नर्मदापुरम के बलराम कृषि महोत्सव में सीएम मोहन यादव ने कवच योजना, भावांतर योजना, एमएसपी खरीदी, फसल विविधीकरण और किसान कल्याण योजनाओं की जानकारी दी।

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को नर्मदापुरम में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष के तहत किसानों के हित में संचालित योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार केवल खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के खातों तक भी पूरी जिम्मेदारी के साथ पहुंच रही है। किसानों को सिंचाई के लिए पानी, पर्याप्त बिजली, खाद-बीज और कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के साथ-साथ फसल बीमा, किसान सम्मान निधि और ब्याज मुक्त ऋण जैसी सुविधाओं का लाभ भी सीधे खातों में पहुंचाया जा रहा है।

Kawach Yojana: सहकारी खातों की समस्याओं से किसानों को मिलेगी राहत

डॉ. यादव ने बताया कि हाल ही में राज्य मंत्रिमंडल ने ऐतिहासिक कवच योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य उन किसानों को राहत देना है, जो सहकारी खातों में पुरानी अनियमितताओं या जांच प्रक्रिया में देरी के कारण नए ऋण और सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते थे। उन्होंने कहा कि कवच योजना के माध्यम से ऐसे किसानों को फिर से मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा, जिससे उन्हें नया कृषि ऋण मिलने के साथ-साथ सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ भी मिल सकेगा।

MSP, बोनस और भावांतर योजना से किसानों को मिला बड़ा सहारा

मुख्यमंत्री ने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव किसानों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। अब तक प्रदेश के 20 जिलों में ऐसे 10 आयोजन हो चुके हैं और नर्मदापुरम में आयोजित कार्यक्रम इस श्रृंखला का 11वां आयोजन है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के साथ खेत से लेकर बाजार तक खड़ी है। गेहूं उत्पादक किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के लिए एमएसपी और बोनस के साथ रिकॉर्ड 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया। वहीं सोयाबीन किसानों को भावांतर योजना से राहत मिली है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अब सरसों और धान को भी भावांतर योजना के दायरे में शामिल किया गया है। इसके अलावा पहली बार श्रीअन्न कोदो-कुटकी की एमएसपी पर खरीदी की गई और किसानों को बोनस भी प्रदान किया गया। मूंग उत्पादक किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए खरीदी सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दी गई है।

फसल विविधीकरण, डेयरी और मत्स्य पालन पर सरकार का फोकस

डॉ. यादव ने किसानों को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रहने की सलाह देते हुए फसल विविधीकरण अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने दुग्ध उत्पादन में 20 प्रतिशत तक वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए प्रदेशभर में दुग्ध समितियों का गठन किया जा रहा है और किसानों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूरा वर्ष किसान कल्याण को समर्पित है और इसी दिशा में लगातार नई पहलें की जा रही हैं।

Horticulture Farming: फलों की खेती और नर्सरी पर मिल रहा सरकारी अनुदान

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए खातों के निपटान की व्यवस्था में भी बदलाव किया है। पहले छह-छह महीने में खातों को पटाना पड़ता था, लेकिन अब यह अवधि बढ़ाकर एक वर्ष कर दी गई है। साथ ही 31 मार्च तक खाते साफ करने की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है। अब किसान अपनी सुविधा के अनुसार राशि जमा कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि कृषक कल्याण वर्ष के दौरान सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के साथ आधुनिक खेती, प्राकृतिक खेती और कृषि यंत्रीकरण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। किसानों को कृषि आधारित आय बढ़ाने के नए विकल्पों की जानकारी दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदापुरम जिले में आम, अमरूद, संतरा, अनार, नींबू और केला जैसी उद्यानिकी फसलों की अपार संभावनाएं हैं। सरकार फलों के बाग और नर्सरी स्थापित करने पर अनुदान दे रही है। इसके अलावा पॉलीहाउस और शेडनेट हाउस लगाने के लिए भी किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि महिला स्व-सहायता समूहों को "एक बगिया मां के नाम" योजना से जोड़ा जा रहा है। वहीं फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने वाले किसानों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जा रही है।

Narmadapuram Development: रेशम, शरबती गेहूं और बासमती से बनी पहचान

मुख्यमंत्री ने नर्मदापुरम की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र रेशम नगरी के रूप में अपनी अलग पहचान रखता है। यहां उत्पादित उच्च गुणवत्ता का रेशम, शरबती गेहूं और बासमती चावल प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में प्रसिद्ध हैं। उन्होंने कहा कि बाबई-मोहासा औद्योगिक क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है, जिससे क्षेत्र में निवेश और रोजगार की नई संभावनाएं बन रही हैं। साथ ही कटनी के निकट लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित किया जा रहा है। पिपरिया और पचमढ़ी क्षेत्र के स्थानीय निवासियों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान के लिए भी सरकार ने कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और कृषि वर्ष के दौरान किसानों के हित में कार्यक्रम और योजनाएं लगातार संचालित की जाती रहेंगी।