादार बैठने की व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। इसके अलावा बारदाना, तौल कांटे, हम्माल, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, गुणवत्ता जांच उपकरण, पंखे और छन्ने जैसी व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गईं ताकि खरीदी प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी न हो।


